क्या खत्म हो गया सेमेस्टर सिस्टम? पश्चिम बंगाल में रातों-रात नोटिस वायरल, जान लीजिए पूरा सच

Himanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान, कोलकाता
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पश्चिम बंगाल में 12वीं की सेमेस्टर परीक्षा रद्द होने का फर्जी नोटिस वायरल होने के बाद शिक्षा बोर्ड ने FIR दर्ज कराई है। इसके साथ ही अपील की गई है कि छात्र आधिकारिक वेबसाइट पर ही भरोसा करें।

क्या खत्म हो गया सेमेस्टर सिस्टम? पश्चिम बंगाल में रातों-रात नोटिस वायरल, जान लीजिए पूरा सच

परीक्षा का नाम सुनते ही वैसे ही अच्छे भलों के पसीने छूटने लगते हैं और अगर ऐन वक्त पर कोई ऐसी खबर आ जाए जो पूरे एग्जाम सिस्टम को ही उलट पुलट कर दे... तो सोचिए छात्रों के दिलों पर क्या बीतेगी। पश्चिम बंगाल में आजकल कुछ ऐसा ही तनावपूर्ण माहौल देखने को मिल रहा है। इंटरनेट की तेज तर्रार दुनिया में एक खबर जंगल में लगी आग की तरह फैल गई कि पश्चिम बंगाल काउंसिल ऑफ हायर सेकेंडरी एजुकेशन (WBCHSE) ने 12वीं (HS) के लिए लागू किए गए नए सेमेस्टर सिस्टम को डस्टबिन में डाल दिया है। दावा किया जा रहा था कि अब पुरानी वाली सालाना परीक्षा ही ली जाएगी। इस एक 'हवा हवाई' नोटिस ने रातों रात लाखों छात्रों, उनके माता पिता और यहां तक कि स्कूल के शिक्षकों की भी नींद उड़ा दी।

क्या था पूरा मामला?

आजकल वॉट्सऐप और फेसबुक के जमाने में किसी भी बात को सच मान लेना बहुत आसान हो गया है। हुआ यूं कि एक लेटरहेड पर बाकायदा सरकारी अंदाज में छपा एक नोटिस वायरल होने लगा। इस फर्जी कागज में बड़े ही सलीके से लिखा था कि आने वाली हायर सेकेंडरी परीक्षाओं के लिए सेमेस्टर सिस्टम वापस लिया जा रहा है। बात सिर्फ यहीं तक नहीं रुकी। इसमें सिलेबस और एग्जाम के तरीके को लेकर भी कई भ्रामक बातें घुसा दी गई थीं। जाहिर है जब यह नोटिस छात्रों के हाथ लगा तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। जिन बच्चों ने सेमेस्टर के हिसाब से दिन-रात एक करके अपनी तैयारी शुरू कर दी थी वो एकदम से पशोपेश में पड़ गए कि अब पुरानी किताबों की तरफ भागें या नए सिलेबस पर ही टिके रहें।

बोर्ड ने डंके की चोट पर दी सफाई

जब यह अफवाह उड़ते उड़ते शिक्षा बोर्ड के गलियारों तक पहुंची तो उन्होंने तुरंत मोर्चा संभाला। बोर्ड के अधिकारियों ने साफ साफ लफ्जों में कह दिया है कि ऐसा कुछ नहीं है। WBCHSE ने इस वायरल डॉक्यूमेंट को सिरे से फर्जी और मनगढ़ंत करार दिया है। काउंसिल ने पूरी सख्ती के साथ कहा है कि सेमेस्टर सिस्टम को रद्द करने का कोई भी फैसला नहीं लिया गया है और पढ़ाई का जो नया ढांचा तय किया गया था, वह जस का तस लागू रहेगा। अपनी बात को और पुख्ता करने के लिए और इन खुराफाती तत्वों को कड़ा सबक सिखाने के लिए, काउंसिल ने अज्ञात लोगों के खिलाफ पुलिस में बकायदा FIR भी ठोक दी है।

पुलिस ने भी मामले की गंभीरता को समझते हुए अपनी तफ्तीश शुरू कर दी है। आखिर यह कोई मामूली बात तो है नहीं बल्कि यह लाखों बच्चों के भविष्य, उनके करियर और उनकी दिमागी शांति से जुड़ा बेहद संवेदनशील मसला है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही पुलिस उन चेहरों को बेनकाब करेगी जिन्होंने चंद लाइक्स, व्यूज या महज मजे के लिए यह पूरा फर्जीवाड़ा रचा। बोर्ड का साफ मानना है कि इस तरह की बेबुनियाद अफवाहें न सिर्फ बच्चों को मानसिक रूप से परेशान करती हैं, बल्कि उनकी पढ़ाई की पूरी मेहनत और प्लानिंग का कबाड़ा कर देती हैं। शिक्षा के क्षेत्र में इस तरह की हरकतें कतई बर्दाश्त नहीं की जा सकतीं।

छात्रों और अभिभावकों के लिए सख्त हिदायत

अब ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि अफवाहों के इस दौर में छात्र क्या करें? बोर्ड ने बच्चों और उनके अभिभावकों से हाथ जोड़कर गुजारिश की है कि वे सोशल मीडिया पर तैर रही हर खबर पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। कोई भी बड़ा अपडेट हो, नया नियम हो या परीक्षा की तारीखों में बदलाव, सब कुछ WBCHSE की अपनी आधिकारिक वेबसाइट और वेरिफाइड नोटिफिकेशन्स के जरिए ही जनता तक पहुंचाया जाता है। अगर किसी वॉट्सऐप ग्रुप में कोई नोटिस घूम रहा है और वेबसाइट पर उसका कोई नामोनिशान नहीं है, तो समझ लीजिए दाल में कुछ काला है, या पूरी की पूरी दाल ही काली है! इसलिए, किसी भी फॉरवर्ड किए गए मैसेज पर यकीन करने और घबराने से पहले उसे ऑफिशियल सोर्स से जरूर क्रॉस चेक कर लें।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव

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