UPSC-BPSC की तैयारी के लिए AI का कैसे करें अचूक इस्तेमाल, विकास दिव्यकीर्ति ने बताई रणनीति

Himanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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डॉ. विकास दिव्यकीर्ति ने यूपीएससी और बीपीएससी 2027 की तैयारी के लिए अनुशासन, निरंतरता और एआई के संतुलित उपयोग के बेहतरीन गुर सिखाए।

UPSC-BPSC की तैयारी के लिए AI का कैसे करें अचूक इस्तेमाल, विकास दिव्यकीर्ति ने बताई रणनीति

Vikas Divyakirti News: क्या आप भी लाल बत्ती वाली गाड़ी का ख्वाब देखते हैं? क्या आप भी चाहते हैं कि आपके नाम के आगे 'आईएएस' या 'एसडीएम' का रुतबेदार टैग लगे? अगर हां, तो आपको यह बात आज ही बहुत अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि कामयाबी सिर्फ चौबीसों घंटे किताबों में सिर खपाने से नहीं मिलती। सिविल सेवा परीक्षा, जिसे हमारे देश की सबसे मुश्किल और प्रतिष्ठित परीक्षाओं में गिना जाता है, असल में सिर्फ आपके किताबी ज्ञान का टेस्ट नहीं है। यह आपकी लगन, आपके धैर्य, आपके पसीने और आपके अनुशासन के एक लंबे सफर का इम्तिहान है। इसी मुश्किल सफर को थोड़ा आसान और एक बिल्कुल सही दिशा देने के मकसद से रविवार को एक बेहद खास और शानदार सेमिनार का आयोजन किया गया। इस महफिल की जान हजारों-लाखों छात्रों के चहेते और मशहूर शिक्षक, डॉ. विकास दिव्यकीर्ति थे। उन्होंने UPSC और BPSC 2027 को अपना टारगेट मानकर चल रहे युवाओं को सफलता के कुछ ऐसे गुरुमंत्र दिए, जो उनके लिए किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं हैं।

अनुशासन और निरंतरता है असली चाबी

रविवार का वह दिन पटना के दृष्टि आईएएस केंद्र के लिए बहुत खास था। पूरे बिहार और आसपास के इलाकों से करीब एक हजार से ज्यादा छात्रों का भारी हुजूम वहां उमड़ पड़ा था। हर किसी की आंखों में बस एक ही बड़ा सपना तैर रहा था कि कैसे भी करके इस परीक्षा के चक्रव्यूह को भेदा जाए। विकास सर के मंच पर आते ही तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा हॉल गूंज उठा। हमेशा की तरह अपनी बिल्कुल शांत, सधी हुई और दिल में उतर जाने वाली जुबान में उन्होंने बच्चों से सीधा संवाद किया। उन्होंने सबसे पहली और सबसे बड़ी गलतफहमी को दूर करते हुए बड़ी बेबाकी से कहा कि, "अक्सर लोग सोचते हैं कि जो सबसे ज्यादा पढ़ता है, वही आईएएस बनता है। लेकिन असल हकीकत यह है कि सिविल सेवा परीक्षा सिर्फ आपके ज्ञान को नहीं मापती। यह मुख्य रूप से आपके अनुशासन, आपकी निरंतरता (Consistency) और आपके मानसिक संतुलन की बहुत कड़ी परीक्षा है।"

किताबों का पहाड़ नहीं, सही दिशा है जरूरी

परीक्षा की ठोस रणनीति पर बात करते हुए विकास सर ने कुछ बेहद बुनियादी बातों पर जोर दिया। यह एक आम बात है कि नए छात्र बाजार में मिलने वाली ढेरों किताबों को देखकर बुरी तरह कन्फ्यूज हो जाते हैं। वो सब कुछ पढ़ने के चक्कर में कुछ भी ठीक से याद नहीं रख पाते। इस मुद्दे पर उन्होंने एकदम साफ लफ्जों में कहा कि अपने रिसोर्सेज यानी पढ़ने के स्रोतों को बिल्कुल सीमित रखें। सिर्फ उन गिनी-चुनी किताबों और नोट्स पर पूरा भरोसा करें जो वाकई प्रमाणिक और रिलायबल हैं। इसके अलावा, सबसे अहम बात है सिलेबस की गहरी समझ पैदा करना। जब तक आपको यह नहीं पता होगा कि क्या 'नहीं' पढ़ना है, तब तक आप सही दिशा में अपनी ऊर्जा और मेहनत नहीं लगा सकते। सर ने नियमित रूप से उत्तर लेखन (Answer Writing) के अभ्यास को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का एक जरूरी हिस्सा बनाने की सलाह दी। उनका मानना था कि जब तक आप अपनी सोच और विचारों को सही ढंग से कागज़ पर उकेरना नहीं सीखेंगे, तब तक सिर्फ पढ़ते रहने का कोई खास फायदा होने वाला नहीं है।

टाइम मैनेजमेंट और मानसिक संतुलन

इस शानदार सेमिनार में समय प्रबंधन यानी टाइम मैनेजमेंट को सफलता की सबसे बड़ी और अहम कुंजी बताया गया। बिना किसी ठोस प्लान और रूटीन के बस यूं ही पढ़ते रहना एक बहुत बड़ी भूल साबित हो सकती है। विकास सर ने समझाया कि आपके पास हर दिन, हर हफ्ते और हर महीने का एक स्पष्ट टारगेट होना चाहिए। इसके अलावा, तैयारी के इस लंबे सफर में अक्सर बच्चों का हौसला टूटने लगता है। निराशा और डिप्रेशन से बचने के लिए खुद को मानसिक रूप से मजबूत रखना सबसे ज्यादा जरूरी है। आपको अपने आसपास का माहौल ऐसा बनाना होगा, जो आपको नेगेटिविटी से दूर रखे और आपको आपके लक्ष्य की याद दिलाता रहे।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से कैसे करें परीक्षा की तैयारी

तैयारी के इसी सिलसिले में और तेजी से बदलते वक्त के तकाजे को समझते हुए, सीएनएलयू (CNLU), पटना की शैक्षणिक विकास समिति द्वारा आयोजित 'परस्पेक्ट' (Perspect) नाम के कार्यक्रम में भी डॉ. विकास दिव्यकीर्ति ने शिरकत की। वहां उन्होंने आधुनिक तकनीक, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते रोल पर बेहद काम की बात कही। उन्होंने समझाया कि AI आज की सबसे बड़ी सच्चाई है और इससे दूर भागना या डरना बेवकूफी होगी। लेकिन, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का अंधाधुंध इस्तेमाल भी उतना ही खतरनाक है। उन्होंने बड़ी गहराई से कहा कि एआई का संतुलित और सही उपयोग ही मानव समाज और छात्रों के लिए वाकई लाभकारी साबित होगा। इसे अपनी सहूलियत का जरिया बनाएं, खुद इसका गुलाम न बनें। समसामयिक घटनाओं (Current affairs) का सिर्फ रट्टा मारने के बजाय, उनका गहराई से एनालिसिस करना सीखें।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव

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