
Vikas Divyakirti : नौकरी करना फायदेमंद है या बिजनेस, डॉ विकास दिव्यकीर्ति ने बताया
Vikas Divyakirti : नौकरी अच्छी या बिजनेस, यूपीएससी कोचिंग के पॉपुलर टीचर डॉ. विकास दिव्यकीर्ति ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखी है। उनका मानना है कि स्टार्टअप करना यानी अपना बिजनेस शुरू करना नौकरी करने से बेहतर है।
Vikas Divyakirti : नौकरी करना बेहतर है या बिजनेस, अकसर लोगों के बीच यह बहस का विषय मन जाता है। ज्यादातर लोगों को यह प्रश्न न सिर्फ करियर की शुरुआत में बल्कि जीवनभर कंफ्यूज करता रहा है। इस मुद्दे पर विचार विमर्श के दौरान लोग एक दूसरे को नौकरी और बिजनेस के नफा नुकसान गिनाने लगते हैं। यूपीएससी कोचिंग के पॉपुलर टीचर डॉ. विकास दिव्यकीर्ति ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखी है। उनका मानना है कि स्टार्टअप करना यानी अपना बिजनेस शुरू करना नौकरी करने से बेहतर है। उन्होंने तर्क देकर कहा कि बिजनेसमैन या उद्यमी होने में आपकी मेहनत का फायदा आपके बच्चे को भी मिलता है। आपका बच्चा वहीं से शुरू करेगा जहां आप छोड़ रहे हैं। उसे पूरी एक पीढ़ी की मेहनत का फायदा मिलेगा। जबकि नौकरी में आपका बच्चा वहीं से शुरू करेगा, जहां से आपने अपने करियर में किया था। आपके जैसा पूरा का पूरा संघर्ष वो भी करेगा। उन्होंने कहा कि नौकरी अच्छी है लेकिन वो इतनी अच्छी चीज भी नहीं है कि उसके लिए पागल हो जाएं।

दृष्टि आईएएस कोचिंग के संस्थापक और एमडी विकास दिव्यकीर्ति ( Vikas Divyakirti ) ने एक कार्यक्रम में कहा, 'मेरे एक मित्र हैं। उन्होंने मुझसे पूछा “सर, मैंने तीस साल नौकरी की है और अब मैं अपनी फील्ड में लगभग टॉप पर हूं। मैं आपको एक टीवी चैनल के टॉप व्यक्ति के बारे में बता रहा हूं। मान लीजिए अगर मैं आपसे पूछूं कि मैंने सही किया या गलत, तो आप क्या सलाह देंगे?”
स्टार्टअप क्यों बेहतर है
मैंने कहा - “सलाह तो मैं क्या दूंगा, आप तो मुझसे बड़े हैं, बल्कि सलाह तो मैं आपसे ले लूंगा। लेकिन अगर आप मेरी राय जानना चाहते हैं, तो मैं आपको एक बात बताता हूँ। मेरा मानना यह है कि नौकरी अच्छी चीज है, लेकिन नौकरी से भी बेहतर है उद्यम (Entrepreneurship) या Self Employment। यह बात मैं कई मंचों पर कह चुका हूं। कुछ दिन पहले मैं दिल्ली के बहुत प्रतिष्ठित कॉलेज श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) गया था। वहां भी मैंने खुलकर कहा था कि स्टार्टअप करना नौकरी करने से बेहतर क्यों है। मैंने वहां तर्क दिया था कि स्टार्टअप क्यों बेहतर है, लेकिन एक तर्क रह गया था, जो आज मैं आपको बताना चाहता हूं। जब हम नौकरी करते हैं - मैंने उसी व्यक्ति से कहा, वहां आपको तीस साल हो गए हैं और अब आपके पास लगभग तीन साल बचे होंगे।” वह बोला, “हाँ सर, तीन साल बाद मैं रिटायर हो जाऊंगा।”
विकास दिव्यकीर्ति ने आगे बताया, 'मैंने कहा आपकी जिंदगी भर की कमाई को देखें - आपकी महीने की सैलरी शायद डेढ़ दो ढाई लाख रुपये महीना होगी। तो जिंदगी भर में आपने ठीक-ठाक कमाया होगा, लेकिन जितना कमाया होगा, उसमें से काफी खर्च भी हो गया होगा। क्योंकि परिवार के साथ खर्च भी बढ़ते हैं। उन्होंने कहा, हां सर, खर्च हो जाता है। बस काम चल जाता है। नोएडा में एक घर खरीदा लिया है।' विकास दिव्यकीर्ति ने कहा है कि दिल्ली में नौकरी करते हुए घर खरीदना बेहद मुश्किल काम है। जो लोग दिल्ली में नौकरी करते हैं वो दिल्ली के आसपास नोएडा, इंदिरापुरम या गुड़गांव जैसी जगहों पर घर खरीद लेते हैं। यहां दिल्ली से सस्ता अच्छा घर मिल जाता है। मैंने अपने मित्र से पूछा कि रिटायरमेंट के बाद आपके पास कितने पैसे होंगे, आपकी जिंदगी भर की बचत कितनी होगी। उन्होंने बोला कि उन्होंने कुछ स्कीम्स में पैसा लगा रखा है। 10 - 15 लाख रुपये कैश होगा। स्कीम्स से हर माह करीब 50 से 70 हजार रुपये आ जाएगा। इससे परिवार के खर्च निकलते रहेंगे।'
मेरे नौकरी छोड़ने के फैसले से 1800 परिवार चल रहे हैं
डॉ. दिव्यकीर्ति ने आगे कहा, 'मैंने अपने मित्र से पूछा कि जब आपका बच्चा नौकरी शुरू करेगा तो उसकी सैलरी क्या होगी। उन्होंने कहा कि 30 से 35 हजार। मैंने अपने मित्र से कहा कि मान लीजिए आपने 30 साल पहले नौकरी की जगह बिजनेस शुरू कर लिया होता। मैं मानता हूं कि बिजनेस में खतरा ज्यादा होता है। हजार में एक उद्यम बेहद सफल होता है। लेकिन आप थोड़ी मेहनत से रीजनेबल सक्सेस ला सकते हैं। धीरे धीरे आपको लोग जानने लगते हैं। एक ब्रांडिंग बनने लगती है। दुनिया का एक गोल्डन रूल है कि किसी काम में आपने तीन साल मेहनत से खर्च कर दिए तो आपको उसमें आपको सक्सेस मिलनी तय हो जाएगी। तो मैंने अपने मित्र से कहा कि अगर आपने तीन साल बिजनेस खोल मेहनत कर ली होती और सफल हो जाते तो आज आप 100 या 500 लोगों को नौकरी दे रहे होते। आपका एक साम्राज्य खड़ा हो जाता। और अगर असफल हो भी जाते तो 3 साल बाद फिर से नौकरी कर लेते। 30 साल नहीं तो 27 साल नौकरी कर लेते। कोई अगर मुझसे पूछता है कि मैं जिंदगी में सबसे ज्यादा खुश किस चीज से होता हूं तो वो ये है जब मैंने सिविल सर्वेंट की नौकरी छोड़ी थी तब हमारे यहां तीन लोग काम करते थे, आज हमारे दृष्टि कोचिंग ग्रुप में 1800 लोग काम करते हैं। यानी मेरे उस फैसले से 1800 परिवारों का गुजारा चल रहा है। मान सकते हैं कि बिजनेस में अगर आप 30 साल मेहनत करते तो आपकी मौजूदा सैलरी से आपकी बिजनेस 50 गुना ज्यादा कमा रहा होता। उसकी कंपनी की वेल्यू आपकी सैलरी से शायद 1000 गुना ज्यादा होती। ऐसा वेल्यूएशन होता है । अगर आप बिजनेसमैन या उद्यमी होते तो आपकी मेहनत का फायदा आपके बच्चे को मिलता। आपका बच्चा वहीं से शुरू करता जहां आप छोड़ रहे हैं। उसे पूरी एक पीढ़ी की मेहनत का फायदा मिलता, जो अब नहीं मिलेगी। जबकि नौकरी में आपका बच्चा वहीं से शुरू करेगा, जहां से आपने किया था। आपके जैसा पूरा संघर्ष वो भी करेगा। उन्होंने कहा कि नौकरी अच्छी है लेकिन वो इतनी अच्छी चीज भी नहीं है कि उसके लिए पागल हो जाना है।'
कौन हैं डॉ. विकास दिव्यकीर्ति
डॉ. विकास दिव्यकीर्ति यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की कोचिंग की दुनिया में सबसे बेहतरीन और लोकप्रिय शिक्षकों में शुमार हैं। इन्हें लाखों लोग सुनना पसंद करते हैं। उनके छोटे छोटे मोटिवेशनल वीडियोज इंटरनेट पर वायरल होते रहते हैं। न सिर्फ यूपीएससी अभ्यर्थी बल्कि वे आम लोग भी उनके मुरीद हैं जिनका इस परीक्षा से कोई लेना-देना नहीं है। किसी भी पेचीदा विषय को आसानी से सिखाने का उनका अनोखा अंदाज और सेंस ऑफ ह्यूमर उन्हें और शिक्षकों से अलग बनाता है। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के अभ्यर्थियों के प्रेरणास्त्रोत विकास दिव्यकीर्ति के जीवन के बारे में जानने में लाखों लोग दिलचस्पी लेते हैं।
क्या थी यूपीएससी में रैंक
विकास दिव्यकीर्ति ने 1996 में पहले प्रयास में ही यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली थी। उनकी 384वीं रैंक थी। होम मिनस्टिरी कैडर में केंद्रीय सचिवालय सेवा में नौकरी पाई। लेकिन कुछ माह बाद उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया था।



