मुखर्जी नगर की अब दरकार नहीं; स्मार्टफोन-AI से कैसे क्रैक करें UPSC? विजेंद्र मसिजीवी ने क्या बताया
जेन जी ने यूपीएससी की तैयारी का पूरा तरीका बदल दिया है, जहां अब भारी भरकम किताबों और दिल्ली की महंगी कोचिंग की जगह स्मार्टफोन, एआई टूल्स और स्मार्ट स्ट्रेटजी ने ले ली है।

यूपीएससी... यह सिर्फ एक परीक्षा नहीं है, बल्कि देश के लाखों युवाओं की आंखों का वह सपना है। जिसके लिए वे अपनी जवानी के कई बेशकीमती साल किताबों के पन्नों में खपा देते हैं। एक वक्त था जब इस सपने को पूरा करने के लिए दिल्ली के मुखर्जी नगर या करोल बाग की तंग गलियों में धक्के खाना एक नियम माना जाता था। लेकिन अब वक्त करवट ले रहा है। इस बदलाव की तेज लहर लेकर आई है हमारी नई पीढ़ी, जिसे दुनिया 'जेन जी' के नाम से जानती है। नई पीढ़ी ने कैसे यूपीएससी की तैयारी करने का तरीका बदला है इस पर मशहूर टीचर विजेंद्र मसिजीवी पूरी बात रखी है। उन्होंने बताया कि स्मार्टफोन, तेज इंटरनेट और एआई की गोद में पली-बढ़ी इस नई नस्ल ने यूपीएससी की परीक्षा को देखने, समझने और उसे क्रैक करने का पूरा नजरिया ही बदलकर रख दिया है। आइए गहराई से समझते हैं कि आखिर नई पीढ़ी के आने से यूपीएससी की तैयारी के तौर-तरीकों में कितनी बड़ी क्रांति आ चुकी है।
विजेंद्र मसिजीवी ने अपने एक वीडियो में बताया कि जेन जी यानी वो युवा जो 1997 से 2012 के बीच पैदा हुए हैं। ये डिजिटल दुनिया के असली बाशिंदे हैं। पहले जहां तैयारी का मतलब 10-10 किताबें पढ़ना और दिन-रात एक करके पागलपन की हद तक मेहनत करना होता था, वहीं आज का युवा हार्ड वर्क से ज्यादा स्मार्ट वर्क पर भरोसा करता है। वे अब रट्टा मारने की बजाय स्ट्रेटेजिक प्लानिंग और एआई टूल्स का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं। अब छात्रों को घंटों बैठकर खुद के नोट्स बनाने की उतनी जरूरत महसूस नहीं होती, क्योंकि एआई उनके लिए कुछ ही मिनटों में बेहतरीन और सटीक समरी तैयार कर देता है। वे पिछले सालों के सवालों को समझने के लिए डेटा एनालिटिक्स का सहारा लेते हैं। यूट्यूब, टेलीग्राम और तमाम ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स ने उन महंगे कोचिंग संस्थानों का एकाधिकार लगभग खत्म कर दिया है, जो कभी इस फील्ड के बेताज बादशाह हुआ करते थे।
छोटे शहरों से निकल रहे हैं नए टॉपर्स
विजेंद्र मसिजीवी ने कहा कि इस डिजिटल क्रांति का सबसे बड़ा और सुखद फायदा छोटे कस्बों और गांवों के उन होनहारों को मिला है, जिनके पास दिल्ली जाकर लाखों रुपये फूंकने की हैसियत नहीं थी। आज ऑनलाइन मेंटरशिप इतनी सस्ती और आसान हो गई है कि कोई भी युवा अपने घर के एक छोटे से कमरे में बैठकर देश के टॉप मेंटर्स से सीधे गाइडेंस ले सकता है। इंटरनेट ने भौगोलिक और आर्थिक दूरियों को काफी हद तक पाट दिया है। यही वजह है कि अब यूपीएससी के टॉपर्स सिर्फ महानगरों से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे गांवों से भी निकलकर आ रहे हैं। एम्स के डॉक्टर रहे अनुज अग्निहोत्री का तीसरे प्रयास में टॉप करना हो या फिर बिना किसी फॉर्मल कोचिंग के आस्था सिंह का परीक्षा पास करना, ये उदाहरण चीख-चीखकर गवाही दे रहे हैं कि अगर आपके पास सही रणनीति और डिजिटल टूल्स हैं तो कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।
सूचनाओं का भंवर और नई चुनौतियां
लेकिन हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। इंटरनेट ने जहां रास्ते आसान किए हैं, वहीं कई नई मुसीबतें भी खड़ी कर दी हैं। आज बाजार में इतना ज्यादा स्टडी मटेरियल और ऑनलाइन कंटेंट मौजूद है कि छात्र अक्सर भयंकर कन्फ्यूजन का शिकार हो जाते हैं। जरूरत से ज्यादा जानकारी की वजह से पढ़ाई में विस्तार तो आया है, लेकिन गहराई कम हो गई है। मोटी किताबों की जगह अब पीडीएफ और समरी ने ले ली है। इसके अलावा, सोशल मीडिया भी एक बहुत बड़ा डिस्ट्रैक्शन बन चुका है जो छात्रों की एकाग्रता को बुरी तरह प्रभावित करता है।
बदल गई है सफलता की भाषा
विजेंद्र मसिजीवी ने बताया कि पुरानी पीढ़ी यानी मिलेनियल् के दौर को याद करें, तो उस समय कोचिंग इंडस्ट्री में एक जबरदस्त बूम आया था। भारी-भरकम फीस और दिल्ली का खर्च हर किसी के बस का नहीं था। तब टीना डाबी या इरा सिंघल जैसे टॉपर्स अनुशासन और ज्यादा से ज्यादा किताबें पढ़ने पर जोर देते थे। लेकिन आज के नए टॉपर्स जैसे इशिता, श्रुति या आदित्य श्रीवास्तव के इंटरव्यू सुनिए, उनके मुंह से आपको मल्टीपल रिवीजन, आंसर राइटिंग, डिजिटल रिसोर्सेज और स्मार्ट प्रिपरेशन जैसे शब्द ज्यादा सुनने को मिलेंगे। इसके साथ ही, जेन जी अपनी मेंटल हेल्थ और पढ़ाई के बीच एक संतुलन बनाकर चलने में यकीन रखती है, जो यकीनन एक बहुत ही सकारात्मक बदलाव है।
गौरतलब है कि यहां विजेंद्र मसिजीवी ने जोर देकर कहा कि यहां यह समझना भी बहुत जरूरी है कि तकनीक ने भले ही तैयारी का तरीका बदल दिया हो, लेकिन परीक्षा का मूल स्वभाव आज भी वैसा ही है। यूपीएससी को आज भी आपसे असीम धैर्य, अनुशासन और लगातार लगे रहने की जिद्द चाहिए। शॉर्टकट आपको कुछ कदम आगे तो ले जा सकते हैं, लेकिन मंजिल तक पहुंचने के लिए आपको अपनी बुनियाद जैसे एनसीईआरटी को अपना आधार बना कर मजबूत रखना ही होगी। गेम के नियम और मैदान जरूर इवॉल्व हुए हैं, लेकिन इस खेल को जीतने के उसूल आज भी वही पुराने हैं।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव


