अमेरिका में इंटर्नशिप और नौकरी का रास्ता मुश्किल, भारतीय छात्रों को ट्रंप का झटका; CPT नियम सख्त
अमेरिका में पढ़ाई और नौकरी का सपना देख रहे छात्रों के लिए बुरी खबर है। ट्रंप सरकार ने CPT इंटर्नशिप नियमों को सख्त कर दिया है, जिससे मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।

अमेरिका जाकर पढ़ाई करने और फिर वहीं नौकरी हासिल करने का सपना दुनिया भर के लाखों छात्र देखते हैं। खासकर हमारे हिंदुस्तान से हर साल ढेरों नौजवान इस उम्मीद में उड़ान भरते हैं कि एक बेहतरीन डिग्री के साथ-साथ उन्हें वहां काम करने का शानदार तजुर्बा भी मिलेगा। लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि इस सुनहरे सपने के रास्ते में कई रोड़े अटकने वाले हैं। ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों की इंटर्नशिप से जुड़े नियमों को काफी सख्त कर दिया है। इस नए फैसले ने उन छात्रों की रातों की नींद उड़ा दी है जो अपनी पढ़ाई के दौरान या उसके बाद वर्क एक्सपीरियंस हासिल करना चाहते हैं।
नए आदेश से मची खलबली
24 अगस्त को जारी किए गए एक फेडरल मेमो ने अमेरिकी यूनिवर्सिटीज में अच्छी-खासी खलबली मचा दी है। यह मेमो 'करिकुलर प्रैक्टिकल ट्रेनिंग' यानी CPT के इस्तेमाल को लेकर कड़ी चेतावनी देता है। आसान जुबान में समझें तो CPT एक तरह का वर्क ऑथराइजेशन है जो F-1 वीजा पर पढ़ रहे विदेशी छात्रों को उनके कोर्स से जुड़ी इंटर्नशिप, प्रैक्टिकम और ट्रेनिंग करने की इजाजत देता है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर यूनिवर्सिटीज ने फेडरल नियमों का सख्ती से पालन नहीं किया, तो विदेशी छात्रों का दाखिला लेने का उनका सर्टिफिकेशन भी खतरे में पड़ सकता है।
इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) का हिस्सा माने जाने वाले स्टूडेंट एंड एक्सचेंज विजिटर प्रोग्राम (SEVP) ने इस मेमो में साफ कहा है कि हाल के दिनों में CPT की मंजूरियों में बेतहाशा बढ़ोतरी देखी गई है। सरकार को शक है कि कई मामलों में उन नियमों को ताक पर रखा जा रहा है जिनमें यह शर्त है कि ट्रेनिंग, तय किए गए कोर्स का एक अहम और जरूरी हिस्सा होनी चाहिए।
नए आदेश से एहतियात पर नामी यूनिवर्सिटीज
नए दिशा-निर्देश आते ही कई बड़ी और नामी यूनिवर्सिटीज ने एहतियात बरतना शुरू कर दिया है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, लॉस एंजिल्स (UCLA) ने फेडरल गाइडलाइंस की पूरी तरह से समीक्षा होने तक कुछ खास CPT अर्जियों पर फिलहाल रोक लगा दी है। वहीं, यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले का भी कहना है कि वो आने वाले कुछ दिनों तक नई याचिकाओं पर तुरंत कोई कार्यवाही नहीं करेगा। हालांकि, बर्कले ने यह भरोसा जरूर दिलाया है कि जो CPT सीधे तौर पर डिग्री की जरूरत से जुड़े हैं, उनके काम में कोई रुकावट नहीं आएगी। सरकार की नजर खास तौर पर "Day 1 CPT" वाले मामलों पर है, जहां छात्र कोर्स में दाखिला लेते ही तुरंत काम करने की इजाजत मांग लेते हैं। सरकार कोई नया वीजा नहीं ला रही है, बल्कि मौजूदा नियमों का ही कड़ाई से पालन करवा रही है।
अब सवाल उठता है कि इसका H-1B वीजा से क्या लेना-देना है? दरअसल, CPT पढ़ाई के दौरान मिलता है, जबकि H-1B विदेशी प्रोफेशनल्स को नौकरी के लिए दिया जाता है। लेकिन एक छात्र के सफर में ये दोनों कड़ियां आपस में गहराई से जुड़ी हुई हैं। छात्र पढ़ाई के दौरान CPT लेते हैं, फिर कोर्स खत्म होने के बाद 'ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग' (OPT) के जरिए काम करते हैं, और आखिर में कोई कंपनी उन्हें स्पॉन्सर कर दे तो वो H-1B वीजा की सीढ़ी चढ़ जाते हैं।
पहले ही कर रहे हैं कड़े बदलाव
ट्रंप सरकार पहले से ही H-1B वीजा सिस्टम में बड़े और कड़े बदलाव कर रही है। अगस्त में होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट ने नए H-1B वीजा के लिए $103,265 की भारी-भरकम फीस को हमेशा के लिए लागू करने का प्रस्ताव रखा है। इससे पहले 2025 में $100,000 की फीस लगाई गई थी, जिस पर एक जज ने रोक लगा दी थी। H-1B प्रोग्राम के तहत हर साल 65,000 वीजा दिए जाते हैं (प्लस 20,000 एडवांस डिग्री वालों के लिए)। पिछले साल नियोक्ताओं ने करीब 344,000 H-1B वीजा के लिए रजिस्ट्रेशन किया था, जो 2024 के मुकाबले 25% कम है और 2023 के 759,000 के आंकड़े से आधे से भी कम रह गया है। सरकार अब ज्यादा स्किल और ज्यादा सैलरी वालों को तरजीह देने की बात कर रही है।
फिलहाल 24 अगस्त के मेमो का सीधा असर H-1B पर नहीं, बल्कि CPT पर पड़ा है। जो छात्र नियमों के दायरे में रहकर इंटर्नशिप कर रहे हैं, वो अभी भी इसके हकदार हैं। लेकिन यूनिवर्सिटीज पर अब भारी दबाव है कि वो हर एक अर्जी को बारीकी से जांचें। कुल मिलाकर तस्वीर साफ है कि अमेरिका में एक विदेशी छात्र के सफर के हर कदम पर अब सरकार की पैनी नजर है। छात्रों और यूनिवर्सिटीज के जहन में अब बस यही सवाल घूम रहा है कि आने वाले वक्त में नियमों का यह शिकंजा कितना कसेगा और क्या इसका असर भविष्य में मिलने वाली नौकरियों पर भी पड़ेगा।


