UPTET Exam Analysis 2026: आसान या कठिन? पहले दिन कैसा रहा यूपी टीईटी पेपर का मिजाज, यहां देखें
UPTET Exam Analysis 2026 : उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित यूपीटीईटी 2026 परीक्षा के पहले दिन दोनों शिफ्टों का पेपर सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और प्रश्न आसान से मध्यम स्तर के आए थे।

UPTET Exam Analysis 2026 : उत्तर प्रदेश में सरकारी शिक्षक बनने का सपना देख रहे लाखों युवाओं का इंतजार आज आखिरकार खत्म हो गया। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) की तरफ से आयोजित की जाने वाली उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET 2026) आज 2 जुलाई से शुरू हो चुकी है। सुबह से ही राज्य के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर उम्मीदों और हल्की घबराहट से भरे चेहरे नजर आने लगे थे। भारी सुरक्षा इंतजामों और कड़े नियमों के बीच इस तीन दिवसीय परीक्षा के पहले दिन का खेल अब खत्म हो चुका है। परीक्षा देकर केंद्रों से बाहर निकले अभ्यर्थियों के चेहरों पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कहीं राहत की मुस्कान थी तो कहीं अगली शिफ्ट की चिंता। कुल मिलाकर, पहले दिन का सफर शांतिपूर्ण रहा और अभ्यर्थियों के मुताबिक सवाल न तो बहुत ज्यादा उलझाने वाले थे और न ही बेहद हलवे ही थे। आइए सिलसिलेवार ढंग से समझते हैं कि आज के दोनों शिफ्टों के पेपर का मिजाज कैसा रहा और किस सेक्शन ने उम्मीदवारों को सबसे ज्यादा आजमाया।
तीन दिनों तक चलेगा इम्तिहान
इस बार उत्तर प्रदेश की इस बेहद लोकप्रिय पात्रता परीक्षा का आयोजन 02, 03 और 04 जुलाई 2026 को तीन दिनों तक किया जा रहा है। आयोग ने परीक्षा के शेड्यूल को इस तरह से बांटा है कि अभ्यर्थियों को किसी तरह की आपाधापी या परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके तहत उच्च प्राथमिक स्तर यानी पेपर 2 की परीक्षा का आयोजन 02 और 03 जुलाई को किया जा रहा है, जबकि प्राथमिक स्तर यानी पेपर 1 की परीक्षा का आयोजन 03 और 04 जुलाई को होना तय हुआ है। यह पूरी परीक्षा ऑफलाइन मोड में पेन और पेपर के जरिए आयोजित की जा रही है, जिसमें हर पेपर को हल करने के लिए उम्मीदवारों को पूरे ढाई घंटे का वक्त दिया जाता है। इस परीक्षा में कुल 150 ऑब्जेक्टिव टाइप सवाल पूछे जाते हैं, जिनमें किसी भी तरह की नेगेटिव मार्किंग नहीं रखी गई है, जिससे छात्रों ने राहत की सांस ली है। आज पहले दिन पेपर 2 की परीक्षा दोनों शिफ्टों में सफलतापूर्वक संपन्न करा ली गई, जिसने आगे की परीक्षाओं के लिए एक मजबूत माहौल तैयार कर दिया है।
पेडागोजी ने दी राहत, गणित ने थोड़ा चटकाया
सुबह की पहली शिफ्ट का वक्त 09:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक तय किया गया था और जब छात्र इस परीक्षा को देकर बाहर निकले तो उनके अनुभव काफी सकारात्मक रहे। पहली शिफ्ट के पेपर को कुल मिलाकर आसान से मध्यम दर्जे का माना गया, जिसमें चाइल्ड डेवलपमेंट एंड पेडागोजी का हिस्सा काफी स्कोरिंग साबित हुआ। इस बार पेडागोजी में सुकराती विधि, क्लासरूम-बेस्ड लर्निंग, स्कैफोल्डिंग और लर्निंग एजुकेशन से जुड़े बेहद सीधे और समझ पर आधारित सवाल पूछे गए थे, जिसके कारण जिन छात्रों ने बुनियादी सिद्धांतों को अच्छे से समझा था उन्हें कोई खास दिक्कत नहीं आई। इसके साथ ही भाषाओं के सेक्शन में भी बड़ा ही दिलचस्प नजारा देखने को मिला, जहां हिंदी भाषा के तहत व्याकरण के रटते-रटाए कठिन नियमों के बजाय भाषा के व्यावहारिक इस्तेमाल और शिक्षण शास्त्र पर ज्यादा ध्यान दिया गया था, जिससे यह सेक्शन आसान से मध्यम स्तर का रहा।
पहली शिफ्ट में ही अंग्रेजी भाषा के अंतर्गत कॉन्सेप्ट पर आधारित व्याकरण और रीडिंग कॉम्प्रिहेंशन यानी गद्यांश के सवाल पूछे गए, जो थोड़े लंबे जरूर थे लेकिन समझने में आसान थे, जिसके कारण इसका स्तर भी आसान से मध्यम ही रहा। वहीं दूसरी तरफ विज्ञान और गणित के सेक्शन ने छात्रों का थोड़ा वक्त जरूर लिया, लेकिन यहां भी विज्ञान में राहत की बात यह रही कि लंबे-चौड़े न्यूमेरिकल हल करने के बजाय सीधे फैक्ट्स और वैज्ञानिक समझ पर आधारित थ्योरी वाले सवाल पूछे गए। गणित के हिस्से में अलजेब्रा, क्वाड्रेटिक इक्वेशंस, ज्योमेट्री और सीधे फॉर्मूले पर आधारित सवालों का दबदबा रहा, जिन्होंने छात्रों को कैलकुलेशन में थोड़ा उलझाया और पसीना छुड़ाया। इस प्रकार सामाजिक विज्ञान और गणित-विज्ञान दोनों ही मुख्य विषयों का स्तर पहले पड़ाव में आसान से मध्यम के बीच बना रहा, जिसने परीक्षा के शुरुआती दौर को काफी संतुलित और उम्मीद जगाने वाला बना दिया।
दूसरी शिफ्ट का हाल
दोपहर 02:30 बजे से शाम 05:00 बजे तक चली दूसरी शिफ्ट का मिजाज सुबह के मुकाबले थोड़ा सा संजीदा और कठिन रहा, जिसे परीक्षा देकर बाहर निकले कैंडिडेट्स ने पूरी तरह से मध्यम स्तर का बताया। शाम की शिफ्ट में सुबह जो सेक्शन बहुत आसान लग रहे थे, उनमें थोड़ा घुमावदार मोड़ देखा गया, जहां चाइल्ड डेवलपमेंट एंड पेडागोजी का हिस्सा आसान से मध्यम स्तर का रहा और इसमें सीधे सवालों के बजाय सिचुएशनल यानी परिस्थिति आधारित सवाल ज्यादा शामिल किए गए थे। भाषा के दोनों प्रश्नपत्र शाम को भी आसान से मध्यम रहे, लेकिन गणित, विज्ञान और सोशल विज्ञान के मुख्य विषय वाले सेक्शन ने अभ्यर्थियों को अच्छा-खासा आजमाया, क्योंकि सोशल विज्ञान में इतिहास और नागरिक शास्त्र से कुछ बहुत ही गहरे सवाल उठाए गए थे।
पहले दिन का इम्तिहान खत्म होने के बाद अब छात्र अनौपचारिक आंसर-की का इंतजार कर रहे हैं ताकि वे अपने स्कोर का एक सटीक अंदाजा लगा सकें, जबकि प्रशासन और अभ्यर्थियों दोनों की नजरें कल यानी 3 जुलाई को होने वाले अगले चरण की परीक्षा पर टिकी हुई हैं। परीक्षा केंद्रों से बाहर आते हुए प्रयागराज के एक अभ्यर्थी अनिकेत ने बताया, "सुबह का पेपर बहुत संतुलित था, पेडागोजी के सवालों ने दिल खुश कर दिया। लेकिन शाम की शिफ्ट वाले दोस्तों से जो फीडबैक मिला, उससे लगता है कि विषय वाले हिस्से की तैयारी बहुत मजबूत होनी चाहिए।"
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
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- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव


