UPTET 2026: नॉर्मलाइजेशन के फेर में दशमलव के हजारवें हिस्से से फेल हुए अभ्यर्थी, आयोग से गुहार

By Prachi
लाइव हिन्दुस्तान, संजोग मिश्र, प्रयागराज
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यूपीटीईटी में पहली बार लागू नॉर्मलाइजेशन के कारण कई अभ्यर्थी बेहद सूक्ष्म अंतर (0.00033 अंक तक) से फेल हो गए हैं। नाराज अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट के पुराने आदेश का हवाला देकर आयोग को ज्ञापन सौंपा है।

UPTET Exam 2026
UPTET 2026 (ANI Photo)

यूपीटीईटी में लागू नॉर्मलाइजेशन के फॉर्मूले ने कई अभ्यर्थियों के सपने चकनाचूर कर दिए हैं। परीक्षा देने के बाद जब इन अभ्यर्थियों ने हल किए गए प्रश्नों का उत्तरकुंजी से मिलान किया था तो आश्वस्त थे कि वह पास हो जाएंगे। हालांकि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से यूपीटीईटी में पहली बार लागू की गई नॉर्मलाइजेशन व्यवस्था के कारण वह दशमलव के भी दशांस से फेल हो गए हैं। इनमें से तमाम अभ्यर्थियों ने चयन आयोग को प्रत्यावेदन देकर पास करने की गुहार लगाई है।

कोर्ट ने यूपीटीईटी में आधे अंकों की दी थी छूट, यहां दशमलव से फेल

अभ्यर्थियों का तर्क है कि परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय ने 2013 में आयोजित यूपीटीईटी में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को 150 के पूर्णांक में 55 प्रतिशत के लिहाज से 82.5 अंकों पर पास किया था। उस परीक्षा में 82 अंक (दशमलव पांच अंकों से फेल) पाने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने याचिकाएं की थी तो हाईकोर्ट ने दशमलव पांच अंकों की छूट देते हुए 82 नंबर पर पास करने का आदेश दिया था। यह आदेश आज तक हुई सभी परीक्षाओं में लागू होता आ रहा है। ऐसे में नॉर्मलाइजेशन के नाम पर दशमलव के दहाई, सैकड़ा और हजारवें हिस्से से अभ्यर्थियों को फेल करना नाइंसाफी है।

सेवारत शिक्षकों की नौकरी भी दांव पर लगी

इनमें से तमाम बेरागजगार अभ्यर्थी परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में आगामी सहायक अध्यापक भर्ती से वंचित हो जाएंगे तो वहीं इस एक फॉर्मूले के कारण बड़ी संख्या में सेवारत शिक्षकों की नौकरी भी दांव पर लगी है। वैसे भी ललित मोहन सिंह के केस में जस्टिस सुधीर अग्रवाल ने 2011 में यह आदेश दिया था कि हर प्रश्न पर एक अंक निर्धारित है। उस अंक को कम नहीं किया जा सकता है। उत्तीर्ण होने वालों को अंक कम करके अनुत्तीर्ण नहीं किया जा सकता है।

रिजेक्शन- मानकीकरण के विरोध में भेजा ज्ञापन

यूपीटीईटी-2026 में ओएमआर रिजेक्शन और मानकीकरण के विरोध में छात्रों ने शिक्षा सेवा चयन आयोग के उपसचिव संजय सिंह के माध्यम से अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार को एडीएम सिटी सत्यम मिश्रा के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। संयुक्त प्रतियोगी छात्र हुंकार मंच के संयोजक पंकज पांडेय ने मांग की कि ओएमआर में वास्तविक गंभीर त्रुटि और मामूली तकनीकी कमी के बीच स्पष्ट एवं न्यायपूर्ण अंतर किया जाए। कहा कि यदि उनकी शिकायतों का निस्तारण किए बिना प्राथमिक या जूनियर की भर्ती आगे बढ़ती है तो कई पात्र अभ्यर्थी अवसर से वंचित हो सकते हैं।

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शॉर्ट बायो: प्राची लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। पिछले 2 वर्षों से वे करियर, शिक्षा और सरकारी नौकरियों से जुड़े विषयों पर लिख रही हैं। मुश्किल खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी विशेषता है। वे 2024 से लाइव हिन्दुस्तान की करियर टीम का हिस्सा हैं।

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प्राची ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 'नन्ही खबर' से की थी, जहां उन्होंने जमीनी स्तर पर खबरों के महत्व को समझा। इसके बाद, उन्होंने 'सी.वाई. फ्यूचर लिमिटेड' और 'कुटुंब' जैसे प्लेटफॉर्म्स पर बतौर कंटेंट राइटर काम करते हुए अपनी लेखनी और रिसर्च स्किल्स को निखारा। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने के बाद, वे करियर डेस्क पर सक्रिय हैं और छात्रों के लिए करियर विकल्पों, बोर्ड परीक्षाओं, जॉब और प्रतियोगी परीक्षाओं की बारीकियों को कवर कर रही हैं।

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