पिता ढोते थे ईंट, नहीं थीं सुख सुविधाएं... बेटे ने किया कमाल, पहले ही प्रयास में UPSC क्रैक
ईंट-भट्ठे में काम करने वाले दिहाड़ी मजदूर के बेटे सुब्रमण्यम भारती ने अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास कर ली है।

कहते हैं कि अगर हौसलों में जान हो और आंखों में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो मुफलिसी की जंजीरें भी आपको उड़ने से नहीं रोक सकतीं। चेन्नई के एक बेहद साधारण परिवार से निकलकर देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन परीक्षा पास करने वाले सुब्रमण्यम भारती ने इस बात को सौ फीसदी सच साबित कर दिया है। ईंट-भट्ठे की धूल और तपिश के बीच पले-बढ़े इस नौजवान ने वो कर दिखाया है, जिसका ख्वाब हर साल लाखों युवा खुली आंखों से देखते हैं। एक दिहाड़ी मजदूर के बेटे सुब्रमण्यम ने अपने पहले ही अटेंप्ट में यूपीएससी (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली है। उन्हें 778 रैंक हासिल हुई है।
सुब्रमण्यम भारती का ताल्लुक एक बेहद गरीब और संघर्षशील परिवार से है। उनके पिता चेन्नई के एक ईंट निर्माण इकाई में रोजमर्रा की मजदूरी करते हैं। आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि जिस घर में हर दिन का राशन पसीने की दिहाड़ी से आता हो, वहां यूपीएससी जैसे बड़े और महंगे इम्तिहान की तैयारी के बारे में सोचना भी कितना मुश्किल रहा होगा। लेकिन मुश्किलें कभी भी भारती के आड़े नहीं आईं। उनके पिता ने दिन-रात मिट्टी और आग के बीच काम करते हुए भी अपने बेटे के सपनों पर कभी आंच नहीं आने दी। परिवार ने हर कदम पर उन्हें सिविल सेवाओं में जाने के लिए प्रेरित किया और उनकी हिम्मत बढ़ाई।
मेरा सफर चमत्कारी रहा: सुब्रमण्यम भारती
भारती खुद मानते हैं कि उनका यह सफर किसी चमत्कार से कम नहीं रहा है। जब नतीजे आए और उन्होंने अपना नाम कामयाब उम्मीदवारों की फेहरिस्त में देखा तो उनकी और उनके परिवार की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए उन्होंने अपने जज्बात खुलकर जाहिर किए। उन्होंने कहा, “मेरा सफर सच में बहुत चमत्कारी रहा है। यह मेरा पहला ही अटेंप्ट था। तमिलनाडु सरकार की 'नान मुधलवन' योजना के सपोर्ट की बदौलत ही मैं अपने पहले प्रयास में यह कामयाबी हासिल कर सका। मैं सरकार की इस बेहतरीन योजना और सर्विस कोचिंग सेंटर का बहुत शुक्रगुजार हूं। मेरी तैयारी में इनका बहुत बड़ा हाथ रहा है।”
क्या नान मुधलवन योजना
आपको बता दें कि 'नान मुधलवन' योजना तमिलनाडु सरकार की एक खास पहल है। इस योजना के तहत राज्य भर के छात्रों को करियर गाइडेंस, स्किल ट्रेनिंग और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सीधा सपोर्ट दिया जाता है। भारती जैसे होनहार युवाओं के लिए यह योजना एक वरदान साबित हुई है, जिन्हें सही मार्गदर्शन और संसाधनों की सख्त जरूरत होती है। इस योजना के जरिए मिलने वाली स्ट्रक्चर्ड मेंटरिंग ने भारती की राह को काफी आसान और क्लीयर बना दिया।
18 साल की उम्र में देखा सिविल सेवा में जाने का सपना
सुब्रमण्यम बताते हैं कि उन्होंने सिविल सर्विसेज का ख्वाब तब देखना शुरू किया था जब वो महज 18 साल के थे। उस वक्त उनके पास कोई गाइडेंस नहीं था और उन्हें यह भी ठीक से नहीं पता था कि आगे का रास्ता कैसे तय करना है। लेकिन उनके माता-पिता उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बने। भारती कहते हैं, "मैंने 18 साल की उम्र में बिना किसी गाइडेंस के इस सफर की शुरुआत की थी। मेरे माता-पिता मेरी पहली प्रेरणा थे। उन्होंने ही मुझे अपने देश की बेहतरीन तरीके से सेवा करने के लिए हमेशा मोटिवेट किया।"
सुब्रमण्यम उन तबकों के लिए काम करना चाहते हैं जिन्होंने वैसी ही परेशानियां और संघर्ष झेले हैं, जिनका सामना उनके अपने परिवार ने किया है। सुब्रमण्यम भारती कहते हैं, "मैंने सिविल सर्विसेज को इसलिए चुना क्योंकि मुझे लगता है कि हमारे जैसे जमीनी स्तर के लोगों के लिए, आम अवाम की भलाई और उनके हक में काम करने का यह सबसे बेहतरीन प्लेटफॉर्म है।"
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
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हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव


