UPSC Success Story: पिता कैरी बैग सप्लायर, बेटी ने तीसरे अटेंम्प्ट में यूपीएससी किया क्रैक
upsc success story ritika pandey: संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा-2025 का जब फाइनल रिजल्ट आया, तो रितिका के परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। क्योंकि उन्होंने इस कठिन परीक्षा में सफलता हासिल की थी।

कहते हैं कि जहां चाह होती है, वहां राह भी निकल ही आती है। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा जैसी कठिन परीक्षा में सफलता अक्सर उन्हीं लोगों को मिलती है, जो अपने लक्ष्य के प्रति पूरी लगन, अनुशासन और मेहनत के साथ जुटे रहते हैं। इस परीक्षा के दौरान उम्मीदवारों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सबसे बड़ी परेशानी होती है पैसों की कमी। लेकिन लगातार प्रयास और परिवार के सहयोग से इन्हें पार किया जा सकता है। ऐसे सफर में माता-पिता का प्रोत्साहन और मार्गदर्शन बच्चों के सपनों को साकार करने में अहम भूमिका निभाता है। कुछ ऐसी ही कहानी है रितिका पांडे की।
यूपीएससी सीएसई 2025 रिजल्ट
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा-2025 का जब फाइनल रिजल्ट आया, तो रितिका के परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। क्योंकि उन्होंने इस कठिन परीक्षा में सफलता हासिल की थी।
कौन है रितिका पांडे
रितिका बिहार के नवादा जिले के हिसुआ नगर परिषद के पंचू इलाके की रहने वाली हैं। उनके पिता संजय पांडेय मूल रूप से हिसुआ पंचू के निवासी हैं और स्थानीय दुकानों में कैरी बैग सप्लाई करने का छोटा कारोबार करते हैं। पैसों की कमी होने के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों की अच्छी शिक्षा में कोई कमी नहीं आने दी। रितिका अपनी सफलता का श्रेय पिता की मेहनत, संघर्ष और उनके अटूट समर्थन को देती हैं, जिसने उन्हें हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। रितिका ने बताया, सफलता के पीछे कई लोगों की मौन और सक्रिय भूमिका होती है, जो आपको लक्ष्य तक पहुंचने में मदद करते हैं।
रितिका की पढ़ाई-लिखाई
रितिका की प्रारंभिक शिक्षा रांची में ही हुई। उन्होंने 2016 में मनन विद्या स्कूल से 10वीं और 2018 में 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने दिल्ली का रुख किया और 2021 में दिल्ली विश्वविद्यालय से फिजिक्स (भौतिक विज्ञान) में स्नातक की डिग्री प्राप्त की।
करियर का पहला विकल्प
रितिका के अनुसार, यूपीएससी हमेशा से ही उनका पहला करियर विकल्प था। स्नातक के बाद वह वापस रांची लौट आईं और घर के शांत और पारिवारिक माहौल में रहकर तैयारी शुरू की। उन्होंने बताया कि पिछले सत्र में वह साक्षात्कार तक पहुंचकर रुक गई थीं, लेकिन माता-पिता के निरंतर प्रोत्साहन ने उन्हें दोबारा प्रयास करने और सफल होने के लिए प्रेरित किया।
यूपीएससी का सफर
वैसे रितिका ने अपने तीसरे प्रयास में यूपीएससी परीक्षा में सफलता हासिल की। पहले प्रयास में वह प्रारंभिक परीक्षा (प्रीलिम्स) तक पहुंचीं। दूसरे प्रयास में उन्होंने इंटरव्यू राउंड तक का सफर तय किया, लेकिन अंतिम चयन सूची में जगह नहीं बना सकीं। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार तैयारी जारी रखी। आखिरकार, तीसरे प्रयास में उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास कर ली।
लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण:
धीरज पाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए इन्हें 4 साल हो गए हैं। धीरज एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने राजनीति समाचार, एजुकेशन बीट के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। हिंदुस्तान लाइव में यूपी बोर्ड से लेकर उन्होंने लोकसभा चुनाव कवर करने साथ-साथ खेल जैसे बीट पर काम किया। अब इनका एकमात्र उद्देश्य करियर और एजुकेशन से जुड़ी रुचिगत, सरल, प्रमाणिक और पाठक-हितैषी रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
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