22 साल की उम्र में किया कमाल, मुस्कान जिंदल ने पहले ही प्रयास में क्रैक किया UPSC एग्जाम

Himanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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upsc success story muskan jindal: हिमाचल की बेटी मुस्कान जिंदल ने महज 22 साल की उम्र में पहले प्रयास में यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा पास कर ली। आइए जानते हैं उनकी सफलता, संघर्ष और दमदार स्ट्रेटेजी की पूरी कहानी।

22 साल की उम्र में किया कमाल, मुस्कान जिंदल ने पहले ही प्रयास में क्रैक किया UPSC एग्जाम

upsc success story muskan jindal: जिंदगी में कोई भी मुकाम हासिल करने की कोई तय उम्र नहीं होती। कुछ लोग उम्र भर अपनी मंजिल तलाशते रह जाते हैं तो कुछ अपनी लगन और मेहनत से इतनी कम उम्र में वो कर दिखाते हैं जिसे सुनकर ही दांतों तले उंगली दबानी पड़ जाए। हमारे देश में यूपीएससी (upsc) यानी संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा का जो खौफ और क्रेज है, वो किसी से छिपा नहीं है। इसे पास करना लोहे के चने चबाने के बराबर माना जाता है। अच्छे-अच्छों की रातों की नींद उड़ जाती है। लेकिन हिमाचल प्रदेश की रहने वाली मुस्कान जिंदल की कहानी एकदम अलग है। उन्होंने महज 22 साल की उम्र में ही अपने पहले प्रयास में इस चक्रव्यूह को भेद डाला। मुस्कान ने कैसे पास की यूपीएससी की परीक्षा आइए जानते हैं...

बचपन का था सपना

मुस्कान कोई रातों-रात सफल होने वाली स्टार नहीं हैं, बल्कि उनकी इस कामयाबी के पीछे एक लंबी और शानदार अकैडमिक जर्नी रही है। हिमाचल की वादियों में पली-बढ़ी मुस्कान ने बचपन में ही यह ठान लिया था कि उन्हें सिविल सर्विस में जाना है और अफसर बनकर देश की सेवा करनी है। पढ़ने-लिखने में वो शुरू से ही अव्वल दर्जे की छात्रा रहीं। अपनी 12वीं की बोर्ड परीक्षा में उन्होंने 96 फीसदी का शानदार स्कोर खड़ा करके यह साबित कर दिया था कि वो लंबी रेस का घोड़ा हैं।

स्कूली पढ़ाई खत्म होने के बाद उन्होंने चंडीगढ़ का रुख किया। वहां पंजाब यूनिवर्सिटी से मान्यता प्राप्त एसडी कॉलेज में बीकॉम ऑनर्स में दाखिला लिया। कॉलेज की खुली हवा लगने के बाद भी उनका फोकस रत्ती भर भी नहीं भटका। नतीजा यह रहा कि ग्रेजुएशन में भी वो अपने कॉलेज की टॉपर बनकर ही निकलीं।

ऐसी दी तैयारी को धार

ग्रेजुएशन के आखिरी साल में ही मुस्कान ने अपने बचपन के सपने को हकीकत में बदलने की तैयारी शुरू कर दी थी। कॉलेज की पढ़ाई के साथ साथ वो रोज करीब चार से पांच घंटे यूपीएससी की तैयारी के लिए निकालती थीं। यह वो वक्त था जब हर युवा अपनी मस्ती में मशगूल रहता है, लेकिन मुस्कान अपने लक्ष्य को लेकर अर्जुन की तरह एकाग्र थीं।

दिलचस्प बात यह है कि जब उनका ग्रेजुएशन पूरा हुआ, तब उनकी उम्र इतनी कम थी कि वो नियम के मुताबिक यूपीएससी का फॉर्म तक नहीं भर सकती थीं। ऐसे में उन्होंने हार नहीं मानी या निराश नहीं हुईं, बल्कि इसे एक शानदार मौके की तरह लिया। उन्होंने एक साल का ब्रेक लिया और अपनी तैयारी की धार को और ज्यादा तेज कर दिया।

पहली ही कोशिश में गाड़ दिए झंडे

अंततः उनकी तपस्या रंग लाई। साल 2019 में मुस्कान ने पहली बार यूपीएससी की परीक्षा दी और अपनी पहली ही कोशिश में सफलता के झंडे गाड़ दिए। पूरे देश में उन्होंने 87वीं रैंक हासिल करके सबको चौंका दिया। उस साल उनका इंटरव्यू दिल्ली में 28 जुलाई को हुआ था और 4 अगस्त को जब नतीजे आए, तो उनका चयन एक आईएएस (IAS) अफसर के तौर पर हो गया। हालांकि, बाद में उन्होंने भारतीय विदेश सेवा (IFS) को चुना और विदेशी मंचों पर देश का प्रतिनिधित्व करने की जिम्मेदारी संभाली।

क्या थी सफलता की अचूक रणनीति?

आजकल के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन को पढ़ाई का सबसे बड़ा दुश्मन माना जाता है, लेकिन मुस्कान का नजरिया थोड़ा अलग है। वो 'सेल्फ कंट्रोल' यानी आत्म नियंत्रण को सबसे बड़ी चाबी मानती हैं। उनका कहना है कि इंटरनेट पर पढ़ाई का बेहतरीन और असीमित मटीरियल मौजूद है। तैयारी के दौरान वो अपना फोन हमेशा अपने पास ही रखती थीं लेकिन उन्होंने कभी खुद को भटकने नहीं दिया।

मुस्कान का साफ मानना है कि हर इंसान को अपनी प्राथमिकताएं तय करनी चाहिए और उसी के हिसाब से अपना स्टडी शेड्यूल बनाना चाहिए। सिर्फ पढ़ते ही रहना जरूरी नहीं है, बल्कि परीक्षा की तैयारी के दौरान दिमागी संतुलन और अपनी बाकी चीजों के बीच तालमेल बिठाना भी उतना ही जरूरी है। यही वो नुस्खा है जो आपको आपके लक्ष्य से भटकने नहीं देता।

परिवार का सपोर्ट

किसी भी इंसान की कामयाबी के पीछे उसके परिवार का बहुत बड़ा हाथ होता है। मुस्कान के पिता पवन जिंदल एक बिजनेसमैन हैं और उनकी मां ज्योति जिंदल एक कुशल गृहिणी हैं, जिन्होंने हमेशा अपनी बेटी की हौसलाअफजाई की है। मुस्कान के परिवार में उनके अलावा दो बहनें और एक भाई है। बड़ी बहन शादीशुदा हैं, छोटी बहन अपने बीए के फाइनल ईयर में पढ़ाई कर रही हैं और उनका सबसे छोटा भाई 12वीं कक्षा में है।

अपनी पढ़ाई और करियर के अलावा मुस्कान सोशल मीडिया पर भी खासी एक्टिव रहती हैं। वो सिर्फ किताबी कीड़ा नहीं हैं बल्कि आज के दौर की एक स्मार्ट ऑफिसर हैं। इंस्टाग्राम पर उनकी काफी अच्छी फैन फॉलोइंग है, जहां 77.6K (करीब 78 हजार) लोग उन्हें फॉलो करते हैं।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

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काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
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