Success Story: मौत को दिया मात, याददाश्त खोने के बाद भी व्हीलचेयर से तय किया UPSC का सफर; रुला देगी कहानी
Success Story: एक भयंकर एक्सीडेंट में याददाश्त और चलने की ताकत खोने के बाद डॉ. अथिरा सुगथन ने हार नहीं मानी। उन्होंने डेंटिस्ट बनकर और अब UPSC 2025 में 483वीं रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया है।

Success Story: सफलता की बहुत कम कहानियां ऐसे दर्दनाक और रुला देने वाले नुकसान के साथ शुरू होती हैं। जब डॉ. अथिरा सुगथन 28 दिनों तक वेंटिलेटर पर रहने के बाद जागीं, तो उन्हें अपना नाम तक याद नहीं था। वो अपने माता-पिता, भाई-बहनों और दोस्तों को भी भूल चुकी थीं। एक भयानक सड़क हादसे में उनकी रीढ़ की हड्डी में ऐसी चोट आई थी कि डॉक्टरों ने साफ कह दिया था कि वो अब कभी अपने पैरों पर चल नहीं पाएंगी। उनकी सारी यादें मिट चुकी थीं और उनके सारे सपने अस्पताल के बिस्तर, व्हीलचेयर और खामोशी के नीचे दब गए थे। लेकिन वक्त का पहिया घूमा। सालों बाद, उसी लड़की ने न सिर्फ अपनी यादों को फिर से बटोरा बल्कि अपनी बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी (BDS) की पढ़ाई पूरी की। वो एक व्हीलचेयर मॉडल बनीं, दिव्यांगों के हक के लिए काम किया और आखिर में UPSC (यूपीएससी) सिविल सेवा परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया रैंक 483 हासिल कर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया।
जब एक पल में मिट गई पूरी जिंदगी
इंडियन मास्टरमाइंड की रिपोर्ट की मानें तो वो एक्सीडेंट ऐसा था जिसने अथिरा की दुनिया पलट कर रख दी। करीब एक महीने तक वो वेंटिलेटर पर बेहोश पड़ी रहीं। जब उन्होंने आंखें खोलीं तो उन्हें सिर्फ अपनी मां का चेहरा याद था। उन्हें न अपना नाम याद था न अपना अतीत। धीरे-धीरे जब उनका होश पूरी तरह लौटा, तो उन्होंने डॉक्टरों से एक ही सवाल पूछा कि वह कभी चल पाएंगी? डॉक्टरों का जवाब दिल तोड़ने वाला था। रीढ़ की हड्डी की चोट की वजह से उनके शरीर का निचला हिस्सा हमेशा के लिए लकवाग्रस्त हो गया था। पहले तो अथिरा ने इस सच को मानने से ही इनकार कर दिया। वो रोज बिस्तर से उठने की कोशिश करतीं, और रोज नाकाम होकर रोने लगतीं। पांच महीने बाद जब वो घर लौटीं, तो पूरी तरह बिस्तर पर थीं। चेहरे पर चोट के गहरे निशान थे, सिर के बाल मुंडवा दिए गए थे और वो बिना सहारे के बैठ भी नहीं सकती थीं। उनकी पूरी दुनिया एक छोटे से कमरे में सिमट कर रह गई थी।
अपनी ही जिंदगी को फिर से पहचानना
उनकी रिकवरी किसी चमत्कार से कम नहीं थी। मां उन्हें परिवार के लोगों की पहचान करातीं और बहन उनके बचपन के किस्से सुनाती। एक दिन किसी दोस्त ने बातों-बातों में कहा कि एक्सीडेंट से पहले अथिरा अपने BDS कोर्स के तीसरे साल में थीं। यह सुनकर अथिरा सन्न रह गईं। उन्हें याद ही नहीं था कि इंसान के कितने दांत होते हैं, और लोग कह रहे थे कि वो डेंटिस्ट बनने वाली थीं। महीनों बाद जब उन्होंने हिम्मत करके आईना देखा, तो उन्हें खुद का चेहरा किसी अजनबी जैसा लगा। पुरानी तस्वीरें देखकर वो फूट-फूट कर रो पड़ीं।
फिजियोथेरेपी के दौरान एक नर्स ने अथिरा से कुछ ऐसा कहा जिसने उनके अंदर एक आग जला दी। नर्स ने ताना मारते हुए कहा कि अब उन्हें अपनी पूरी जिंदगी व्हीलचेयर पर गुजारनी है, इसलिए उन्हें अपने बड़े सपने भूल जाने चाहिए। उसने यह भी सलाह दी कि उनके माता-पिता उन्हें एक छोटी सी दुकान खोलकर दे दें। यह बात अथिरा को बहुत चुभी। उसी दौरान उन्होंने अपनी मां को छिपकर रोते हुए देखा। बस, उसी पल अथिरा ने तय कर लिया कि अब वो अपने परिवार के सामने आंसू नहीं बहाएंगी। उन्होंने चमत्कार की उम्मीद छोड़ दी और खुद को आत्मनिर्भर बनाने में झोंक दिया। कड़ी फिजियोथेरेपी के बाद वो एक इंडिपेंडेंट व्हीलचेयर यूजर बन गईं।
अगला पड़ाव पढ़ाई थी। उन्होंने पहले साल से अपनी किताबें दोबारा पढ़ना शुरू किया। धीरे-धीरे याददाश्त लौटने लगी और उनका खोया हुआ आत्मविश्वास भी वापस आने लगा। व्हीलचेयर पर कॉलेज जाना और मरीजों का सामना करना आसान नहीं था। लेकिन एक दिन, 75 साल की एक बुजुर्ग महिला उनके पास दांत निकलवाने आईं। अथिरा ने बहुत संभलकर उनका इलाज किया। इलाज के बाद उस बुजुर्ग महिला ने अथिरा के हाथ पकड़कर कहा, "पहले जब मैंने दांत निकलवाए थे, तो बहुत दर्द हुआ था। आज मुझे बिल्कुल दर्द नहीं हुआ।" इस एक आशीर्वाद ने अथिरा की जिंदगी बदल दी। उन्हें लगने लगा कि वो एक बेहतरीन डेंटिस्ट बन सकती हैं। परीक्षाओं के दौरान उनका रूटीन बहुत सख्त था। वो दोपहर 3 बजे से 7 बजे तक सोती थीं और फिर शाम 7 बजे से सुबह 7 बजे तक लगातार पढ़ाई करती थीं। अपनी इसी मेहनत के दम पर उन्होंने फर्स्ट क्लास में अपना BDS पूरा किया।
व्हीलचेयर से तय किया यूपीएससी सफर
अथिरा नहीं चाहती थीं कि लोग उन्हें बेचारी समझें। उन्होंने व्हीलचेयर मॉडलिंग शुरू की और केरल फैशन लीग में शोस्टॉपर बनीं। इसके बाद वो 'मिस व्हीलचेयर इंडिया' की फाइनलिस्ट भी रहीं। फैशन इंडस्ट्री ने उन्हें खुद से दोबारा प्यार करना सिखाया। कोविड-19 के दौरान एक NGO के साथ काम करते हुए उन्हें अहसास हुआ कि दिव्यांग लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कत उनके शरीर से नहीं, बल्कि खराब सरकारी सिस्टम और समाज के नजरिए से होती है। यही वो पल था जब उन्होंने फैसला किया कि वो सिविल सेवा में जाकर इस सिस्टम को बदलेंगी।
अथिरा की यूपीएससी स्ट्रेटेजी
उनकी यूपीएससी की तैयारी करीब चार साल तक चली। अथिरा ने कुछ आसान लेकिन पक्के नियम बनाए। उन्होंने ढेरों किताबें पढ़ने के बजाय सीमित किताबों का बार-बार रिवीजन किया। पिछले सालों के पेपर और मॉक टेस्ट जमकर सॉल्व किए। मेन्स के लिए आंसर राइटिंग पर सबसे ज्यादा फोकस किया और अपने जवाबों में करंट अफेयर्स और डायग्राम का इस्तेमाल किया। इंटरव्यू के लिए खुद को पहले ही एक कॉन्फिडेंट IAS अफसर मानकर तैयारी की। उन्होंने सालों तक खुद को दुनिया से अलग रखा। कोई पारिवारिक फंक्शन नहीं, कोई छुट्टी नहीं और न ही कोई फिल्में। हर रोज बस पांच घंटे की नींद और लगातार पढ़ाई। हर नाकामी से उन्होंने कुछ नया सीखा और हार नहीं मानी।
यूपीएससी में हासिल की 483वीं रैंक
जब UPSC 2025 का रिजल्ट आया तो अथिरा सुगथन का नाम 483वीं रैंक पर था। वह कहती हैं कि यह सिर्फ एक एग्जाम पास करना नहीं था, यह उस सफर की जीत थी जिसे कभी नामुमकिन मान लिया गया था। अथिरा मुस्कुराते हुए कहती हैं, "32 दांतों से मैं डेंटिस्ट बनी और 28 राज्यों की जानकारी जुटाकर मैंने 483वीं रैंक हासिल की। ये सिर्फ नंबर नहीं हैं। ये मेरी रातों की नींद, मेरी मेहनत और मेरे संघर्ष की कहानी कहते हैं।"


