UPSC Success Story: UPSC के लिए छोड़ी नौकरी, 2nd अटेंम्प्ट में बने IPS; ऑनलाइन कोचिंग बना सहारा
यूपीएससी सीएसई 2025 के परिणाम की लिस्ट में बिहार के वैशाली जिले के हाजीपुर निवासी अभिषेक चौहान भी शामिल था, जिन्होंने अपने दूसरे प्रयास में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 102 हासिल की।

किसी भी काम को अगर लगन और मेहनत से किया जाए, तो सफलता जरूर मिलती है। UPSC सिविल सेवा परीक्षा (CSE) की बात करें, तो इसमें उम्मीदवारों को काफी मेहनत करना पड़ता है। हालांकि इसमें किसी को सफलता बहुत देर से मिलती है, तो किसी को बहुत जल्दी ही मिल जाती है। इतना ही नहीं लोग इसकी तैयारी के लिए लाखों की नौकरी भी छोड़ देते हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही शख्स से मिलवाने जा रहे हैं, जिन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को पास करने मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी भी छोड़ दी थी। इनका नाम अभिषेक चौहान है।
दूसरे प्रसाय में क्रैक की यूपीएससी
जी हां, यूपीएससी सीएसई 2025 के परिणाम की लिस्ट में बिहार के वैशाली जिले के हाजीपुर निवासी अभिषेक चौहान भी शामिल था, जिन्होंने अपने दूसरे प्रयास में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 102 हासिल की। अभिषेक ने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए एक मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़ दी थी। शुरुआत में उन्होंने बेंगलुरु में कुछ समय तक तैयारी की, लेकिन बाद में माता-पिता की अनुमति लेकर हाजीपुर लौट आए और घर से ही पढ़ाई जारी रखी। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने परीक्षा पास कर ली।
पढ़ाई-लिखाई
अभिषेक चौहान की पढ़ाई पर नजर डालें, तो उन्हों ने 10वीं तक की पढ़ाई रामकृष्ण मिशन स्कूल, पुरुलिया से की। इसके बाद 12वीं की पढ़ाई हाजीपुर से पूरी की। स्कूल के दौरान उन्होंने IIT प्रवेश परीक्षा पास की और बाद में एक IIT से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने एक स्टार्टअप में नौकरी की, लेकिन बाद में सिविल सेवा की तैयारी के लिए नौकरी छोड़ दी।
ऑनलाइन कोचिंग का सहारा
अभिषेक ने बताया कि उन्होंने घर पर रहकर किताबों और ऑनलाइन संसाधनों की मदद से तैयारी की। परीक्षा का माध्यम अंग्रेजी था और उनका वैकल्पिक विषय जूलॉजी (प्राणी विज्ञान) था। उन्होंने ऑनलाइन कोचिंग का भी सहारा लिया।
परिवार में कौन-कौन
अभिषेक ने 2022 में अपनी बहन मेधा चौहान की शादी होने के बाद लोक सेवा आयोग की तैयारी शुरू कर दी थी। अपने दूसरे प्रयास में अभिषेक को 102वीं रैंक में आईपीएस पद प्राप्त हुआ है। बताते चले कि अभिषेक चौहान के पिता प्रो. डॉ. अभय कुमार सिंह नालंदा खुला विश्वविद्यालय के कुलसचिव (रजिस्ट्रार) हैं। उनके चाचा पैक्स अध्यक्ष अजय कुमार सिंह सहित उनके ननिहाल में भी खुशी का माहौल है। समस्तीपुर जिले के मोहिउद्दीननगर से मूल रूप से जुड़े अभिषेक ऐसे परिवार से आते हैं, जिसका सार्वजनिक सेवा से पुराना संबंध रहा है। उनके दादा गया सिंह करीब 25 वर्षों तक राजा जन पंचायत के प्रमुख रहे थे। इता ही नहीं भारतीय क्रिकेट टीम का भविष्य वैभव सूर्यवंशी उनका भांजा है।
कैसे की तैयारी
UPSC की तैयारी कर रहे छात्रों को सलाह देते हुए अभिषेक ने बताया है कि हर व्यक्ति की तैयारी की रणनीति अलग होती है, लेकिन पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का अभ्यास और निरंतरता बनाए रखना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि कठिन विषयों को समझने पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि इन्हें पार करने से लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलती है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई उम्मीदवार लंबे समय तक परीक्षा पास नहीं कर पा रहा है, तो उसे जीवन में आगे बढ़ने और अन्य अवसरों पर भी विचार करना चाहिए। उनका मानना है कि युवाओं को पूरी मेहनत से प्रयास करना चाहिए, लेकिन असफल होने पर दूसरे करियर विकल्पों को भी अपनाना चाहिए।
अभिषेक ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को दिया। उन्होंने कहा कि तैयारी के दौरान माता-पिता ने हर कदम पर उनका साथ दिया और उनका हौसला बढ़ाया।
लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण:
धीरज पाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए इन्हें 4 साल हो गए हैं। धीरज एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने राजनीति समाचार, एजुकेशन बीट के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। हिंदुस्तान लाइव में यूपी बोर्ड से लेकर उन्होंने लोकसभा चुनाव कवर करने साथ-साथ खेल जैसे बीट पर काम किया। अब इनका एकमात्र उद्देश्य करियर और एजुकेशन से जुड़ी रुचिगत, सरल, प्रमाणिक और पाठक-हितैषी रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
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