क्या होता हीट आइलैंड, UPSC ने पूछ लिया सवाल; समझिए शहरों की बढ़ती गर्मी के पीछे छिपी बड़ी वजह

लाइव हिन्दुस्तान
Follow us on Google News
share

Urban Heat Island Effect क्या है, शहर गांवों से ज्यादा गर्म क्यों हो रहे हैं, इसके पीछे क्या कारण हैं और UPSC ने इस पर सवाल क्यों पूछा? 

क्या होता हीट आइलैंड, UPSC ने पूछ लिया सवाल; समझिए शहरों की बढ़ती गर्मी के पीछे छिपी बड़ी वजह

दिल्ली, मुंबई, पेरिस, न्यूयॉर्क या लंदन जैसे बड़े शहरों में अक्सर लोग महसूस करते हैं कि यहां रात में भी गर्मी कम नहीं होती। इसके पीछे एक बड़ा कारण है जिसे अर्बन हीट आइलैंड यानी 'हीट आइलैंड' कहा जाता है। हाल ही में आई एक स्टडी में बताया गया कि यह प्रभाव एक तरफ गर्मी से होने वाली मौतें बढ़ाता है, लेकिन दूसरी तरफ ठंड से होने वाली मौतों को भी काफी कम कर देता है। रिपोर्ट के मुताबिक 2018 में दुनिया भर में ठंड से होने वाली मौतों में जितनी कमी आई, वह गर्मी से बढ़ी मौतों से करीब 4.4 गुना ज्यादा थी। मॉस्को जैसे शहरों में यह अंतर और भी बड़ा देखा गया। इसी वजह से अर्बन हीट आइलैंड अब सिर्फ पर्यावरण का नहीं बल्कि स्वास्थ्य और शहरी जीवन का भी बड़ा मुद्दा बन चुका है।

क्या होता है अर्बन हीट आइलैंड?

अर्बन हीट आइलैंड ऐसा प्रभाव है जिसमें शहर अपने आसपास के ग्रामीण इलाकों की तुलना में ज्यादा गर्म हो जाते हैं। आसान भाषा में समझें तो शहर 'गर्मी का टापू' बन जाते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि शहरों में मिट्टी, घास और पेड़ों की जगह कंक्रीट, डामर और लोहे ने ले ली है। ये चीजें दिनभर सूरज की गर्मी को सोखती रहती हैं और रात में धीरे-धीरे उसे छोड़ती हैं। इसी कारण शहर देर रात तक गर्म बने रहते हैं।

कंक्रीट और डामर कैसे बढ़ाते हैं गर्मी?

सड़कों पर बिछा डामर, ऊंची इमारतें और सीमेंट की दीवारें सूरज की किरणों को तेजी से सोख लेती हैं। गांवों में मिट्टी और पेड़-पौधे गर्मी को संतुलित रखते हैं, लेकिन शहरों में ऐसा नहीं हो पाता। इसी वजह से शहरों का तापमान आसपास के इलाकों से कई डिग्री ज्यादा हो जाता है। यही कारण है कि मेट्रो शहरों में गर्मी का असर ज्यादा महसूस होता है।

पेड़ों की कमी भी बड़ी वजह

जब शहरों में हरियाली कम होती जाती है तो प्राकृतिक ठंडक भी खत्म होने लगती है। पेड़-पौधे अपने आसपास का तापमान कम करने में मदद करते हैं। लेकिन तेजी से बढ़ते शहरीकरण में पार्क, खाली जमीन और पेड़ कटते जा रहे हैं। इससे शहरों में गर्मी फंसने लगती है और तापमान लगातार बढ़ता जाता है।

गाड़ियां, फैक्ट्रियां और एसी भी बढ़ा रहे गर्मी

शहरों में लाखों वाहन चलते हैं। फैक्ट्रियां लगातार काम करती हैं और हर घर-दफ्तर में एयर कंडीशनर इस्तेमाल हो रहे हैं। ये सभी मशीनें गर्म हवा बाहर छोड़ती हैं। यानि इंसान खुद भी शहरों का तापमान बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रहा है। इसे वैज्ञानिक भाषा में एंथ्रोपोजेनिक हीट यानी इंसानों के द्वारा जनित गर्मी कहा जाता है।

प्रदूषण भी बना रहा शहरों को भट्ठी

वाहनों और उद्योगों से निकलने वाला धुआं और काला कार्बन वातावरण में गर्मी को रोककर रखते हैं। इससे हवा ज्यादा गर्म हो जाती है। यही वजह है कि प्रदूषण वाले शहरों में हीट वेव का असर और ज्यादा खतरनाक बन जाता है।

ऊंची इमारतें हवा का रास्ता रोक देती हैं

आजकल शहरों में ऊंची-ऊंची इमारतें तेजी से बन रही हैं। इनकी वजह से हवा का बहाव कम हो जाता है। संकीर्ण सड़कें और दोनों तरफ ऊंची इमारतें 'अर्बन साइक्लोन इफेक्ट' पैदा करती हैं, जिसमें गर्म हवा शहर के भीतर ही फंस जाती है। इससे रात में भी राहत नहीं मिलती।

लोगों की सेहत पर पड़ रहा सीधा असर

अर्बन हीट आइलैंड का सबसे ज्यादा असर आम लोगों की सेहत पर पड़ता है। इससे हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और दिल से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं। बुजुर्ग, बच्चे और मजदूर वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं क्योंकि उन्हें लंबे समय तक गर्म वातावरण में रहना पड़ता है।

बिजली और पानी पर भी बढ़ता दबाव

जब शहर ज्यादा गर्म होते हैं तो लोग ज्यादा एसी और कूलर चलाते हैं। इससे बिजली की मांग अचानक बढ़ जाती है। साथ ही ज्यादा गर्मी के कारण पानी तेजी से सूखता है और पानी की खपत भी बढ़ जाती है। इससे शहरों में जल संकट और गहरा सकता है।

दुनिया के शहर कैसे कर रहे मुकाबला?

दुनिया के कई शहर अब इस समस्या से निपटने के लिए नए उपाय अपना रहे हैं। लॉस एंजेलिस में कूल रूफ इनिशिएटिव शुरू किया गया है, जिसमें ऐसी छतें बनाई जा रही हैं जो सूरज की रोशनी को वापस परावर्तित कर देती हैं। दुबई में स्मार्ट कूलिंग सिस्टम अपनाया गया है, जहां एक केंद्रीय सिस्टम से ठंडा पानी पाइपों के जरिए कई इमारतों तक पहुंचाया जाता है। इससे ऊर्जा की बचत होती है। वहीं पेरिस में कूल स्ट्रीट इनिशिएटिव के तहत सड़कों को पैदल यात्रियों के लिए बदला जा रहा है और डामर हटाकर पेड़-पौधे लगाए जा रहे हैं।

UPSC ने पूछा यह सवाल?

UPSC ने 2013 में पूछा था सवाल - दुनिया के शहरी आवासों में हीट आइलैंड बनने के कारण बताइए। इस सवाल के जरिए आयोग यह समझना चाहता था कि अभ्यर्थी शहरीकरण, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के संबंध को कितना समझते हैं। आज भी यह विषय बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि हीट वेव और बढ़ती शहरी गर्मी पूरी दुनिया के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव

और पढ़ें
करियर सेक्शन में लेटेस्ट एजुकेशन न्यूज़, सरकारी जॉब , एग्जाम , एडमिशन , CBSE 12th Result 2026 Live के साथ सभी Board Results 2026 देखें। सबसे पहले अपडेट पाने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।