UPSC Prelims 2026 : यूपीएससी प्री के सवालों ने घुमाया दिमाग, इतिहास ने बढ़ाई टेंशन तो पॉलिटी ने छुड़ाए पसीने

Himanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2026 का प्रश्नपत्र पिछले वर्षों से ज्यादा कठिन और विश्लेषणात्मक माना जा रहा है। अर्थव्यवस्था, इतिहास, विज्ञान और राजव्यवस्था में नए पैटर्न ने अभ्यर्थियों को चौंकाया।

UPSC Prelims 2026 : यूपीएससी प्री के सवालों ने घुमाया दिमाग, इतिहास ने बढ़ाई टेंशन तो पॉलिटी ने छुड़ाए पसीने

देशभर में लाखों अभ्यर्थी जिस परीक्षा का महीनों से इंतजार कर रहे थे, वह आखिरकार 24 मई को खत्म हुई। लेकिन परीक्षा खत्म होते ही सबसे ज्यादा चर्चा किसी एक सवाल की नहीं, बल्कि पूरे प्रश्नपत्र के बदले हुए मिजाज की होने लगी। यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2026 को देखकर कई अभ्यर्थियों का पहला रिएक्शन यही था कि इस बार आयोग ने सीधे-सीधे बता दिया है कि अब पुराने तरीके की तैयारी काफी नहीं है। करीब 8 लाख 19 हजार से ज्यादा अभ्यर्थियों ने 933 पदों के लिए परीक्षा दी, लेकिन परीक्षा केंद्र से बाहर निकले कई छात्रों के चेहरे बता रहे थे कि मुकाबला इस बार बेहद कठिन रहने वाला है। छात्रों और शिक्षकों दोनों का मानना है कि सामान्य अध्ययन का पहला प्रश्नपत्र पिछले साल के मुकाबले ज्यादा लंबा, ज्यादा विश्लेषणात्मक और कई जगहों पर अप्रत्याशित था।

अर्थव्यवस्था वाले हिस्से ने सबसे ज्यादा चौंकाया

इस बार अर्थव्यवस्था वाला हिस्सा सिर्फ बजट, महंगाई या बैंकिंग तक सीमित नहीं रहा। यूपीएससी ने ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स, डिजिटल रुपया, भीड़ आधारित निवेश, परिसंपत्तियों का टोकनीकरण और टिकाऊ वित्त जैसे विषयों से सवाल पूछकर अभ्यर्थियों को चौंका दिया। कई विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार अखबार पढ़ने वाले छात्रों को साफ फायदा मिला। सवाल सीधे समसामयिक घटनाओं से जुड़े थे, लेकिन उन्हें हल करने के लिए मूल अवधारणाओं की मजबूत समझ जरूरी थी। सिर्फ तथ्य याद कर लेने से काम नहीं चल रहा था।

इतिहास और कला-संस्कृति बना बड़ा सिरदर्द

इस बार इतिहास वाले हिस्से ने पुराने रुझान को पूरी तरह बदल दिया। प्राचीन इतिहास और कला-संस्कृति का दबदबा साफ दिखाई दिया। बौद्ध धर्म, जैन धर्म, मंदिर वास्तुकला, तमिलकम, प्राचीन नदियों के नाम और सांस्कृतिक परंपराओं पर गहरे सवाल पूछे गए। कई छात्रों को लगा कि सवाल सीधे दिख रहे हैं, लेकिन विकल्प इतने उलझे हुए थे कि सही जवाब तक पहुंचना आसान नहीं था। आधुनिक इतिहास से सवाल कम थे, लेकिन वहां भी सिर्फ घटनाएं याद होना काफी नहीं था।

राजव्यवस्था में संविधान की गहराई तक उतर गया आयोग

राजव्यवस्था वाले हिस्से में इस बार सबसे बड़ा बदलाव यह रहा कि सीधे अनुच्छेद पूछने के बजाय सवालों को परिस्थितियों और नैतिक फैसलों के अंदाज में पूछा गया। शून्य प्राथमिकी, नए आपराधिक कानून और संवैधानिक प्रक्रियाओं पर आधारित सवालों ने अभ्यर्थियों की समझ की असली परीक्षा ली। कई शिक्षकों ने कहा कि इस बार आयोग ने अंदाजे से उत्तर लगाने की गुंजाइश काफी कम कर दी। विकल्प ऐसे बनाए गए थे जहां आधी-अधूरी जानकारी रखने वाला छात्र आसानी से फंस सकता था।

भूगोल और पर्यावरण में दिखा बदला हुआ रुझान

पिछले कुछ वर्षों से जहां विश्व भूगोल और मानचित्र आधारित सवालों पर जोर दिख रहा था, वहीं इस बार पैटर्न थोड़ा बदला हुआ नजर आया। होर्मुज जलडमरूमध्य, अंडमान निकोबार की जलवायु, प्रायद्वीपीय भूभाग और रामसर स्थलों जैसे विषयों से सवाल पूछे गए। विशेषज्ञों के मुताबिक इस बार भूगोल में रटने से ज्यादा स्थानिक समझ की जरूरत थी। यानी अभ्यर्थियों को सिर्फ जगहों के नाम नहीं, बल्कि उनके आपसी संबंध और प्रभाव भी समझने थे।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी में समसामयिक घटनाओं का असर

विज्ञान और प्रौद्योगिकी वाले हिस्से में भी वही छात्र सहज दिखे जिन्होंने पूरे साल तकनीक और विज्ञान से जुड़े समाचारों पर नजर रखी। सवाल सीधे किताबों से नहीं बल्कि हाल की घटनाओं और नई तकनीकों के संदर्भ में पूछे गए।

सीसैट ने राहत भी दी और दबाव भी

सीसैट को लेकर छात्रों की राय मिली-जुली रही। गद्यांश आधारित सवालों को ज्यादातर छात्रों ने संतुलित बताया, लेकिन गणितीय योग्यता और तर्कशक्ति वाले हिस्से में कुछ नए तरह के सवाल देखने को मिले। कई अभ्यर्थी समय प्रबंधन में फंस गए। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि जिन छात्रों ने नियमित अभ्यास किया था, उनके लिए सीसैट उत्तीर्ण करना बहुत मुश्किल नहीं होना चाहिए।

इस बार यूपीएससी ने क्या संदेश दिया?

पूरे प्रश्नपत्र को देखकर सबसे बड़ी बात यही निकलकर सामने आई कि यूपीएससी अब “कम पढ़ो लेकिन गहराई से पढ़ो” वाले मॉडल पर आगे बढ़ चुका है। सिर्फ कोचिंग नोट्स या छोटे-छोटे तथ्यों पर निर्भर रहने वाले छात्रों के लिए यह प्रश्नपत्र मुश्किल साबित हुआ। प्रश्नपत्र ने साफ दिखाया कि अब तैयारी का मतलब सिर्फ जानकारी जमा करना नहीं, बल्कि अलग-अलग विषयों को जोड़कर समझना, समसामयिक घटनाओं को अवधारणाओं से जोड़ना और कठिन सवालों में शांत रहकर सोच पाना है।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

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हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

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काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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