यूपीएससी प्रीलिम्स में दिखा भूगोल और पर्यावरण का दबदबा; जर्मनी चांसलर की यात्रा व नोबेल विजेताओं से आए सवाल

By Prachi
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UPSC Prelims 2026 Analysis: यूपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026' रविवार को दो अलग-अलग शिफ्टों में देश भर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर सफलतापूर्वक संपन्न हो गई। इस वर्ष का प्रश्न पत्र बीते कई वर्षों की तुलना में काफी कठिन, गहरा और पूरी तरह कांसेप्ट पर आधारित था।

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UPSC Prelims 2026 Exam Analysis: देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा 'यूपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026' रविवार को दो अलग-अलग शिफ्टों में देश भर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर सफलतापूर्वक संपन्न हो गई। परीक्षा देकर परीक्षा केंद्रों से बाहर निकले अभ्यर्थियों के चेहरों पर इस बार मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। एक्सपर्ट और छात्रों के अनुसार, इस वर्ष का प्रश्न पत्र बीते कई वर्षों की तुलना में काफी कठिन, गहरा और पूरी तरह अवधारणा (कांसेप्ट) पर आधारित था।

भूगोल और पर्यावरण सेक्शन का रहा जबरदस्त दबदबा

इस वर्ष के प्रश्न पत्र (सामान्य अध्ययन) की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें भूगोल और पर्यावरण सेक्शन से रिकॉर्ड 39 प्रश्न पूछे गए, जिसने पूरे पेपर का रुख बदल दिया।अंतरराष्ट्रीय संबंधों और वैश्विक भूगोल के तहत 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से जुड़े जटिल प्रश्न पूछे गए थे।

इतिहास और कला संस्कृति सेक्शन से कुल 19 प्रश्न आए, जिनमें गहराई देखी गई। प्राचीन नदियों के नाम, हड़प्पा सभ्यता, अमरावती और सांची स्तूप के साथ-साथ आधुनिक इतिहास के विषय शामिल थे। इसके अलावा, संगीत और कला के क्षेत्र में विशेष रूप से 'रागों के इतिहास' से जुड़े कठिन सवाल भी शामिल रहे।

जनवरी 2026 तक का करंट अफेयर्स रहा पेपर का हिस्सा

यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा 2026 का प्रश्न पत्र पूरी तरह से अपडेटेड नजर आया। आयोग ने न केवल वर्ष 2024 और 2025 की महत्वपूर्ण वैश्विक घटनाओं को शामिल किया, बल्कि परीक्षा से महज कुछ महीने पहले यानी जनवरी 2026 में जर्मनी के चांसलर की भारत यात्रा से जुड़ा सीधा सवाल भी पूछा। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2025 के नोबेल पुरस्कार विजेता और फ्रांस में आयोजित ‘संयुक्त राष्ट्र महासागर सम्मेलन’ जैसे नवीनतम घटनाक्रम पेपर का मुख्य हिस्सा रहे।

अभ्यर्थियों की जुबानी: कैसा था परीक्षा का स्तर?

करन चौहान: "सामान्य ज्ञान के प्रश्न पत्र में बहुविकल्पीय प्रश्नों के अलावा परिस्थिति-आधारित और निर्णय लेने से जुड़े सवाल पूछे गए थे। पेपर का स्तर बहुत कठिन था।"

प्रशस्ति: "मैंने पहली बार परीक्षा दी है। बीते वर्ष के मुकाबले पैटर्न बिल्कुल बदला हुआ था। पूछे गए सवाल काफी उलझाऊ थे और सही विकल्प खोजना बहुत मुश्किल साबित हुआ।"

प्रशांत: "सवालों का पैटर्न काफी व्यावहारिक था। इस बार ड्रॉप-शिपिंग बिजनेस, एसेट टोकेनाइजेशन और डिजिटल पेमेंट्स (UPI) जैसे नए वित्तीय और व्यावहारिक विषयों पर आधारित सवाल पूछे गए।"

अनुपम तिवारी: "प्रश्न काफी लंबे और कथन आधारित थे। इन्हें पढ़ने और समझने में ही बहुत समय लग गया। कठिन सवालों ने काफी परेशान किया, कुल मिलाकर पेपर मिला-जुला था।"

विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले वर्ष की तुलना में भले ही यह पेपर अधिक संतुलित था, लेकिन इसने छात्रों की तगड़ी दिमागी कसरत कराई। पुराने वर्षों के कोर थीम्स को तो दोहराया गया था, लेकिन प्रश्नों का प्रारूप पूरी तरह बदल दिया गया था, जिससे केवल रटकर जाने वाले छात्रों को निराशा हाथ लगी।

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लेखक के बारे में

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शॉर्ट बायो: प्राची लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। पिछले 2 वर्षों से वे करियर, शिक्षा और सरकारी नौकरियों से जुड़े विषयों पर लिख रही हैं। मुश्किल खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी विशेषता है। वे 2024 से लाइव हिन्दुस्तान की करियर टीम का हिस्सा हैं।

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प्राची ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 'नन्ही खबर' से की थी, जहां उन्होंने जमीनी स्तर पर खबरों के महत्व को समझा। इसके बाद, उन्होंने 'सी.वाई. फ्यूचर लिमिटेड' और 'कुटुंब' जैसे प्लेटफॉर्म्स पर बतौर कंटेंट राइटर काम करते हुए अपनी लेखनी और रिसर्च स्किल्स को निखारा। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने के बाद, वे करियर डेस्क पर सक्रिय हैं और छात्रों के लिए करियर विकल्पों, बोर्ड परीक्षाओं, जॉब और प्रतियोगी परीक्षाओं की बारीकियों को कवर कर रही हैं।

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प्राची ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से इंग्लिश जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा किया है। उनकी शैक्षणिक नींव दिल्ली यूनिवर्सिटी से है, जहां से उन्होंने इतिहास में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। इतिहास की अच्छी जानकारी होने के कारण, वे आज की खबरों को बेहतर तरीके से समझ और समझा पाती हैं। यही वजह है कि उनके लेखों में जानकारी पूरी तरह सटीक और अधिक भरोसेमंद होती है।

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