UPSC : नवोदय विद्यालय से पढ़ाई और फिर नक्सलियों से लड़ाई, CRPF असिस्टेंट कमांडेंट ने जंगलों में पढ़कर निकाला UPSC CSE
यूपीएससी की तैयारी के लिए उम्मीदवार सब कुछ छोड़ा सालों तक पढ़ाई करते रहते हैं और कोचिंग से लेकर सेल्फ स्टडी तक कई तरीके अपनाते हैं, लेकिन महाराष्ट्र के नासिक के रहने वाले राजू वाघ की कहानी कुछ अलग है।

जब यूपीएससी सिविल सर्विसेज एग्जाम की तैयारी की बात होती है, तो अकसर माना जाता है कि इसके लिए नौकरी, आराम और पर्सनल लाइफ सब कुछ दांव पर लगाना पड़ता है। बहुत से युवा इसकी तैयारी के लिए लाखों के पैकेज की नौकरी छोड़ देते हैं। लेकिन सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट राजू वाघ की कहानी इस धारणा को गलत साबित करती है। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र में तैनात राजू वाघ बेहद मुश्किल और चुनौतिपूर्ण सुरक्षा अभियानों की जिम्मेदारी संभाल तो रहे थे, लेकिन उन्होंने अपना यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा क्रैक करने का सपना नहीं छोड़ा था। ड्यूटी से जो भी समय मिलता, उसमें वे चुपचाप फोकस रहकर यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करते। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से नजर नहीं हटाई। इस जुनून, कड़ी मेहनत और अनुशासन का फल तब मिला जब उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2024 में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 871 हासिल की।
नवोदय विद्यालय से पढ़कर असिस्टेंट कमांडेंट बने
महाराष्ट्र के नासिक जिले के इंदोरी गांव में जन्मे राजू वाघ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला परिषद स्कूल से की। इसके बाद उन्होंने जवाहर नवोदय विद्यालय में शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2014 में एनआईटी नागपुर से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। पांच साल तक कोल इंडिया में काम करने के बाद उन्होंने 2018 में सीएपीएफ परीक्षा पास कर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) जॉइन किया।
नक्सली इलाके में हुई पोस्टिंग, 32 IED का पता लगाया
राजू की तैनाती छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में हुई, जो नक्सली गतिविधियों के लिए जाना जाता है। यहां उन्होंने 32 आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) का पता लगाया और कई कठिन अभियानों का हिस्सा बने। इस दौरान उन्होंने अपने साथी जवानों को खोने का दर्द भी देखा। लेकिन उनकी भूमिका नक्सलवाद से लड़ाई से कहीं अधिक थी। उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर काम किया, गलत तरीके से पकड़े गए 25 अंडरट्रायल कैदियों की रिहाई में मदद की, और उन इलाकों में भरोसा बनाने में मदद की जहां अक्सर डर और लड़ाई होती थी। जब उन्होंने देखा कि बच्चों को पढ़ाई नहीं मिल रही है, तो उन्होंने एक CRPF कैंप को क्लासरूम में बदल दिया, और उन्हें खुद पढ़ाया।
जिंदा रहा यूपीएससी का सपना
इन ज़िम्मेदारियों के बावजूद उनका UPSC का सपना जिंदा रहा और उन्होंने ड्यूटी से पहले सुबह 4 बजे उठकर पढ़ाई करने और लंबे ऑपरेशनल घंटों के बाद भी तैयारी जारी रखने का एक डिसिप्लिन्ड रूटीन बनाया। उनका तरीका लंबी पढ़ाई मैराथन के बारे में नहीं था, बल्कि लगातार पढ़ाई करने का था और वे अक्सर हर दिन कुछ खास घंटे देने पर ध्यान देते थे। वह रोजाना सुबह 4 से 6 बजे और शाम को 2–3 घंटे पढ़ाई करते थे। वीकेंड पर वे पूरी तरह पढ़ाई में डूबे रहते थे।
जब यूपीएससी का रिजल्ट आया तो कर रहे थे नक्सली विरोधी ऑपरेशन की तैयारी
राजू वाघ की मेहनत तब रंग लाई जब उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2024 में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 871 हासिल की। जब परिणाम घोषित हुआ, तब वह एक और एंटी नक्सल अभियान की तैयारी कर रहे थे। सफलता की खबर मिलने के बाद उन्होंने अपनी उपलब्धि को स्वीकार किया और फिर ड्यूटी में जुट गए।
IA&AS सर्विस मिली
अगस्त 2025 में वे इंडियन ऑडिट एंड अकाउंट्स सर्विस में शामिल हो गए और अभी शिमला, हिमाचल प्रदेश में पोस्टेड है।


