यूपीएससी मुख्य परीक्षा आंसर प्रैक्टिस जीएस 3: बैंकिंग सिस्टम में ज्यादा लिक्विडिटी का असर

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा का मेन्स एग्जामिनेशन का स्टेज बेहद महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इसके प्राप्तांक अभ्यर्थी के चयन की राह में सबसे अहम भूमिका अदा करते हैं। फाइनल मेरिट मेन्स एग्जाम और इंटरव्यू के मार्क्स से बनती है।

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यूपीएससी परीक्षा

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा का मेन्स एग्जामिनेशन का स्टेज बेहद महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इसके प्राप्तांक अभ्यर्थी के चयन की राह में सबसे अहम भूमिका अदा करते हैं। फाइनल मेरिट मेन्स एग्जाम और इंटरव्यू के मार्क्स से बनती है। मेन्स एग्जाम 1750 अंक का होता है जबकि इंटरव्यू 275 का। मेन्स परीक्षा में सिर्फ नॉलेज की ही नहीं बल्कि आंसर राइटिंग स्किल, एनालिटिकल एबिलिटी और टाइम मैनेजमेंट की असली परख होती है। कंटेंट नहीं बल्कि प्रेजेंटेशन और अप्रोच पर भी काम करना जरूरी होता है। यूपीएससी मेंस में आंसर राइटिंग की प्रैक्टिस के लिए अभ्यर्थी जमकर प्रैक्टिस करते हैं।

UPSC Mains में अच्छे उत्तर के लिए भूमिका, मुख्य भाग और निष्कर्ष का संतुलन जरूरी है। भूमिका 3–5 पंक्तियों में परिभाषा, तथ्य या संदर्भ से शुरू करें। मुख्य भाग में प्रश्न की मांग के अनुसार बिंदु, छोटे पैराग्राफ, तथ्य, उदाहरण और विश्लेषण दें। महत्वपूर्ण की-वर्ड को अंडरलाइन करें और जरूरत के अनुसार फ्लोचार्ट या डायग्राम का प्रयोग करें। निष्कर्ष सकारात्मक और भविष्य की दिशा बताने वाला हो। उत्तर में सरकारी रिपोर्ट व प्रामाणिक आंकड़ों का उपयोग करें। हर उत्तर के बाद मूल्यांकन कर गलतियों और सुधार के बिंदुओं को नोट करें।

मेन्स की प्रैक्टिस के लिए आज GS-3 के सवाल हल करें और अपनी तरक्की का जायजा भी लें

सवाल

बैंकिंग सिस्टम में ज्यादा लिक्विडिटी मौद्रिक नीति के ट्रांसमिशन को कमजोर कर सकती है, भले ही पॉलिसी रेट में कोई बदलाव न हो। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की हाल की लिक्विडिटी मैनेजमेंट चुनौतियों के संदर्भ में चर्चा करें।

संदर्भ: यह टॉपिक सीधे GS पेपर 3: इंडियन इकोनॉमी, मॉनेटरी पॉलिसी और बैंकिंग सिस्टम से जुड़ा है। यह लिक्विडिटी मैनेजमेंट को महंगाई, इंटरेस्ट रेट, क्रेडिट ग्रोथ और मॉनेटरी ट्रांसमिशन से भी जोड़ता है। RBI का CRR, VRRR, OMO और दूसरे लिक्विडिटी-मैनेजमेंट टूल्स का इस्तेमाल इस मुद्दे का विश्लेषण करने के जुड़ा है।

नोट: यह कोई मॉडल UPSC जवाब नहीं है। यह आपको सिर्फ एक सोचने का नजरिए देता है। इसे आप जवाबों में शामिल कर सकते हैं।

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इंट्रो

अधिक लिक्विडिटी तब होती है जब बैंकों के पास नॉर्मल ऑपरेशन और सेटलमेंट के लिए जरूरत से

अधिक फंड मौजूद होते हैं। भले ही RBI रेपो रेट बनाए रखे, लेकिन काफी लिक्विडिटी के कारण शॉर्ट-टर्म मनी-मार्केट रेट पॉलिसी रेट से नीचे आ सकते हैं, जिससे तय मॉनेटरी पॉलिसी का ट्रांसमिशन कम हो सकता है।

- RBI अभी एक चुनौती का सामना कर रहा है क्योंकि बैंकिंग-सिस्टम लिक्विडिटी 3 सितंबर, 2026 को चार साल के सबसे ऊंचे लेवल ₹10.3 लाख करोड़ पर पहुंच गई थी।

- RBI अभी एक चुनौती का सामना कर रहा है क्योंकि बैंकिंग सिस्टम की लिक्विडिटी 3 सितंबर, 2026 को 10.3 लाख करोड़ रुपये के चार साल के सबसे ऊंचे लेवल पर पहुंच गई थी।

बॉडी:

आप अपने जवाब में नीचे दिए गए कुछ पॉइंट्स शामिल कर सकते हैं:

बैंकिंग सिस्टम पर ज्यादा लिक्विडिटी का असर

- RBI की खास US डॉलर-रुपया स्वैप फैसिलिटी से हुए बड़े पैमाने पर फॉरेन-करेंसी इनफ्लो, साथ ही RBI के फॉरेन-एक्सचेंज ऑपरेशन्स से मिली लिक्विडिटी ने मौजूदा सरप्लस में काफी योगदान दिया है। 31 अगस्त तक, इस फैसिलिटी में 136.377 बिलियन डॉलर डिपॉजिट जमा हो गए थे, जिनमें से अधिक FCNR(B) थे। हालांकि इस तरह के इनफ्लो रुपये की बाहरी स्थिति को बढ़ाते हैं और इसकी वैल्यू बनाए रखते हैं, कन्वर्जन और इसी तरह की एक्टिविटीज घरेलू बैंकिंग सेक्टर में रुपये की काफी लिक्विडिटी डाल सकती हैं।

- यह समस्या इसलिए होती है क्योंकि बहुत ज्यादा लिक्विडिटी ओवरनाइट मनी-मार्केट रेट्स पर नीचे की ओर दबाव डालती है। अगर ये रेट रेपो रेट से बहुत नीचे चले जाते हैं, तो मॉनेटरी पॉलिसी का ऑपरेटिंग मकसद कम असरदार हो जाता है: RBI का पॉलिसी रेट बिना बदले भी बैंक कम मार्केट रेट पर काफी फंड ले सकते हैं। नतीजतन, रेपो रेट का सिग्नलिंग फंक्शन कमजोर हो सकता है और RBI के पॉलिसी रुख का दूसरे इंटरेस्ट रेट पर ट्रांसमिशन बिगड़ सकता है।

- नतीजतन RBI को फालतू लिक्विडिटी को एब्जॉर्ब करने और बेवजह सख्ती से बचने के बीच बैलेंस बनाना होगा। यह फालतू फंड को एब्जॉर्ब करने के लिए वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) ऑपरेशन और ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) जैसे इंस्ट्रूमेंट का इस्तेमाल कर सकता है। इन इंस्ट्रूमेंट का चुनाव और कैलिब्रेशन बहुत जरूरी है क्योंकि लिक्विडिटी की बहुत ज्यादा एग्रेसिव निकासी से इंटरेस्ट रेट काफी बढ़ सकते हैं, जिससे गवर्नमेंट सिक्योरिटीज मार्केट में रुकावट आ सकती है।

— मुश्किल इस बात से और बढ़ जाती है कि सही लिक्विडिटी कंट्रोल प्रोसेस के बिना कोर लिक्विडिटी और बढ़ सकती है। साथ ही, छुट्टियों के मौसम में सीजनल करेंसी डिमांड और RBI की फॉरवर्ड पोजीशन का मैच्योर होना कुछ सरप्लस एब्जॉर्ब कर सकता है। इसलिए RBI को मॉनेटरी पॉलिसी ट्रांसमिशन को बेहतर बनाए रखने, महंगाई के दबाव को मैनेज करने, फाइनेंशियल मार्केट के ठीक से काम करने और बहुत ज्यादा इंटरेस्ट रेट में उतार-चढ़ाव से बचने के बीच बैलेंस बनाना होगा।

निष्कर्ष:

मौजूदा घटना से पता चलता है कि मॉनेटरी पॉलिसी का असर न सिर्फ पॉलिसी रेपो रेट की रकम से तय होता है, बल्कि उन लिक्विडिटी की शर्तों से भी तय होता है जिनके तहत यह काम करती है। RBI का मकसद सही तरीके से उधार देने और इकोनॉमिक एक्टिविटी के लिए काफी लिक्विडिटी पक्का करना हैष साथ ही इतने बड़े सरप्लस से बचना है कि मार्केट रेट मनचाहे मॉनेटरी पॉलिसी रुख से भटक जाएं।

किन बातों पर करें विचार

बैंकिंग सिस्टम में ज्यादा लिक्विडिटी क्या है?

CRR, VRRR और OMO लिक्विडिटी को एब्जॉर्ब करने में कैसे मदद करते हैं?

पिछले साल के विषय से जुड़े सवाल

इस नजरिए की जांच करें कि भारत जैसे देश में फाइनेंशियल इनक्लूजन, सोशल और इकोनॉमिक इनक्लूजन का एक ज़रूरी हिस्सा है। साथ ही, R.B.I. के फाइनेंशियल इनक्लूजन इंडेक्स (2026) के फायदे पर भी रोशनी डालें।

भारत में लगातार ज्यादा फूड इन्फ्लेशन के क्या कारण हैं? इस तरह की महंगाई को कंट्रोल करने में RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कितनी असरदार है, इस पर कमेंट करें। (2024)

Pankaj Vijay

लेखक के बारे में

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पंकज विजय| वरिष्ठ पत्रकार

शॉर्ट बायो पंकज विजय एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 15 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में livehindustan.com में असिस्टेंट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। वे करियर, स्कूल व हायर एजुकेशन, जॉब्स से जुड़े विषयों पर खबर लेखन और विश्लेषण में विशेषज्ञता रखते हैं। 9 वर्षों से यहां इसी भूमिका में हैं। सरकारी भर्तियों, बोर्ड व एंट्रेंस एग्जाम, प्रतियोगी परीक्षाओं, उनके परिणाम, बदलते दौर में करियर की नई राहों, कोर्स, एडमिशन एवं नए जमाने के रोजगार के लिए जरूरी स्किल्स से जुड़ी अपडेट तेजी से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं।


15 से अधिक सालों का अनुभव

पंकज विजय ने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की। अमर उजाला समाचार पत्र में रिसर्च, संपादकीय और करियर एजुकेशन जॉब्स डेस्क पर काम किया। यहां उन्हें फीचर लेखन व रिपोर्टिंग का भी मौका मिला। इसके बाद उन्होंने आज तक डिजिटल में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। आज तक वेबसाइट पर राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और एजुकेशन व रोजगार जगत से जुड़ी खबरें लिखीं। इसके बाद एनडीटीवी ऑनलाइन में एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर इस विषय में अपनी समझ को और व्यापक बनाया। एनडीटीवी की पारी के बाद वे लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े और बीते 9 वर्षों से करियर एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर रहे हैं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी), दिल्ली से हिन्दी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा, गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में एमए व दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास में बीए ऑनर्स किया है। एनसीसी सी सर्टिफिकेट होल्डर हैं जिसके चलते उन्हें रक्षा क्षेत्र जैसे पुलिस व सेनाओं की भर्तियों की बेहतर समझ है।


विजन

तमाम तरह के करियर, स्कूल एजुकेशन, हायर एजुकेशन, भर्तियों, प्रतियोगी परीक्षाओं, एंट्रेंस एग्जाम, नौकरी के लिए जरूरी स्किल्स एवं बेरोजगार युवाओं के मुद्दों को लेकर पंकज के पास गहरी समझ है। उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के कई टॉपरों के इंटरव्यू किए हैं। उनकी लिखी सक्सेस स्टोरीज युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को प्रेरित करती रही हैं। पंकज का मानना है कि विश्वसनीयता, पारदर्शिता और तथ्यपरकता ही पत्रकारिता की असली ताकत है। उनका लक्ष्य स्कूली छात्रों व बेहतर करियर एवं सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को आसान भाषा में सटीक, तेज और भरोसेमंद जानकारी देना है।


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