UPSC क्लियर करने के बाद क्या? जानिए मसूरी के LBSNAA में कैसी होती है एक IAS की जिंदगी
UPSC परीक्षा पास करने के बाद LBSNAA में ट्रेनिंग कैसे होती है? जानिए IAS, IPS और IFS अफसरों का डेली रूटीन, फाउंडेशन कोर्स, भारत दर्शन और ट्रेनिंग स्टाइपेंड की पूरी जानकारी।

हर साल लाखों युवा अपनी आंखों में UPSC क्लियर करके देश का अफसर बनने का एक सपना बड़ा सपना सजाते हैं । सालों की कड़ी मेहनत, रातों की नींद की कुर्बानी और किताबों के बीच गुज़ारे गए अनगिनत घंटों के बाद, जब फाइनल रिजल्ट में नाम चमकता है, तो जिंदगी अचानक एक नया मोड़ ले लेती है। एस्पिरेंट कहलाने वाला युवा अचानक रातों-रात "ऑफिसर ट्रेनी" (Officer Trainee - OT) बन जाता है। लेकिन असली सफर तो इसके बाद शुरू होता है। यह सफर शुरू होता है पहाड़ों की रानी मसूरी की ठंडी वादियों में, जहां लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) स्थित है। हैप्पी वैली की उन सर्द हवाओं के बीच, यह सिर्फ एक ट्रेनिंग सेंटर नहीं, बल्कि एक ऐसी प्रयोगशाला है जहां देश का भविष्य गढ़ा जाता है। आइए, तफसील से जानते हैं कि इस प्रतिष्ठित अकादमी में एक ट्रेनी अफसर की जिंदगी कैसी होती है और उनकी ट्रेनिंग का पूरा प्रोसेस क्या है।
फाउंडेशन कोर्स: जहां से होती है असली शुरुआत
LBSNAA में कदम रखते ही सबसे पहला और सबसे खास पड़ाव होता है 15 हफ्तों का "फाउंडेशन कोर्स"। यह वो वक्त होता है जब IAS, IPS, IFS और IRS जैसी सभी केंद्रीय सेवाओं के लिए चुने गए अफसर एक साथ ट्रेनिंग लेते हैं। इसका सबसे बड़ा मकसद है उनके बीच आपसी तालमेल और ताउम्र रहने वाली दोस्ती कायम करना। क्लासरूम में इन्हें देश के कानून, अर्थशास्त्र, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन और भारत के समृद्ध इतिहास की तालीम दी जाती है। यहां अलग-अलग राज्यों, भाषाओं और संस्कृतियों से आए युवा एक छत के नीचे रहते हैं, जिससे उन्हें भारत की विशाल विविधता को करीब से समझने का बेहतरीन मौका मिलता है।
स्पेशलाइज्ड ट्रेनिंग: जब रास्ते होते हैं जुदा
फाउंडेशन कोर्स मुकम्मल होने के बाद, इन अफसरों के रास्ते अलग-अलग हो जाते हैं। जो उम्मीदवार अन्य सेवाओं के लिए चुने जाते हैं, वो अपनी-अपनी स्पेशलाइज्ड ट्रेनिंग के लिए दूसरी अकादमियों की तरफ रुख कर लेते हैं:
IPS (इंडियन पुलिस सर्विस): पुलिस अफसरों को आगे की कड़क ट्रेनिंग के लिए हैदराबाद की 'सरदार वल्लभभाई पटेल नेशनल पुलिस अकादमी' (SVPNPA) भेजा जाता है।
IFS (इंडियन फॉरेन सर्विस): विदेशों में देश की नुमाइंदगी करने वाले IFS अफसरों का सफर दिल्ली के 'सुषमा स्वराज फॉरेन सर्विस इंस्टीट्यूट' की तरफ मुड़ जाता है।
IRS (इंडियन रेवेन्यू सर्विस): टैक्स और रेवेन्यू का जिम्मा संभालने वाले अफसरों को 'नेशनल एकेडमी ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस', नागपुर भेज दिया जाता है।
इन सबके बीच, सिर्फ IAS अफसर ही ऐसे होते हैं जो अगले दो सालों तक LBSNAA में ही रहकर अपने काम की बारीकियों को सीखते हैं।
डेली रूटीन: अनुशासन और मेहनत का कॉकटेल
अगर आपको लगता है कि अफसर बनने के बाद जिंदगी आराम से कटती है, तो आपको अपनी राय बदल लेनी चाहिए। LBSNAA का डेली रूटीन बेहद सख्त और अनुशासित होता है।
सुबह 6:00 बजे: अलार्म बेल के साथ दिन शुरू होता है, जहां ग्राउंड पर पीटी (PT) या योगा सेशन में हिस्सा लेना सभी के लिए लाजमी है।
सुबह 9:00 से शाम 4:00 बजे तक: क्लासरूम लेक्चर्स और मुश्किल केस स्टडीज पर माथापच्ची होती है।
शाम 5:00 बजे के बाद: यह वक्त थोड़ा सुकून भरा होता है, जहां ये ट्रेनी अफसर स्पोर्ट्स, घुड़सवारी (Horse riding), स्विमिंग और दूसरी एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज में हिस्सा लेते हैं।
डिनर: अकादमी का रात का खाना भी कोई आम खाना नहीं होता; यह एक फॉर्मल इवेंट होता है जहां अफसरों को डाइनिंग एटिकेट्स (Dining Etiquettes) सिखाए जाते हैं।
भारत दर्शन और हिमालयन ट्रेक: देश को करीब से जानने का मौका
क्लासरूम की पढ़ाई के अलावा ट्रेनिंग का सबसे रोमांचक हिस्सा "भारत दर्शन" होता है। यह पूरे देश का एक ऐसा टूर है, जो अफसरों को जमीनी हकीकत, अलग-अलग राज्यों की संस्कृति और वहां की असल प्रशासनिक चुनौतियों से रूबरू कराता है। इसके साथ ही, हिमालयन ट्रेकिंग भी उनके शेड्यूल का एक अहम हिस्सा है। ऊंचे और दुर्गम पहाड़ों पर चढ़ने का मकसद सिर्फ सैर-सपाटा नहीं है, बल्कि यह उनकी शारीरिक और मानसिक मजबूती का एक कड़ा इम्तिहान होता है।
डिस्ट्रिक्ट ट्रेनिंग: फील्ड का असली तजुर्बा
LBSNAA में थ्योरी और बेसिक ट्रेनिंग पूरी करने के बाद, IAS ट्रेनीज को एक साल की फील्ड ट्रेनिंग के लिए उनके अलॉट किए गए कैडर (राज्य) में भेज दिया जाता है। असली प्रैक्टिकल नॉलेज यहीं मैदान में मिलती है। यहां वो एक SDM के तौर पर काम सीखते हैं, सिस्टम की अंदरूनी बारीकियों को समझते हैं, सरकारी फाइलें कैसे पास होती हैं और आवाम की असल परेशानियों को कैसे सुलझाया जाता है, इसका सीधा तजुर्बा हासिल करते हैं।
स्टाइपेंड: ट्रेनिंग के दौरान कितने पैसे मिलते हैं?
अब बात करते हैं उस सवाल की जो हर UPSC एस्पिरेंट के जहन में कभी न कभी जरूर आता है कि "ट्रेनिंग के दौरान पैसे कितने मिलते हैं?" आपको बता दें कि इस दौरान बाकायदा सैलरी नहीं, बल्कि स्टाइपेंड (Stipend) दिया जाता है। सातवें वेतन आयोग (Seventh Pay Commission) के लेवल 10 के मुताबिक यह स्टाइपेंड करीब 56,100 रुपये होता है। लेकिन यह पूरा पैसा हाथ में नहीं आता। इसमें से मेस (खाने का खर्च), यूनिफॉर्म और रहने (Accommodation) का किराया काट लिया जाता है। सारे डिडक्शन के बाद एक अफसर के हाथ में करीब 35,000 से 40,000 रुपये टेक-होम अमाउंट के तौर पर आते हैं।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव


