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UPSC IAS : डॉ विकास दिव्यकीर्ति ने बताया, बिहार के छात्रों को किन कमियों पर करना चाहिए काम

UPSC IAS : डॉ विकास दिव्यकीर्ति ने बताया, बिहार के छात्रों को किन कमियों पर करना चाहिए काम

संक्षेप:

Vikas Divyakirti : एक इंटरव्यू में यूपीपीएससी कोचिंग के पॉपुलर टीचर डॉ. विकास दिव्‍यकीर्ति ने बताया कि तैयारी करने आ रहे बिहार के छात्रों को किन कमियों पर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि तकनीक खूब जमकर सीखनी चाहिए। नए सॉफ्टवेयर सीखें।

Fri, 31 Oct 2025 06:28 AMPankaj Vijay लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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डॉ. विकास दिव्‍यकीर्ति यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की कोचिंग की दुनिया में सबसे बेहतरीन और लोकप्रिय शिक्षकों में शुमार हैं। इन्हें लाखों लोग सुनना पसंद करते हैं। उनके छोटे छोटे मोटिवेशनल वीडियोज इंटरनेट पर वायरल होते रहते हैं। न सिर्फ यूपीएससी अभ्यर्थी बल्कि वे आम लोग भी उनके मुरीद हैं जिनका इस परीक्षा से कोई लेना-देना नहीं है। किसी भी पेचीदा विषय को आसानी से सिखाने का उनका अनोखा अंदाज और सेंस ऑफ ह्यूमर उन्‍हें और शिक्षकों से अलग बनाता है। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के अभ्यर्थियों के प्रेरणास्त्रोत विकास दिव्यकीर्ति के जीवन के बारे में जानने में लाखों लोग दिलचस्पी लेते हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया है कि तैयारी करने आ रहे बिहार के छात्रों को किन कमियों पर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि तकनीक खूब जमकर सीखनी चाहिए। नए सॉफ्टवेयर सीखें। नई और आधुनिक चीजों को सीखने को लेकर विरोध का भाव नहीं होना चाहिए। अंग्रेजी को लेकर एक सहजता का भाव लाने की कोशिश करें क्योंकि रोजगार की भाषा को सीखना भी जरूरी है।

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दृष्टि आईएएस कोचिंग के संस्थापक और एमडी विकास दिव्यकीर्ति ( Vikas Divyakirti ) से बीबीसी न्यूज हिंदी को दिए एक इंटरव्यू में पूछा गया था कि बिहार के स्टूडेंट्स की वो कमियां बताएं, जिन पर उन्हें काम करना चाहिए। जवाब में विकास दिव्यकीर्ति ने कहा, 'बिहारी छात्रों में कोई ऐसी खास कमी नहीं है।' इसके बाद बीबीसी की तरफ से कहा गया, 'क्या बिहारी छात्र कल्चरल बैगेज (सांस्कृतिक बोझ) लेकर ज्यादा नहीं आते हैं?' जवाब में डॉ. दिव्यकीर्ति ने कहा, 'हां थोड़ा कल्चरल बैगेज लेकर आते हैं। और दूसरा नई और आधुनिक चीजों को सीखने को लेकर कभी कभी एक विरोध का भाव, तकनीक खूब जमकर सीखें, नए सॉफ्टवेयर सीखें। अंग्रेजी को लेकर सहजता का भाव लाने का प्रयास करें, अपनी भाषा का सम्मान बहुत जरूरी है, पर जिस भाषा में रोजगार है, उसको सीखना भी जरूरी है। मुझे लगता है कि कभी वो चीज आड़े आती है। बाकी बिहार के छात्र शानदार लोग हैं, सिविल सर्विसेज में उनकी हिस्सेदारी देखिए, देखकर समझ में आता ही है, मीडिया में देखें , बिहार ही बिहार हर जगह छाया हुआ है।'

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बिहार और यूपी में पावर व सम्मान वाली भूख ज्यादा, इसलिए सिविल सेवा का क्रेज

सिविल सर्विसेज को लेकर इतना क्रेज क्यों है? तथाकथित ऊंची जाति में तो ज्यादा ही देखने को मिलता है,ऐसा क्यों है? इस प्रश्न पर विकास दिव्यकीर्ति ने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि जाति के बेस पर हम इस चाहत को अलग अलग कर सकते है। लोअर या अपर सभी जाति में यह क्रेज सेम है। वजह है कि एक व्यक्ति अपना करियर चुनते समय क्या चाहता है, अच्छा वेतन, नौकरी सुरक्षित हो, काम में सम्मान भी हो, काम में मजा भी आता हो, पावर हो तो और अच्छा है। पावर और सम्मान की इच्छा, मैं अपने समाज के कर सकूं, मेरी सैलरी भी अच्छी हो, सुरक्षा हो, भारत में ये सारा पैकेज अगर किसी नौकरी में है तो वो सिविल सेवा की नौकरी है। बिहार और यूपी में पावर व सम्मान वाली भूख ज्यादा रहती है। गोवा वाले के लिए यूपीएससी से ज्यादा मतलब नहीं क्योंकि पावर व सम्मान उसके लिए ज्यादा अहम नहीं है, उसके लिए धन और सुखद जीवन ज्यादा अहम है। तो राज्य के हिसाब से डिवाइड करना ज्यादा आसान है, जाति के हिसाब से कम है।'

क्या थी यूपीएससी में रैंक

विकास दिव्‍यकीर्ति ने 1996 में पहले प्रयास में ही यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली थी। उनकी 384वीं रैंक थी। होम मिनस्टिरी कैडर में केंद्रीय सचिवालय सेवा में नौकरी पाई। लेकिन कुछ माह बाद उन्होंने नौकरी से इस्‍तीफा दे दिया था।

Pankaj Vijay

लेखक के बारे में

Pankaj Vijay
पंकज विजय लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी न्यूज एडिटर हैं। यहां वह करियर, एजुकेशन, जॉब्स से जुड़ी खबरें देखते हैं। पंकज को पत्रकारिता में डेढ़ दशक से ज्यादा का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने एनडीटीवी डिजिटल, आजतक डिजिटल, अमर उजाला समाचार पत्र में काम किया। करियर-एजुकेशन-जॉब्स के अलावा वह विभिन्न संस्थानों में देश-विदेश, राजनीति, रिसर्च व धर्म से जुड़ी बीट पर भी काम कर चुके हैं। भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी), दिल्ली से हिन्दी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा व डीयू से इतिहास में बीए ऑनर्स किया है। और पढ़ें
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