
UPSC Daily News Summaries: UPSC सिविल सर्विसेस के लिए जरूरी करेंट अफेयर्स, प्रमुख मुद्दे और महत्वपूर्ण अपडेट
यूपीएससी सिविल सर्विसेस की परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। इसे क्लियर करने के लिए उम्मीदवारों को पहले प्रिलिम्स क्लियर करना पड़ता है और फिर मेंस एग्जाम। इसके बाद इंटरव्यू को पास करना होता है। ऐसे में इस में करेंट अफेयर, समसमायिक मुद्दे अहम भूमिका निभाते हैं।
यूपीएससी सिविल सर्विसेस की परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। इसे क्लियर करने के लिए उम्मीदवारों को पहले प्रिलिम्स क्लियर करना पड़ता है और फिर मेंस एग्जाम। इसके बाद इंटरव्यू को पास करना होता है। ऐसे में इस में करेंट अफेयर, समसमायिक मुद्दे अहम भूमिका निभाते हैं। आज हम आपको कुछ खास समसमायिक मुद्दे की समरी लेकर आए हैं। साथ ही उससे जुड़े संभावित सवाल भी है, जो सिविल सर्विसेस की परीक्षा में पूछे जा सकते हैं।

डेली न्यूज कैप्शूल
1. भारत में डीपफेक नियमों का मसौदा व्यावहारिक नहीं: IAMAI
इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (IAMAI) एक उद्योग निकाय है, जिसके सदस्यों में Google, Meta, Zomato, Airbnb, Amazon, Apple, Jio, Airtel और Netflix जैसी प्रमुख टेक कंपनियां शामिल हैं। हाल ही में IAMAI ने सरकार द्वारा प्रस्तावित उन संशोधनों पर गंभीर आपत्ति जताई है, जिन्हें डीपफेक, आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस आधारित सामग्री और अन्य सिंथेटिकली जनरेटेड इनफॉर्मेशन (SGI) को विनियमित करने के लिए लाया जा रहा है। IAMAI का कहना है कि ये संशोधन तकनीकी रूप से लागू करने योग्य हैं। साथ ही उनका कहना है कि यह भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर व्यवधान भी उत्पन्न कर सकते हैं।
संशोधनों में सबसे अधिक विवादित प्रावधान नियम 4(1A) है। यह बड़ा सामाजिक मीडिया इंटरमीडियरी होने के नाते प्लेटफ़ॉर्म्स को बाध्य करता है कि वे हर उपयोगकर्ता से यह अनिवार्य रूप से घोषित करवाएं कि उनका प्रत्येक पोस्ट SGI है या नहीं। इसके साथ ही, प्लेटफ़ॉर्म्स को उन उपयोगकर्ता घोषणाओं के तकनीकी सत्यापन और यदि सामग्री सिंथेटिक है, तो उसके स्पष्ट लेबलिंग को भी सुनिश्चित करना होगा। IAMAI का कहना है कि वास्तविक समय में उपयोगकर्ता घोषणाओं के सत्यापन का यह मॉडल तकनीकी रूप से संभव नहीं है और इससे संबंधी प्रक्रियाए भारी संसाधन मांगेंगी, जिससे प्लेटफ़ॉर्म की गति और उपयोगकर्ता अनुभव बुरी तरह प्रभावित होगा। इसके अलावा, IAMAI ने यह भी जोर देकर कहा कि ऐसा नियम भारत में साइबर मध्यस्थों के लिए स्थापित “actual knowledge” मानक के विपरीत है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ मामले में फैसले में स्पष्ट किया था। उस फैसले के अनुसार, प्लेटफॉर्म्स को तभी जवाबदेह ठहराया जा सकता है जब उन्हें किसी सामग्री के अवैध होने की वास्तविक जानकारी प्राप्त हो। लेकिन प्रस्तावित संशोधन प्लेटफॉर्म्स को ऐसी स्थिति में ला देंगे जहां उन्हें पूर्व-खोज और पूर्व-निर्धारण करने की भूमिका निभानी पड़ेगी, जो सुरक्षित आश्रय (safe harbour) की गारंटी को कमजोर करता है।
IAMAI ने यह भी चिंता जताई कि उपयोगकर्ताओं से अधिक डेटा इकट्ठा करना और उनके पोस्ट का तकनीकी विश्लेषण करना गोपनीयता जोखिम बढ़ा सकता है। इससे प्लेटफॉर्म्स पर जिम्मेदारी का बोझ इतना बढ़ सकता है कि वे दंड से बचने के लिए अनुचित सेंसरशिप अपनाना शुरू कर दें, जिससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
संगठन ने यह भी कहा कि मौजूदा कानून—जैसे कि आईटी नियम और भारतीय दंड संहिता के प्रावधान—पहले से ही डीपफेक, प्रतिरूपण और अन्य अवैध SGI को हटाने में सक्षम हैं। सरकार द्वारा SGI की जो नई परिभाषा दी गई है, IAMAI के अनुसार, अत्यधिक व्यापक और अस्पष्ट है, जिससे वैध सामग्री भी नियमित कार्रवाई के दायरे में आ सकती है। साथ ही, प्रस्तावित संशोधन में 10% दृश्य या श्रव्य वॉटरमार्क लगाने की अनिवार्यता को IAMAI ने अव्यावहारिक और समय से पहले बताया। उनका कहना है कि यह तकनीक अभी वैश्विक स्तर पर भी मानकीकृत नहीं है और अचानक से ऐसे कड़े मानक लागू करना उद्योग में असमंजस पैदा करेगा।
आखिरी में IAMAI ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन उन प्लेटफॉर्मों के बीच भेद मिटा देते हैं जो केवल तृतीय-पक्ष सामग्री होस्ट करते हैं और उन प्लेटफ़ॉर्मों के बीच जो स्वयं एआई मॉडल चलाते हैं। यह MeitY के ही India AI Governance Guidelines के विरुद्ध है, जिनमें पहले एक बहु-हितधारक समिति गठित करने और कंटेंट प्रमाणिकरण के वैश्विक मानकों का परीक्षण करने की सिफारिश की गई थी।
संभावित सवाल
एआई जनरेटेड कंटेंट के लिए प्रवर्तन-आधारित स्रोत-लेबलिंग, वॉटरमार्किंग और उपयोगकर्ता घोषणाओं को अनिवार्य करने में कौन-कौन से नियामकीय और तकनीकी समझौते शामिल हैं? भारत सेफ हार्बर और डिजिटल नवाचार को प्रभावित किए बिना एक व्यावहारिक निगरानी प्रणाली कैसे डिजाइन कर सकता है?
2. सारंडा अभयारण्य को अधिसूचित करें, सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को दिया निर्देश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को सारंडा वन क्षेत्र को वन्यजीव अभयारण्य घोषित करने का निर्देश दिया है। चीफ जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की अदालत ने सुनवाई के दौरान गुरुवार को सरकार को निर्देश दिया कि तीन माह में सारंडा को अभयारण्य अधिसूचित कर वन अधिकार अधिनियम के तहत यह सुनिश्चित करें कि वहां आदिवासियों व वनवासियों का अधिकार सुरक्षित रहे। साथ ही क्षेत्र में स्थित स्कूल, रेल लाइनें, स्वास्थ्य केंद्र समेत अन्य जन सुविधाएं भी संरक्षित रहे। इसके अलावा कोर्ट ने कहा कि किसी भी स्थिति में वहां खनन की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही कोर्ट ने राज्य को निर्देश दिया कि वह आदिवासी और वनवासी समुदायों के बीच भय को दूर करने के लिए इस तथ्य का प्रचार करें।
इस आदेश के साथ, सारंडा भारत का पहला अभयारण्य बन गया है जिसे सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर अधिसूचित किया गया है। पीठ ने 1968 में बिहार सरकार द्वारा जारी एक अधिसूचना का हवाला दिया, जिसमें तत्कालीन बिहार वन, शिकार और मत्स्य पालन नियम, 1958 के तहत इस क्षेत्र को सारंडा खेल अभयारण्य घोषित किया गया था। न्यायालय ने खनन के लिए अभयारण्य की सीमा से छह वन क्षेत्रों को बाहर रखा। साथ ही यह स्पष्ट कर दिया कि शेष क्षेत्र में या उसके आसपास के एक किलोमीटर के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में कोई भी खनन गतिविधि नहीं हो सकती। न्यायालय ने टीएन गोदावर्मन मामलों में अपने अप्रैल 2023 के फैसले को दोहराया। यह फैसला लंबे समय से चल रहे गोदावर्मन वन संरक्षण मामले में झारखंड निवासी दया शंकर श्रीवास्तव की याचिका पर सुनाया गया, जिन्होंने आरोप लगाया था कि जुलाई 2022 में राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा सारंडा क्षेत्र को अभयारण्य घोषित करने के निर्देश के बावजूद पारिस्थितिक रूप से नाजुक सारंडा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर खनन हो रहा है।
संभावित सवाल
न्यायिक निर्देश के तहत वन क्षेत्रों को वन्यजीव अभयारण्य के रूप में अधिसूचित करने में शामिल कानूनी, पारिस्थितिक और सामाजिक-आर्थिक पहलुओं पर चर्चा करें। संरक्षण की अनिवार्यताओं को आदिवासी अधिकारों और वैध विकास आवश्यकताओं के साथ कैसे संतुलित किया जा सकता है?
3. वियना में सिंधु जल संधि पर लिए गए फैसले को भारत न तो मान्यता देगा और न ही स्वीकार करेगा: अधिकारी
भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) का मुद्दा गरमाया है। इस मुद्दे पर ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में अगले हफ्ते कार्यवाही होगी। इस मामले में एक अधिकारी ने गुरुवार को नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सिंधु जल संधि पर वियना स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय द्वारा लिए गए किसी भी फैसले को, वो चाहे "कार्यवाही" हो या "निर्णय", स्वीकार नहीं करेगा। अधिकारी के मुताबिक क्योंकि यह समझौता अभी भी "स्थगित" है। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को पाकिस्तान ने कहा कि वह अगले सप्ताह वियना में शुरू होने वाली इस संधि पर तटस्थ विशेषज्ञ कार्यवाही के अगले चरण को आगे बढ़ाएगा। अधिकारी ने कहा, "चूंकि भारत सरकार ने सिंधु संधि को स्थगित रखा है, इसलिए भारत मध्यस्थता न्यायालय की कार्यवाही से आए किसी भी फैसले को अमान्य मानेगा। बता दें कि अगले सप्ताह शुरू होने वाली तटस्थ विशेषज्ञ मिशेल लिनो की अध्यक्षता में होने वाली यह कार्यवाही मध्यस्थता न्यायालय के वियना कार्यालय द्वारा संचालित की जा रही है।
कार्यवाही के एजेंडे के अनुसार, कोर्ट द्वारा प्रशासित एक तटस्थ विशेषज्ञ भारत द्वारा दो जलविद्युत परियोजनाओं, किशनगंगा नदी पर किशनगंगा संयंत्र और चिनाब नदी पर रातले विद्युत परियोजना, के निर्माण पर पाकिस्तान की आपत्तियों की जांच करेगा। दोनों परियोजनाओं को भारत के विद्युत क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि 27 जून को, वियना की अदालत ने एक निर्णय जारी किया, लेकिन उसी दिन भारत ने इसे संधि का "गंभीर उल्लंघन" बताया। अधिकारी ने कहा, "इसके परिणामस्वरूप, विदेश मंत्रालय ने जून में एक बयान जारी किया था कि इस मंच के सामने कोई भी कार्यवाही और कोई भी निर्णय, इसी कारण से, अवैध है।"
संभावित सवाल
भारत द्वारा सिंधु जल संधि (IWT) को स्थगित रखने और वियना स्थित मध्यस्थता न्यायालय की कार्यवाही की योग्यता को अस्वीकार करने संबंधित, भारत के इस रुख के पीछे कानूनी और रणनीतिक तर्क का परीक्षण कीजिए।
4. ट्रंप ने शटडाउन समाप्त करने वाले विधेयक पर हस्ताक्षर किए
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को अमेरिकी इतिहास के सबसे बड़े शटडाउन को समाप्त करने वाले एक विधेयक पर हस्ताक्षर किए। 43 दिनों तक चली इस वित्तीय रोक ने वाशिंगटन की हालत खराब कर दिया था। लाखों कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला था, जबकि रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का खेल, खेल रहे थे। रिपब्लिकन नेतृत्व वाली प्रतिनिधि सभा ने बुधवार को, खासतौर पर पार्टी लाइन के अनुसार, सीनेट द्वारा पारित एक पैकेज को मंजूरी देने के लिए मतदान किया, जो संघीय विभागों और एजेंसियों को फिर से खोलेगा। ट्रम्प ने बाद में ओवल ऑफिस में विधेयक पर हस्ताक्षर करते हुए डेमोक्रेट्स पर निशाना साधा और अमेरिकियों से आग्रह किया कि वे एक साल बाद होने वाले अमेरिका के मध्यावधि चुनावों में मतदान करते समय अराजकता को याद रखें।
लगभग 6.7 लाख संघीय कर्मचारी, जो शटडाउन के दौरान छुट्टी पर भेजे गए थे, अब वापस काम पर लौटने की उम्मीद है। इसके अलावा, उतनी ही संख्या में वे कर्मचारी जो बिना वेतन के काम कर रहे थे उन्हें भी बकाया वेतन (बैक पे) मिलेगा। इनमें 60000 से अधिक एयर ट्रैफिक कंट्रोलर और एयरपोर्ट सुरक्षा कर्मचारी शामिल हैं।
अमेरिकी मीडिया के अनुसार, न्याय विभाग और स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग सहित कई संघीय एजेंसियों ने अपने कर्मचारियों को गुरुवार को कार्यालय लौटने को कहा है। ट्रैकिंग वेबसाइट फ़्लाइटअवेयर के अनुसार, गुरुवार को लगभग 1,000 उड़ानें रद्द होने के कारण यात्रा में देरी में सुधार तो हुआ है, लेकिन यह कम नहीं हुई है। इस समझौते से शटडाउन के दौरान ट्रंप द्वारा बर्खास्त किए गए संघीय कर्मचारियों को भी बहाल किया जाएगा।
संभावित सवाल
संयुक्त राज्य अमेरिका में लंबे समय तक शटडाउन का प्रशासनिक निरंतरता, कार्यबल के मनोबल और संकट-प्रतिक्रिया क्षमता पर क्या प्रभाव पड़ता है, इसका विश्लेषण कीजिए। साथ ही भारतीय व्यवस्था इससे कैसे अलग है?
5. ‘97% श्रोता AI संगीत और मानव-निर्मित संगीत में फर्क नहीं कर पाते’
बुधवार को जारी एक Deezer–Ipsos सर्वेक्षण के अनुसार, चौंकाने वाले 97% श्रोता यह नहीं पहचान पाए कि कोई गीत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) द्वारा बनाया गया है या इंसान द्वारा कम्पोज़ किया गया है। इससे यह चिंता बढ़ती जा रही है कि एआई संगीत के निर्माण, उपभोग और मुद्रीकरण के तरीके को बदल सकती है। इस सर्वेक्षण के लिए Ipsos ने अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस सहित आठ देशों के 9,000 प्रतिभागियों से बातचीत की। निष्कर्षों ने यह दिखाया कि जब AI ऐसे उपकरण उपलब्ध करा रहा है जो स्वतः गीत तैयार कर सकते हैं। ऐसे में संगीत उद्योग में नैतिकता, कॉपीराइट और कलाकारों की आजीविका को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अध्ययन के अनुसार, 73% प्रतिभागी चाहते हैं कि जब AI-जनित ट्रैक सुझाए जाएं तो इसकी स्पष्ट सूचना दी जाए। जबकि 45% ने फ़िल्टरिंग विकल्पों की मांग की और 40% ने कहा कि वे AI द्वारा बनाए गए गानों को पूरी तरह छोड़ देंगे। करीब 71% उत्तरदाता इस बात से हैरान थे कि वे मानव-निर्मित और AI-निर्मित ट्रैकों के बीच अंतर नहीं कर सके।
Deezer, जिसके 9.7 मिलियन सब्सक्राइबर्स हैं, पर प्रतिदिन AI संगीत सबमिशन की संख्या बढ़कर 50000 से अधिक हो गई है—जो कुल अपलोड का लगभग एक-तिहाई है और अप्रैल में 18% के मुकाबले काफी अधिक है। कंपनी ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए टैगिंग शुरू की है और संपादकीय प्लेलिस्ट तथा एल्गोरिथमिक सिफारिशों से AI-निर्मित ट्रैकों को बाहर कर दिया है।
Deezer के सीईओ एलेक्सिस लैंटरनियर ने रॉयटर्स से कहा, “हम दृढ़ता से मानते हैं कि सृजनशीलता मनुष्यों द्वारा उत्पन्न होती है और उन्हें संरक्षित किया जाना चाहिए।” उन्होंने पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर दिया। लैंटरनियर ने AI संगीत के लिए अलग-अलग भुगतान संरचनाएं लागू करने की जटिलता पर भी प्रकाश डाला, यह कहते हुए कि पारिश्रमिक नीतियों में “बड़ा बदलाव” करना अभी भी चुनौतीपूर्ण है।
संभावित सवाल
कॉपीराइट ढांचे, सांस्कृतिक उद्योगों और रचनाकारों के पारिश्रमिक पर एआई-निर्मित संगीत के प्रभावों का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। क्या नीति-निर्माण में नियामकों को मानव और कृत्रिम (सिंथेटिक) सृजनशीलता के बीच अंतर करना चाहिए?
एडिटोरियल स्नैपशॉट्स
A. दिल्ली विस्फोट पर प्रतिक्रिया
10 नवंबर को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लाल किले के पास विस्फोटकों से लदी एक कार में विस्फोट होने से कम से कम 10 लोगों की मौत हुई। लाल किला विस्फोट मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है उसमें तीन पहलुओं पर विचार करना जरूरी है। पहला पहलू यह है कि राज्य ने विस्फोट पर कितनी संयमित और जिम्मेदारी से प्रतिक्रिया दी। उन्होंने विस्फोट को आतंकवादी हमला बताने में जल्दबाजी नहीं की, बल्कि पहले तथ्य जुटाने पूरा फोकस किया। अधिकारियों ने विस्फोट को एक दिन पहले फरीदाबाद से विस्फोटक सामग्री की एक बड़ी खेप की जब्ती से जोड़ने से पहले पर्याप्त सबूत मिलने तक इंतजार किया। पूरे मामले में, कोई भी ढिंढोरा नहीं पीटा गया, कोई दिखावा नहीं किया गया, पाकिस्तान की ओर से कोई आह्वान नहीं किया गया। वास्तव में, ऐसा हमेशा होना ही चाहिए - लेकिन ऐसा कम ही होता है।
दूसरा पहलू यह है कि इस विस्फोट ने दिल्ली के अपने सुरक्षा तंत्र में खामियां पैदा कर दी हैं। राष्ट्रीय राजधानी में आखिरी आतंकी हमला 2011 में हुआ था। सभी पुलिस बलों की तरह, दिल्ली पुलिस में भी कर्मचारियों की भारी कमी हैऔर राजधानी में सीसीटीवी कैमरों की भारी संख्या होने के बावजूद, दृश्य निगरानी पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता। इसकी समीक्षा जरूरी है।
तीसरा, पुलवामा फ़रीदाबाद मॉड्यूल (जैसा कि कुछ ख़ुफ़िया एजेंसियों ने इस सेल को नाम दिया है) के सदस्यों में चरमपंथ का चिंताजनक स्तर है। उच्च शिक्षित, अच्छे करियर की संभावनाओं वाले और अच्छी तरह से संगठित दिखने वाले इस मॉड्यूल के सदस्य आम आतंकवादी की छवि में फिट नहीं बैठते। गिरफ्तार किए गए लोगों में से कई, जिनमें एक महिला ऑपरेटिव भी शामिल है, डॉक्टर हैं। हालांकि जांच एजेंसियां इस मॉड्यूल के सदस्यों से जब्त किए गए हथियारों, उनके वित्तीय स्रोतों और जिन लोगों से वे संपर्क में थे, उन पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं, लेकिन उनके लिए यह समझना ज़रूरी है कि उनके इरादे क्या थे—और वे कैसे चरमपंथी बने?
संभावित सवाल
शहरी सामूहिक हताहतों की घटनाओं की त्वरित, साक्ष्य-आधारित जांच के लिए भारत की क्षमता का विश्लेषण कीजिए। पुलिस, खुफिया और डिजिटल फोरेंसिक प्रणालियां कैसे विकसित हुई हैं?
B.ट्रम्प ने H-1B वीज़ा पर अपने रुख पर पुनर्विचार किया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीज़ा पर अपने रुख पर पुनर्विचार किया है। मुश्किल से दो महीने पहले ही जब उन्होंने H-1B वीज़ा शुल्क बढ़ाकर अत्यधिक $100,000 कर दिया था — यह राशि H-1B के एंट्री-लेवल कर्मचारियों के औसत वेतन से भी अधिक है। ऐसे में ट्रंप ने स्वीकार कर लिया है कि अमेरिका दूसरे देशों से आने वाले कुशल प्रवासियों के बिना काम नहीं चला सकता।
सच तो यह है कि ट्रंप का शुरुआती H-1B धमाका पहले ही कमजोर पड़ गया था, जब उनकी प्रशासन ने स्पष्ट किया कि वे लोग जो अमेरिका में रहते हुए अपना वीजा स्टेटस बदलकर H-1B ले रहे हैं। इनमें अमेरिकी विश्वविद्यालयों के छात्र भी शामिल हैं, उन्हें यह भारी शुल्क नहीं देना होगा। ट्रंप का बदला हुआ रुख पूरी तरह तर्कसंगत है। अमेरिका और उसका ब्लू-कॉलर कार्यबल इस बात को लेकर सही हैं कि विनिर्माण शक्ति के रूप में अमेरिका का पतन हुआ है। पहले जापान के हाथों और बाद में चीन के हाथों। लेकिन वित्त के अलावा, अत्याधुनिक विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भी संपूर्ण अमेरिका ने किसी भी तरह का आर्थिक पतन नहीं देखा है। इसकी बड़ी वजह उन कुशल प्रवासियों का योगदान है, जो अन्य देशों से अमेरिका आए, जिन्होंने या तो अमेरिका में पढ़ाई की या बेहतर रोजगार के अवसरों के लिए वहां प्रवास किया।
एशिया, मुख्य रूप से चीन और भारत, लेकिन अन्य छोटे देशों सहित — अमेरिका में कुशल कर्मचारियों की मुख्य आपूर्ति लाइन रहा है। भारत जैसे देश के लिए, जो H-1B वीज़ा कार्यक्रम का अब तक का सबसे बड़ा लाभार्थी रहा है और अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के सबसे बड़े स्रोतों में से एक है। हालांकि, इससे आत्मसंतुष्ट होने की जरूरत नहीं, बल्कि यह एक और सबक है कि ट्रंप के अमेरिका के साथ निरंतर, धैर्यपूर्ण और फुर्तीला संवाद ही एकमात्र विकल्प है।
संभावित सवाल
विश्लेषण करें कि भारत घरेलू नवाचार क्षमता को मजबूत करने के लिए वैश्विक गतिशीलता रुझानों का लाभ कैसे उठा सकता है? उच्च शिक्षा, अनुसंधान निधि और प्रतिभाओं को बनाए रखने के लिए बाहरी श्रम बाजारों पर निर्भरता कम करने हेतु किन नीतिगत बदलावों की आवश्यकता है?
आज का तथ्य
2024 में भारत में टीबी के सबसे ज़्यादा मामले दर्ज होंगे, लेकिन मृत्यु दर और नए मामलों में कमी:
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की वैश्विक क्षय रोग रिपोर्ट 2025 में कहा गया है कि 2024 में टीबी के सबसे अधिक मामले भारत में सामने आये, जिसके बाद इंडोनेशिया, फिलीपीन, चीन और पाकिस्तान का स्थान है। इसी रिपोर्ट का हवाला देते हुए, भारत सरकार ने कहा कि हर साल सामने आने वाले नए मामलों में 21% की कमी आई है, जो 2015 में प्रति लाख जनसंख्या पर 237 से घटकर 2024 में प्रति लाख जनसंख्या पर 187 हो गई है। सरकार ने एक बयान में कहा कि यह वैश्विक स्तर पर टीबी के मामलों में सबसे ज़्यादा गिरावट में से एक है, जो अन्य उच्च-भार वाले देशों में दर्ज की गई कमी से भी ज़्यादा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भौगोलिक दृष्टि से, 2024 में टीबी से पीड़ित अधिकांश लोग डब्ल्यूएचओ के दक्षिण-पूर्व एशिया (34 प्रतिशत), पश्चिमी प्रशांत (27 प्रतिशत) और अफ्रीका (25 प्रतिशत) क्षेत्रों में थे, जबकि पूर्वी भूमध्यसागरीय (8.6 प्रतिशत), अमेरिका (3.3 प्रतिशत) और यूरोप (1.9 प्रतिशत) में इनका अनुपात कम था।
दुनिया भर में अनुमानित सभी मामलों में से 87 प्रतिशत मामले 30 देशों में दर्ज किए गए, जिनमें से आठ देशों में वैश्विक कुल मामलों की दो-तिहाई (67 प्रतिशत) संख्या दर्ज की गयी। इनमें से सबसे अधिक 25 प्रतिशत मामले भारत में दर्ज किए गए, उसके बाद इंडोनेशिया (10 प्रतिशत), फिलीपीन (6.8 प्रतिशत), चीन (6.5 प्रतिशत), पाकिस्तान (6.3 प्रतिशत), नाइजीरिया (4.8 प्रतिशत), कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (3.9 प्रतिशत) और बांग्लादेश (3.6 प्रतिशत) का स्थान रहा। भारत सरकार के अनुसार साल 2024 में देश में टीबी की इलाज कवरेज 92% तक पहुंच गई है, जबकि 2015 में यह सिर्फ 53% थी. अब लगभग सभी टीबी मरीजों को इलाज मिल पा रहा है।



