UPSC में गजब मामला, एक ही रोल नंबर पर 301 रैंक के दो दावे, असली आकांक्षा सिंह कौन? कैसे होगा खुलासा
यूपीएससी परीक्षा परिणाम 2025 में एक बड़ा विवाद सामने आया है जहां गाजीपुर और आरा की दो अलग-अलग आकांक्षा सिंह एक ही रोल नंबर 301 पर अपनी सफलता का दावा कर रही हैं।

यूपीएससी (UPSC) यानी संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा को हमारे देश में सबसे कठिन और प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक माना जाता है। इस परीक्षा को पास करना लाखों युवाओं का सबसे बड़ा सपना होता है। सालों की कड़ी मेहनत, रातों की नींद कुर्बान करने और दुनिया भर से कटकर किताबों में खो जाने के बाद जब कोई इस परीक्षा को पास करता है, तो उसके और उसके परिवार के लिए यह किसी बड़े जश्न से कम नहीं होता। लेकिन जरा सोचिए, अगर किसी एक ही रोल नंबर पर दो अलग-अलग लोग अपनी कामयाबी का दावा ठोक दें, तो क्या होगा? कुछ ऐसा ही हैरतअंगेज और किसी सस्पेंस फिल्म जैसा लगने वाला वाकया शनिवार को सामने आया, जब यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (CSE) के नतीजे घोषित होने के बाद रोल नंबर 301 एक बड़े विवाद का केंद्र बन गया।
दरअसल, शुक्रवार को यूपीएससी ने सिविल सेवा परीक्षा 2025 के फाइनल नतीजे घोषित किए। इस साल कुल 958 होनहार उम्मीदवारों को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय विदेश सेवा (IFS), भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के साथ-साथ सेंट्रल सर्विसेज ग्रुप ए और बी के लिए चुना गया है। नतीजों के ऐलान के बाद हर तरफ बधाइयों का तांता लग गया, लेकिन शनिवार आते-आते एक ऐसी खबर ने सबका ध्यान अपनी तरफ खींच लिया जिसने पूरे सिस्टम पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
विवाद की असली जड़ है रोल नंबर 301। इस एक रोल नंबर पर भारत के दो अलग-अलग राज्यों की दो युवतियां अपनी-अपनी दावेदारी मजबूती से पेश कर रही हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इन दोनों ही उम्मीदवारों का नाम 'आकांक्षा सिंह' है। इनमें से एक आकांक्षा सिंह बिहार के आरा जिले की रहने वाली हैं, जबकि दूसरी आकांक्षा सिंह उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से ताल्लुक रखती हैं। दोनों का ही बेहद कॉन्फिडेंस के साथ यह कहना है कि यूपीएससी की मेरिट लिस्ट में मौजूद रोल नंबर 301 उन्हीं का है और उन्होंने ही यह प्रतिष्ठित परीक्षा पास की है।
एक ही रोल नंबर पर दो दावे
इस पूरे मामले ने तब तूल पकड़ा जब दोनों ही उम्मीदवार अपने-अपने एडमिट कार्ड और बाकी जरूरी दस्तावेजों के साथ मीडिया के सामने आ गईं। बिहार के आरा की रहने वाली आकांक्षा सिंह ने बेहद आत्मविश्वास के साथ मीडिया से बातचीत करते हुए अपनी सफलता की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि यह उनका दूसरा प्रयास था और उन्हें इस बार परीक्षा में कामयाबी मिलने का पूरा यकीन था। आरा की आकांक्षा ने कहा, "यह मेरे दादाजी का सपना था। उन्हें मुझ पर बहुत ज्यादा भरोसा था।" आपको बता दें कि आरा की यह आकांक्षा सिंह साल 2012 में मारे गए रणवीर सेना के संस्थापक ब्रह्मेश्वर सिंह की बेटी हैं। उन्होंने अपनी तैयारी के बारे में बताते हुए कहा कि वह इस मुकाम तक पहुंचने के लिए हर दिन आठ से दस घंटे तक लगातार पढ़ाई करती थीं।
वहीं दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की रहने वाली आकांक्षा सिंह ने इस पूरे मामले को एक नया ही मोड़ दे दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक का सहारा लेते हुए सीधा आरोप लगाया है कि कोई उनकी पहचान का गलत इस्तेमाल कर रहा है। अपनी फेसबुक पोस्ट में गाजीपुर की आकांक्षा ने साफ तौर पर लिखा, "यह बात सामने आई है कि मेरी रैंक और मेरी पहचान का किसी और के जरिए गलत इस्तेमाल (impersonation) किया जा रहा है।" अपने दावे को पुख्ता करने के लिए उन्होंने अपनी पोस्ट के साथ दो अहम दस्तावेज भी संलग्न किए, जिनमें उनका ओरिजिनल आईडी कार्ड और यूपीएससी का ई-समन (e-summon) शामिल है। उनका दावा है कि असली उम्मीदवार वही हैं और उनके साथ सरासर धोखा हो रहा है।
खूब हो रही चर्चा
अब स्थिति यह है कि मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक, हर जगह इसी बात की चर्चा हो रही है कि आखिर सच कौन बोल रहा है? क्या यह यूपीएससी के स्तर पर हुई कोई तकनीकी चूक है या फिर कोई गहरी साजिश? एक तरफ आरा की आकांक्षा अपनी बरसों की मेहनत और अपने परिवार के सपने की बात कर रही हैं, तो दूसरी तरफ गाजीपुर की आकांक्षा सबूतों के साथ अपनी पहचान चोरी होने की गुहार लगा रही हैं। दोनों के हाथों में एडमिट कार्ड हैं और दोनों ही खुद को सच्चा बता रही हैं।
आयोग की तरफ से अभी नहीं आई कोई पुष्टि
इस पूरे हंगामे के बीच सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह है कि देश के सबसे बड़े और भरोसेमंद आयोग यानी यूपीएससी की तरफ से अभी तक इस विवाद पर कोई भी आधिकारिक स्पष्टीकरण (clarification) नहीं आया है। पूरा देश और खासकर वो लाखों युवा जो दिन-रात यूपीएससी की तैयारी करते हैं, वो इस वक्त आयोग के जवाब का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। यह सिर्फ दो लड़कियों के भविष्य का सवाल नहीं है, बल्कि उस परीक्षा की विश्वसनीयता का भी सवाल है। जब तक यूपीएससी खुद सामने आकर इस रोल नंबर 301 की पूरी गुत्थी नहीं सुलझाता, तब तक यह कश्मकश यूं ही बनी रहेगी कि आखिर असली 'आकांक्षा सिंह' कौन है?
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
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हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
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- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
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