लंबा पेपर, उलझे सवाल... UPSC Prelims 2026 की कटऑफ गिरेगी या इस बार उड़ेंगे होश?

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UPSC CSE Prelims 2026 को हाल के वर्षों का सबसे कठिन और अनिश्चित पेपर बताया जा रहा है। 56 पन्नों के लंबे पेपर, बदलते पैटर्न और एनालिटिकल सवालों ने अभ्यर्थियों को चौंका दिया। 

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रविवार 24 मई को हुई UPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 ने लाखों अभ्यर्थियों को हिलाकर रख दिया। परीक्षा खत्म होने के बाद परीक्षा केंद्रों के बाहर चेहरे थके हुए दिखे, सोशल मीडिया पर घबराहट साफ नजर आई और कोचिंग संस्थानों में देर रात तक सिर्फ एक चर्चा चलती रही कि आखिर इस बार का पेपर इतना अलग क्यों था। इस बार का जनरल स्टडीज पेपर-1 सिर्फ कठिन नहीं था, बल्कि पूरी तरह अप्रत्याशित माना जा रहा है। लंबे सवाल, भारी पढ़ाई का दबाव, उलझे हुए करेंट अफेयर्स और हर विषय में एनालिटिकल एप्रोच ने कई अभ्यर्थियों की तैयारी की रणनीति को बेअसर कर दिया।

56 पन्नों के पेपर ने बढ़ाया दबाव

एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस बार का पेपर पिछले सालों की तुलना में काफी लंबा था। जहां 2025 का GS पेपर 48 पन्नों का था, वहीं 2026 में यह बढ़कर 56 पन्नों तक पहुंच गया। इसका सीधा असर छात्रों की स्पीड, फोकस और समय प्रबंधन पर पड़ा। कई छात्रों ने कहा कि पेपर पढ़ने में ही काफी समय निकल गया, जिससे आखिरी सवालों तक पहुंचते-पहुंचते मानसिक थकान महसूस होने लगी।

कटऑफ में बड़ी गिरावट के संकेत

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती विश्लेषण में कई शिक्षकों और संस्थानों ने संकेत दिए हैं कि इस बार कटऑफ नीचे जा सकती है। NEXT IAS के CMD बी. सिंह के अनुसार शुरुआती अनुमान में कटऑफ 70 से 75 के बीच रह सकती है। वहीं PMF IAS के संस्थापक मंजूनाथ थम्मिनिडी ने भी कहा कि पेपर इतना अनिश्चित था कि कई अच्छे छात्रों को भी अपने स्कोर को लेकर भरोसा नहीं है। उनके मुताबिक जिन्होंने बहुत सावधानी से सवाल हल किए, उनके सफल होने की संभावना ज्यादा हो सकती है।

इकोनॉमी सेक्शन ने लिया असली टेस्ट

SRIRAM’s IAS के डायरेक्टर श्रीराम सर ने बताया कि अर्थव्यवस्था से जुड़े सवाल केवल जानकारी आधारित नहीं थे, बल्कि गहरी समझ मांग रहे थे। मलयगम कमेटी, मल्होत्रा कमेटी, उर्जित पटेल कमेटी, NBFC, MSME, क्राउडिंग आउट और ब्लॉकचेन जैसे विषयों को जोड़कर सवाल पूछे गए। यानी सिर्फ नोट्स याद कर लेना काफी नहीं था, कॉन्सेप्ट की असली समझ जरूरी थी। उन्होंने साफ कहा कि इस बार पेपर का कठिनाई स्तर औसत से काफी ऊपर था।

यूपीएससी ने फिर बदला अपना खेल

विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार UPSC ने सवालों के विकल्प बनाने का तरीका भी बदल दिया। पिछले कुछ सालों में छात्र जिस पैटर्न के आदी हो चुके थे, आयोग उससे हटता नजर आया। कुछ सवालों में एलिमिनेशन तकनीक काम आई, लेकिन कई जगह बिल्कुल सटीक समझ के बिना जवाब देना मुश्किल था। यही वजह रही कि कई अभ्यर्थी ज्यादा सवाल अटेम्प्ट करने से भी डरते दिखे।

इतिहास और साइंस ने बढ़ाया सरप्राइज फैक्टर

इस बार इतिहास और कला-संस्कृति से करीब 20 सवाल पूछे गए, जो हाल के वर्षों की तुलना में काफी ज्यादा हैं। वहीं साइंस एंड टेक्नोलॉजी से भी लगभग 18 सवाल आए। दूसरी तरफ पॉलिटी का वेटेज अपेक्षाकृत कम दिखा। इससे उन छात्रों को बड़ा झटका लगा जिन्होंने पिछले ट्रेंड देखकर अपनी तैयारी सीमित विषयों तक रखी थी।

सिर्फ रटने वालों के लिए मुश्किल संदेश

शुभ्रा रंजन ने इस पेपर को सिर्फ कठिन परीक्षा नहीं, बल्कि “पर्सनैलिटी टेस्ट” जैसा बताया। उनके मुताबिक UPSC अब ऐसे उम्मीदवार चाहता है जो तनाव में भी शांत रह सकें और जटिल परिस्थितियों में फैसले लेने की क्षमता रखते हों।

उन्होंने कहा कि केवल रटकर या शॉर्टकट के भरोसे परीक्षा निकालने का दौर अब कमजोर पड़ता दिख रहा है। इस बार उन छात्रों को फायदा मिल सकता है जिनमें बौद्धिक जिज्ञासा, कॉन्सेप्ट की समझ और बदलती परिस्थितियों के हिसाब से सोचने की क्षमता है।

उन्होंने एक दिलचस्प बात भी कही कि “अच्छा बल्लेबाज गेंद की शिकायत नहीं करता, वह उसे खेलता है।” उनके मुताबिक यही सोच UPSC इस परीक्षा के जरिए परखना चाहता है।

5.49 लाख अभ्यर्थियों ने दी परीक्षा

आयोग के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार इस बार करीब 8.19 लाख उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जिनमें से लगभग 5.49 लाख अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। यानी उपस्थिति दर करीब 67 प्रतिशत रही।

देश के 83 शहरों में 2,072 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। इस बार सुरक्षा व्यवस्था भी काफी सख्त रही, जिसमें रियल टाइम फेस ऑथेंटिकेशन और मोबाइल सिग्नल जैमर जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। परीक्षा के बाद अब सबसे ज्यादा चर्चा संभावित कटऑफ और अनऑफिशियल आंसर-की को लेकर होगी। सोशल मीडिया और कोचिंग संस्थानों के विश्लेषण आने वाले दिनों में और तेज होंगे।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

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हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

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