ग्वालियर की सृष्टि गोयल ने UPSC में लहराया कामयाबी का परचम, हासिल की 160वीं रैंक; बताया सफलता का असली मंत्र

Mar 06, 2026 10:09 pm ISTHimanshu Tiwari हिन्दुस्तान, ग्वालियर
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ग्वालियर की सृष्टि गोयल ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 160वीं रैंक हासिल कर शहर का नाम रोशन किया है। जानिए उनकी सफलता की कहानी, टाइम मैनेजमेंट और तैयारी की खास रणनीति।

ग्वालियर की सृष्टि गोयल ने UPSC में लहराया कामयाबी का परचम, हासिल की 160वीं रैंक; बताया सफलता का असली मंत्र

हर साल लाखों नौजवान अपनी आंखों में यूपीएससी (UPSC) पास करके देश की सेवा करने का ख्वाब सजाते हैं। लेकिन यह सफर इतना आसान नहीं होता। यह इम्तिहान सिर्फ आपकी किताबी नॉलेज का नहीं, बल्कि आपके सब्र, जज्बे, लगन और कभी हार न मानने वाले हौसले का भी कड़ा टेस्ट लेता है। इसी मुश्किल डगर को पार करते हुए मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर की होनहार बेटी सृष्टि गोयल ने कामयाबी का शानदार परचम लहराया है। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 के नतीजों में सृष्टि ने 160वीं रैंक हासिल कर न सिर्फ अपने परिवार का, बल्कि पूरे ग्वालियर शहर का सिर फक्र से ऊंचा कर दिया है। उनकी यह कामयाबी इस बात का जीता जागता सबूत है कि अगर इंसान ठान ले, तो कोई भी मंजिल हासिल की जा सकती है।

साधारण परिवार से निकलकर हासिल किया असाधारण मुकाम

सृष्टि गोयल ग्वालियर के मुरार इलाके की रहने वाली हैं। उनके परिवार का बैकग्राउंड किसी बहुत बड़े ब्यूरोक्रेट का नहीं है, बल्कि एक आम मिडिल क्लास परिवार की तरह ही है। उनके पिता एक सराफा कारोबारी (ज्वैलर) हैं और अपनी छोटी सी दुनिया में खुश रहते हैं, जबकि उनकी मां एक हाउसवाइफ हैं जिन्होंने घर को बखूबी संभाला है। परिवार में इकलौती बेटी होने के नाते सृष्टि को हमेशा से माता पिता का भरपूर प्यार और सपोर्ट मिला।

आज जब यूपीएससी का रिजल्ट आया है, तो इस घर की खुशियों का कोई ठिकाना नहीं है। सृष्टि की इस शानदार कामयाबी पर उनके माता पिता के साथ साथ दादा दादी भी बेहद खुश हैं। घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है और रिश्तेदारों से लेकर दोस्त यारों तक, हर कोई फोन पर इस होनहार बेटी को अपनी दुआएं और मुबारकबाद दे रहा है।

5 साल का लंबा संघर्ष और डगमगाते हौसले को संभालना

सृष्टि की यह सफलता उन्हें रातों रात नहीं मिली है। मीडिया से खास बातचीत के दौरान सृष्टि ने अपने इस लंबे और थका देने वाले सफर के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि वह पिछले 5 सालों से यूपीएससी की तैयारी कर रही थीं। शुरुआत में उन्होंने एक साल दिल्ली जाकर कोचिंग ली और तैयारी की बारीकियों को समझा, लेकिन उसके बाद उन्होंने तय किया कि वह घर लौटकर ही अपनी पढ़ाई जारी रखेंगी। बाकी के सालों में सृष्टि ने अपने घर की चारदीवारी के अंदर ही अपनी पूरी दुनिया बसा ली और घर पर ही रहकर सेल्फ स्टडी (Self Study) पर पूरा फोकस किया।

यह सफर मानसिक तौर पर बहुत थकाने वाला था। सृष्टि ने बेहद ईमानदारी से कबूल किया कि इन पांच सालों में कई बार ऐसे मौके भी आए जब उन्हें लगा कि यूपीएससी निकालना बेहद कठिन है। मन में कई बार यह खयाल भी आया कि इस मुश्किल रास्ते को छोड़कर कोई दूसरा और आसान करियर ऑप्शन चुन लिया जाए। एक इंसान होने के नाते ऐसी घबराहट होना बहुत लाजमी है। लेकिन, सृष्टि ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने डगमगाते हौसले को संभाला, खुद को दोबारा मोटिवेट किया और अपनी तैयारी में जुटी रहीं। आखिरकार उनकी यही जिद और कड़ी मेहनत रंग लाई।

टाइम मैनेजमेंट और सही प्लानिंग को सफलता की असली कुंजी

सृष्टि का मानना है कि यूपीएससी क्लियर करने के लिए सही 'मैनेजमेंट' सबसे बड़ी कुंजी है। उन्होंने उन तमाम मिथकों को तोड़ा है जो कहते हैं कि आईएएस बनने के लिए दिन रात एक करना पड़ता है या रातों की नींद उड़ानी पड़ती है। सृष्टि साफ कहती हैं कि पूरी रात जागकर पढ़ने के बजाय एक ठोस प्लानिंग के जरिए अपना गोल सेट करके तैयारी करना ज्यादा जरूरी है। उन्होंने अपनी पढ़ाई के घंटों को एक लिमिट में रखा।

आज के डिजिटल दौर में जहां ऑनलाइन पढ़ाई बहुत जरूरी हो गई है, सृष्टि ने एक बहुत अहम बात की तरफ ध्यान दिलाया है। उनका कहना है कि ऑनलाइन क्लासेज और स्टडी मटेरियल पढ़ते वक्त आंखों को आराम देना भी बेहद जरूरी है। इसके अलावा, सृष्टि ने तैयारी के दौरान सोशल मीडिया से पूरी तरह से दूरी बनाए रखी। उनका मानना है कि सोशल मीडिया आपका बहुत सारा कीमती वक्त बर्बाद कर सकता है, इसलिए इस तपस्या के दौरान इससे दूर रहना ही सबसे बड़ी भलाई है।

तैयारी कर रहे छात्रों के लिए खास संदेश

सृष्टि गोयल की यह कहानी उन लाखों छात्रों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो कई सालों से इस परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल पा रही है। सृष्टि ने उन सभी एस्पिरेंट्स (Aspirants) को एक खास संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि अगर आपके मन में खुद पर पूरा विश्वास है और आपका लक्ष्य एकदम मजबूत है, तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको सफलता हासिल करने से नहीं रोक सकती।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव

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