कंधे पर सितारे... पुलिस की नौकरी का भौकाल, यूपी में डिप्टी एसपी को कितनी मिलती है सैलरी
यूपी में प्रशासनिक अधिकारी बनना बहुत बड़े रुतबे वाली बात होती है। कंधे पर सितारे और बड़ी जिम्मेदारियों के साथ डीएसपी का पद काफी मायने में अहम है।

सरकारी नौकरी और उसमें भी अफसरशाही का रुतबा ही कुछ अलग होता है। उत्तर प्रदेश में जब भी कोई युवा सिविल सर्विसेज की तैयारी शुरू करता है, तो उसकी आंखों में एसडीएम (SDM) या फिर पुलिस की वर्दी पहने डिप्टी एसपी (DSP) बनने का ही ख्वाब तैरता है। नीली बत्ती, सायरन की गूंज, सरकारी गाड़ी और आगे-पीछे चलते गार्ड्स, ये वो तस्वीर है जो सालों की खामोश मेहनत का सबसे बड़ा और शानदार इनाम होती है। आइए विस्तार से जानते हैं कि सूबे में डिप्टी एसपी और एसडीएम बनने पर सरकार की तरफ से कितनी तनख्वाह मिलती है और रुतबे के साथ क्या-क्या शाही सहूलियतें दी जाती हैं।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की पीसीएस परीक्षा देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित राज्य स्तरीय परीक्षाओं में गिनी जाती है, जिसके जरिए यूपी में एसडीए और डीएसपी जैसे पदों पर उम्मीदवारों का चयन होता है। प्रीलिम्स, मेन्स और फिर इंटरव्यू के कड़े पड़ावों को पार करने के बाद ही कोई उम्मीदवार इस मुकाम तक पहुंचता है। डिप्टी एसपी को पुलिस उपाधीक्षक या 'डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस' भी कहा जाता है। पुलिस महकमे में यह राज्य स्तर का एक बेहद अहम और जिम्मेदारी वाला ओहदा होता है। खाकी वर्दी का एक अलग ही चार्म होता है और जब बात सैलरी की आती है, तो सरकार इसमें कोई कसर नहीं छोड़ती। आंकड़ों की बात करें तो यूपी पीसीएस के जरिए चुने गए एक डिप्टी एसपी का पे-स्केल 53,100 रुपये से लेकर 1,67,800 रुपये के बीच तय किया गया है। जब कोई नया अफसर डिप्टी एसपी के तौर पर जॉइन करता है, तो उसे भत्तों को हटाकर एक तय बेसिक सैलरी मिलती है। अब आप सोच रहे होंगे कि क्या बस इतने ही पैसे मिलते हैं? जी नहीं, असली इजाफा तो भत्तों के जुड़ने के बाद होता है।
एक डिप्टी एसपी को तमाम तरह के विशेष भत्ते मिलते हैं, जिनमें शामिल हैं -
- महंगाई भत्ता (डीए)
- मकान किराया भत्ता (एचआरए)
- अन्य विशेष भत्ते (जैसे ट्रांसपोर्ट और राशन मनी)
इन सबको अगर मिला लिया जाए, तो कटौतियों के बाद एक नए डिप्टी एसपी के बैंक खाते में हर महीने एक बहुत ही शानदार रकम क्रेडिट होती है।
यूपी में डिप्टी एसपी को मिलने वाली सुविधाएं
सैलरी के अलावा डिप्टी एसपी को जो सुविधाएं मिलती हैं, वो इस नौकरी को असल मायनों में 'शाही' बनाती हैं -
- ड्यूटी और सफर के लिए एक चमचमाती चार पहिया सरकारी गाड़ी।
- रहने के लिए एक बेहतरीन सरकारी आवास या बंगला।
- सुरक्षा के लिहाज से पर्सनल सिक्योरिटी गार्ड्स।
- घर के कामों में मदद के लिए निजी रसोइया और अन्य स्टाफ।
- फ्री टेलीफोन कनेक्शन और मुफ्त बिजली की सुविधा।
यूपी में एसडीएम (SDM) की सैलरी
पुलिस की वर्दी से हटकर अगर कोई विशुद्ध प्रशासनिक पावर चाहता है, तो उसकी पहली पसंद एसडीएम यानी 'सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट' का पद होता है। यूपी में एसडीएम की सैलरी का ढांचा भी बहुत ही आकर्षक होता है। इन्हें लेवल-10 और 5400 ग्रेड पे के तहत रखा जाता है।
- पे स्केल: 9300-34800 रुपये के अनुसार
- बेसिक सैलरी: 56,100 रुपये प्रति माह (भत्ते और कटौतियां अलग से)अधिकतम सैलरी: 1,77,500 रुपये तक जा सकती है
एसडीएम के पास पूरे उप-मंडल की जिम्मेदारी होती है। सुविधाओं के मामले में इन्हें भी उच्च श्रेणी का सरकारी आवास, सुरक्षा गार्ड, घर के लिए माली और रसोइया, एक बेहतरीन सरकारी वाहन, फ्री बिजली और टेलीफोन कनेक्शन मिलता है। इतना ही नहीं, जब एसडीएम साहब सरकारी यात्राओं पर निकलते हैं, तो उन्हें रुकने के लिए उच्च श्रेणी का सरकारी गेस्ट हाउस भी मुहैया कराया जाता है।
कैसे तय होता है किसे मिलेगा SDM या DSP का पद?
ये एक बड़ा सवाल है जो कई लोगों के जेहन में आता है। यूपी पीसीएस की परीक्षा पास करने वाले हर शख्स को एसडीएम या डिप्टी एसपी नहीं बनाया जाता। यह पूरी तरह से आपकी रैंक और उस साल मौजूद वैकेंसी के ऊपर निर्भर करता है। रैंक का खेल सबसे अहम होता है। जो टॉपर्स होते हैं, अमूमन उनकी पहली पसंद एसडीएम ही होती है, क्योंकि इसमें प्रशासन की सीधी कमान हाथ में होती है। इसके बाद नंबर आता है डिप्टी एसपी का। लेकिन कई ऐसे भी युवा होते हैं, जिनके भीतर बचपन से ही पुलिस की वर्दी पहनने का जुनून होता है। ऐसे युवा अच्छी रैंक आने के बावजूद अपनी पहली चॉइस में डिप्टी एसपी का पद भरते हैं। हालांकि, सिर्फ चॉइस से काम नहीं चलता, पुलिस विभाग के लिए एक खास शारीरिक मापदंड कि जैसे तय लंबाई और सीने की चौड़ाई भी पूरा करना पड़ता है। अगर आप मेडिकली अनफिट हैं, तो पुलिस सर्विस की जगह आपको मेरिट के आधार पर कोई दूसरा प्रशासनिक पद दे दिया जाता है। कुल मिलाकर, एक बार इस मुकाम तक पहुंचने के बाद मिलने वाली इज्जत और रुतबा सालों की तपस्या को पूरी तरह से वसूल कर देता है।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
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हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
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हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
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काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
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