UPPSC PCS : टोयोटा कंपनी की कार का नाम, राष्ट्रपति चुनाव प्रक्रिया; PCS इंटरव्यू में पूछे गए ये से सवाल

Feb 23, 2026 11:13 pm ISTHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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पीसीएस 2024 साक्षात्कार में अभ्यर्थियों से तकनीक, पर्यावरण, संविधान, इतिहास और नैतिक जिम्मेदारी पर सवाल पूछे गए। जानिए किस तरह ज्ञान के साथ सोच और ईमानदारी की भी परीक्षा ली गई।

UPPSC PCS : टोयोटा कंपनी की कार का नाम, राष्ट्रपति चुनाव प्रक्रिया; PCS इंटरव्यू में पूछे गए ये से सवाल

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में चल रहे पीसीएस 2024 साक्षात्कार के सातवें दिन सोमवार को अभ्यर्थियों की परीक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनकी समझ, जिम्मेदारी और जीवन मूल्यों को भी गहराई से परखा गया। विशेषज्ञों ने ऐसे सवाल पूछे जो यह जानने के लिए थे कि उम्मीदवार केवल पढ़े-लिखे हैं या सच में समाज और व्यवस्था को समझते भी हैं। इस दिन का साक्षात्कार खास तौर पर इसलिए चर्चा में रहा क्योंकि सवालों का दायरा बहुत व्यापक था। तकनीक से लेकर पर्यावरण, नैतिकता से लेकर संविधान, और इतिहास से लेकर व्यक्तिगत सोच तक हर पहलू को छुआ गया।

एक अभ्यर्थी जिसका शैक्षणिक पृष्ठभूमि ऑटोमोबाइल क्षेत्र से जुड़ा था, उससे सबसे पहले उद्योग जगत से जुड़े सवाल किए गए। बोर्ड ने पूछा कि ऐसी कौन-सी भारतीय कंपनी है जो भारत के बाहर भी निर्माण कार्य करती है। इस सवाल का उद्देश्य यह समझना था कि अभ्यर्थी वैश्विक स्तर पर भारतीय उद्योग की भूमिका को कितना समझता है।

विद्युत वाहनों को लेकर पूछा गया सवाल

इसके बाद चर्चा को आधुनिक परिवहन व्यवस्था की ओर मोड़ा गया। अभ्यर्थी से पूछा गया कि भारत में विद्युत वाहनों को अपनाने की गति अभी धीमी क्यों है। यहां उम्मीदवार से केवल तकनीकी जानकारी नहीं बल्कि सामाजिक, आर्थिक और ढांचागत चुनौतियों की समझ अपेक्षित थी। जैसे चार्जिंग स्टेशन की कमी, शुरुआती लागत अधिक होना, लोगों की मानसिक तैयारी और ऊर्जा स्रोतों की स्थिति जैसे पहलुओं को समझना जरूरी था। विशेषज्ञों ने यह भी पूछा कि देश में विद्युत बसों का निर्माण कौन-कौन सी कंपनियां कर रही हैं। इस तरह के सवाल यह दर्शाते हैं कि प्रशासनिक सेवा में आने वाले अधिकारी को केवल नीति नहीं बल्कि बदलती तकनीक और उसके प्रभाव का भी ज्ञान होना चाहिए।

पूछा टोयोटा कंपनी की कार का नाम

एक हल्का लेकिन परखने वाला सवाल भी पूछा गया कि आप टोयोटा की किसी एक कार का नाम बताइए। ऐसे प्रश्न अभ्यर्थी की सामान्य जागरूकता और आत्मविश्वास को जांचने के लिए होते हैं। साक्षात्कार का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा तब आया जब बोर्ड ने एक नैतिक स्थिति सामने रखी। अभ्यर्थी से कहा गया कि मान लीजिए आप एक दोपहिया वाहन कंपनी में मध्यम स्तर के अभियंता हैं और आपको पता चलता है कि कंपनी का विषैला कचरा नदी में छोड़ा जा रहा है। आपने अपने वरिष्ठ अधिकारी को इसकी जानकारी दी, लेकिन वह आपको चुप रहने की सलाह देता है और नौकरी जाने की चेतावनी देता है। अब आप क्या करेंगे।

यह सवाल प्रशासनिक सेवा की आत्मा से जुड़ा था। यहां यह देखा जाता है कि उम्मीदवार व्यक्तिगत सुरक्षा और नैतिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन कैसे बनाता है। क्या वह कानून, पर्यावरण और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएगा या दबाव में आ जाएगा। ऐसे प्रश्न यह तय करते हैं कि भविष्य का अधिकारी कठिन परिस्थितियों में कितना ईमानदार और साहसी रहेगा।

संविधान से जुड़े प्रश्न भी पूछे गए

बोर्ड ने अभ्यर्थियों के व्यक्तिगत दृष्टिकोण को जानने के लिए यह भी पूछा कि ऐसी कौन-सी चीज है जो आप अपने जीवन में कभी नहीं करना चाहेंगे। यह सवाल व्यक्ति के मूल्यों, संवेदनशीलता और आत्मचिंतन की क्षमता को समझने के लिए किया जाता है। साक्षात्कार में संविधान से जुड़े प्रश्न भी प्रमुखता से शामिल रहे। उम्मीदवारों से पूछा गया कि संविधान में लिखे गए रिपब्लिक शब्द का क्या अर्थ होता है। यहां अपेक्षा थी कि अभ्यर्थी बताए कि देश का शासन जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों के माध्यम से चलता है, न कि किसी वंशानुगत शासक के द्वारा।

मौलिक अधिकारों के बारे में भी सवाल किए गए। इन अधिकारों का उद्देश्य नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता, न्याय और गरिमा का संरक्षण देना है। यह समझ प्रशासनिक अधिकारी के लिए जरूरी है क्योंकि वही इन अधिकारों को धरातल पर लागू कराने में भूमिका निभाता है।

राष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया पर पूछे गए सवाल

राष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया के बारे में पूछकर उम्मीदवार की संवैधानिक व्यवस्था की समझ को जांचा गया। इस तरह के प्रश्न यह सुनिश्चित करते हैं कि अधिकारी केवल नियम याद न रखे बल्कि पूरी व्यवस्था की संरचना समझे। इतिहास से जुड़े प्रश्नों ने भी अभ्यर्थियों की तैयारी को परखा। पूछा गया कि दिल्ली और आगरा का लाल किला किसने बनवाया था। इसके साथ ही फतेहपुर सीकरी के बारे में जानकारी देने को कहा गया कि इसे किसने बसाया और इसका ऐतिहासिक महत्व क्या है। इस प्रकार के प्रश्न यह दर्शाते हैं कि प्रशासनिक सेवा में इतिहास की समझ भी उतनी ही जरूरी है क्योंकि वही सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन नीति से जुड़ती है।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
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- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
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