प्री पास किया, पर मेन्स की रेस से हुए बाहर; UPPSC का बड़ा ऐक्शन, LT ग्रेड के 173 अभ्यर्थियों को झटका

Himanshu Tiwari हिन्दुस्तान, प्रयागराज
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यूपीपीएससी एलटी ग्रेड संस्कृत मुख्य परीक्षा 2025 के 173 अभ्यर्थियों के आवेदन निरस्त कर दिया गया है। इसके पीछे हार्ड कॉपी न जमा करना बना बड़ा कारण बताया जा रहा है।

प्री पास किया, पर मेन्स की रेस से हुए बाहर; UPPSC का बड़ा ऐक्शन, LT ग्रेड के 173 अभ्यर्थियों को झटका

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को एक बड़ा झटका दिया है। सहायक अध्यापक (LT Grade), प्रशिक्षित स्नातक श्रेणी (पुरुष/महिला शाखा) परीक्षा 2025 के तहत संस्कृत विषय की मुख्य परीक्षा की दौड़ से 173 अभ्यर्थी बाहर हो गए हैं। आयोग ने आवेदन पत्रों की बारीकी से जांच करने के बाद इन अभ्यर्थियों का अभ्यर्थन तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है।

आयोग के इस कड़े कदम के पीछे सबसे बड़ी वजह लापरवाही और अनिवार्य दस्तावेजों की कमी बताई जा रही है। ऐसे अभ्यर्थी जो प्रारंभिक परीक्षा की बाधा पार कर मुख्य परीक्षा के करीब पहुंचे थे, अब उनके भविष्य पर तलवार लटक गई है।

आखिर क्यों रद्द हुए इतने आवेदन?

आयोग के अनुसचिव शैलेंद्र सिंह द्वारा जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, निरस्तीकरण के पीछे कई तकनीकी और शैक्षणिक कारण हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा मार उन अभ्यर्थियों पर पड़ी है जिन्होंने ऑनलाइन आवेदन तो कर दिया था, लेकिन उसकी हार्ड कॉपी और जरूरी दस्तावेज आयोग तक नहीं पहुंचाए।

हार्ड कॉपी जमा न करना: कुल 113 अभ्यर्थी ऐसे पाए गए जिन्होंने मुख्य परीक्षा के ऑनलाइन आवेदन की हार्ड कॉपी और अपने तमाम शैक्षिक प्रमाण पत्र निर्धारित अंतिम तिथि यानी 18 मार्च तक आयोग के कार्यालय में जमा नहीं कराए।

अनिवार्य योग्यता का अभाव: कई अभ्यर्थी प्रारंभिक परीक्षा में तो सफल रहे, लेकिन जब मुख्य परीक्षा के लिए उनकी योग्यता जांची गई, तो वे संस्कृत पद के लिए निर्धारित 'अनिवार्य शैक्षिक अर्हता' पूरी नहीं कर सके।

प्रमाण पत्रों की कमी: 19 अभ्यर्थियों ने ऑनलाइन फॉर्म भरते समय आरक्षण का दावा तो किया था, लेकिन जब दस्तावेज पेश करने की बारी आई, तो वे संबंधित श्रेणी का सर्टिफिकेट देने में नाकाम रहे।

अन्य मानवीय त्रुटियां: आवेदन निरस्त होने की सूची में वे अभ्यर्थी भी शामिल हैं जिन्होंने फॉर्म में गलत जन्मतिथि भर दी थी, या फिर लिंग संबंधी गलती (जैसे महिला अभ्यर्थी द्वारा पुरुष संवर्ग में आवेदन) कर बैठे थे। इसके अलावा दिव्यांग श्रेणी में उपश्रेणी के मिलान न होने के चलते भी आवेदन खारिज किए गए हैं।

आयोग ने दिया अंतिम मौका

भले ही आयोग ने इन अभ्यर्थियों का आवेदन अभी निरस्त कर दिया है, लेकिन उनके पास खुद को सही साबित करने का एक आखिरी मौका अब भी बचा है। आयोग ने एक खिड़की खोलते हुए कहा है कि जो अभ्यर्थी इस फैसले से असहमत हैं और जिनके पास अपनी पात्रता के ठोस सबूत हैं, वे अपनी अपील दे सकते हैं।

प्रभावित अभ्यर्थियों को 17 अप्रैल 2026 की शाम 5 बजे तक सचिव, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, प्रयागराज के कार्यालय में अपना पक्ष रखना होगा। अभ्यर्थी या तो व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर या फिर पंजीकृत डाक के जरिए अपनी बात कह सकते हैं। ध्यान रहे कि 17 अप्रैल की समय सीमा बीतने के बाद किसी भी प्रार्थना पत्र पर विचार नहीं किया जाएगा और उनका अभ्यर्थन स्थायी रूप से निरस्त मान लिया जाएगा।

अभ्यर्थियों के लिए बड़ी सीख

प्रतियोगी परीक्षाओं के जानकारों का कहना है कि अक्सर छात्र पढ़ाई में तो दिन रात एक कर देते हैं, लेकिन फॉर्म भरने और डॉक्यूमेंटेशन की प्रक्रिया को हल्के में लेते हैं। एलटी ग्रेड संस्कृत परीक्षा का यह मामला उन हजारों छात्रों के लिए एक सबक है जो मुख्य परीक्षा के द्वार पर पहुंचकर सिर्फ एक कागजी गलती की वजह से बाहर हो गए हैं। आयोग अब मुख्य परीक्षा की तैयारी को अंतिम रूप दे रहा है, ऐसे में इन 173 पदों या अभ्यर्थियों के भविष्य का फैसला अब 17 अप्रैल के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

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