दिन में काम, रात में पढ़ाई... 8 साल बाद उठाई किताबें और UPPCS में ले आए 39वीं रैंक

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मेरठ के हस्तिनापुर गांव से निकले अजीत सिंह ने फुल टाइम इंजीनियरिंग नौकरी के साथ तैयारी करते हुए UPPCS 2026 में 39वीं रैंक हासिल की।

दिन में काम, रात में पढ़ाई... 8 साल बाद उठाई किताबें और UPPCS में ले आए 39वीं रैंक

मेरठ के हस्तिनापुर के एक छोटे से गांव में पले-बढ़े अजीत सिंह की कहानी उन लाखों युवाओं से अलग है जो बड़े शहरों या कोचिंग हब से निकलकर प्रशासनिक सेवाओं तक पहुंचते हैं। अजीत ने बचपन से गांव की मुश्किलें बहुत करीब से देखीं। कहीं टूटी सड़कें, कहीं पानी की परेशानी, तो कहीं सरकारी योजनाओं का सही तरीके से जमीन तक न पहुंच पाना। यही वजह थी कि उनके मन में बहुत जल्दी यह सवाल पैदा हो गया कि आखिर गांवों की जिंदगी बेहतर क्यों नहीं हो पाती। धीरे-धीरे यही सवाल उनके भीतर बदलाव की चाह में बदल गया। अजीत समझ चुके थे कि सिर्फ योजनाएं बना देना काफी नहीं होता, असली फर्क तब पड़ता है जब उन्हें सही तरीके से लागू किया जाए।

IIT Roorkee का मौका छोड़ा, फिर भी नहीं टूटा हौसला

अजीत ने मेरठ में पढ़ाई पूरी की और आगे इंजीनियरिंग के रास्ते पर बढ़े। उन्होंने GATE परीक्षा पास की और आईआईटी रुड़की में दाखिला भी मिल गया। लेकिन यहीं उन्होंने ऐसा फैसला लिया जिसे सुनकर कई लोग हैरान रह गए। उन्होंने आईआईटी की पढ़ाई छोड़कर UPSC इंजीनियरिंग सर्विसेज यानी ESE की तैयारी करने का फैसला किया। साल 2016 में वे इंटरव्यू तक भी पहुंचे, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो पाया। बहुत से लोग यहां हार मान लेते, लेकिन अजीत ने इस असफलता को अंत नहीं बनने दिया। उसी साल उन्हें UPPCL में असिस्टेंट इंजीनियर (सिविल) की नौकरी मिल गई। नौकरी शुरू हुई, जिम्मेदारियां बढ़ीं और समय के साथ उन्हें प्रमोशन भी मिला। वे एग्जीक्यूटिव इंजीनियर बन गए, लेकिन भीतर कहीं प्रशासनिक सेवा का सपना अब भी जिंदा था।

नौकरी करते हुए महसूस हुई बड़ी जिम्मेदारी की चाह

इंजीनियरिंग की नौकरी ने अजीत को तकनीकी अनुभव तो दिया, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें महसूस होने लगा कि वे सिर्फ सीमित स्तर पर बदलाव ला पा रहे हैं। उन्हें एहसास हुआ कि प्रशासनिक सेवा में जाकर वे ज्यादा बड़े स्तर पर लोगों की जिंदगी को प्रभावित कर सकते हैं। यही सोच उनके भीतर लगातार चलती रही और आखिरकार उन्होंने एक बड़ा फैसला लिया। करीब 8 साल नौकरी करने के बाद उन्होंने फिर से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी।

8 साल बाद फिर किताबों की तरफ लौटना आसान नहीं था

कई साल नौकरी करने के बाद दोबारा पढ़ाई शुरू करना आसान नहीं होता। उम्र का दबाव, समाज की बातें, नौकरी की थकान और सीमित समय, सब कुछ एक साथ सामने खड़ा होता है। लेकिन अजीत ने हार मानने के बजाय अपने तरीके बदल दिए। उन्होंने समय की कमी को बहाना नहीं बनने दिया। ऑफिस आने-जाने के दौरान कार में लेक्चर देखते, नोट्स रिवाइज करते और हर छोटे खाली वक्त का इस्तेमाल पढ़ाई में करते। वे घंटों पढ़ने के बजाय रोज थोड़ा-थोड़ा लगातार पढ़ने पर भरोसा करते थे। उनका मानना था कि तैयारी में सबसे जरूरी चीज निरंतरता होती है।

UPSC में झटका लगा, फिर UPPSC पर किया फोकस

साल 2023 में अजीत ने UPSC प्रीलिम्स पास कर लिया था, लेकिन मेंस में सफलता नहीं मिली। यह एक बड़ा झटका था, लेकिन उन्होंने खुद को टूटने नहीं दिया। उन्होंने अपनी तैयारी का तरीका दोबारा समझा और रणनीति बदलते हुए UPPSC पर फोकस कर दिया। यही फैसला आगे चलकर उनकी जिंदगी बदलने वाला साबित हुआ।

रिजल्ट आया तो दोस्त ने भेजा स्क्रीनशॉट

जब UPPCS 2026 का रिजल्ट आया, तब सबसे पहले अजीत ने खुद अपना रिजल्ट नहीं देखा। उनके दोस्त ने स्क्रीनशॉट भेजकर बताया कि उनका चयन बीडीओ पद पर हुआ है। 39वीं रैंक हासिल करना उनके लिए सिर्फ एक परीक्षा पास करना नहीं था, बल्कि कई साल की मेहनत, धैर्य और संघर्ष का नतीजा था। हालांकि उनके मन में डिप्टी कलेक्टर बनने की इच्छा भी थी, लेकिन सूची में अपना नाम देखकर उन्हें बड़ी राहत और खुशी मिली।

मां ने समाज के दबाव से बचाकर रखा फोकस

अजीत की सफलता में उनके परिवार का भी बड़ा योगदान रहा। खासकर उनकी मां ने हर मुश्किल वक्त में उनका साथ दिया। जब 32 साल की उम्र में रिश्तेदार शादी को लेकर दबाव बनाने लगे, तब उनकी मां ने साफ कहा कि पहले परीक्षा पर ध्यान दो, शादी जिंदगी का हिस्सा है, मंजिल नहीं। यही समर्थन अजीत के लिए मानसिक ताकत बना और वे बिना भटके अपने लक्ष्य पर टिके रहे। सिविल इंजीनियरिंग बैकग्राउंड होने की वजह से अजीत को जमीनी विकास कार्यों की अच्छी समझ है। अब प्रशासनिक अधिकारी बनने के बाद वे गांवों में सड़क, नाली और दूसरी बुनियादी सुविधाओं के काम को बेहतर तरीके से लागू करना चाहते हैं। उनका मानना है कि विकास सिर्फ कागजों में नहीं दिखना चाहिए, बल्कि गांव के आम आदमी की जिंदगी में महसूस होना चाहिए।

नौकरी करने वाले युवाओं के लिए बड़ी सीख

अजीत सिंह की कहानी उन युवाओं के लिए खास है जो नौकरी या जिम्मेदारियों के कारण अपने सपनों को छोड़ देते हैं। उन्होंने साबित किया कि सफलता के लिए हमेशा आदर्श माहौल जरूरी नहीं होता। अगर लक्ष्य साफ हो, मेहनत लगातार हो और समय का सही इस्तेमाल किया जाए, तो सीमित परिस्थितियों में भी बड़ी कामयाबी हासिल की जा सकती है।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
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