UP TET Result 2026: 17 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी, कब तक आ सकेंगे यूपी टीईटी के नतीजे; फुल स्पीड में आयोग

यूपी-टीईटी में शामिल सत्रह लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों का इंतजार जुलाई अंत तक खत्म हो जाएगा क्योंकि शिक्षा चयन आयोग ओएमआर का मूल्यांकन बहुत ही तेजी से पूरा कर रहा है।

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सरकारी मास्टर बनने का सपना आंखों में सजाए बैठे उत्तर प्रदेश के लाखों युवाओं के लिए एक बेहद काम की खबर सामने आ रही है। जुलाई की चिलचिलाती गर्मी और उमस के बीच, यूपी-टीईटी (UP-TET) परीक्षा के नतीजों को लेकर एक ठंडी हवा का झोंका आया है। अगर आपने भी इस बार उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा दी है और हर दिन इंटरनेट पर रिजल्ट की तारीखें खंगाल रहे हैं, तो अब आपका यह लंबा इंतजार खत्म होने की कगार पर है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग इन दिनों पूरी स्पीड में काम कर रहा है। जानकारी के मुताबिक, सब कुछ अगर तय प्लानिंग के हिसाब से चला, तो इसी महीने यानी जुलाई के आखिर तक 17 लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों की किस्मत का फैसला हो जाएगा।

आयोग के दफ्तरों में इन दिनों फाइलों और ओएमआर (OMR) शीट के बंडलों के बीच गजब की हलचल है। परीक्षा खत्म होने के बाद से ही कॉपियों को जांचने का काम किसी एक्सप्रेस ट्रेन की रफ्तार से चल रहा है। प्रयागराज स्थित मुख्य कार्यालय से मिल रही जानकारी के अनुसार, शिक्षा सेवा चयन आयोग ने अपनी टीम को साफ निर्देश दिए हैं कि 20 जुलाई तक हर हाल में ओएमआर शीट का मूल्यांकन पूरा कर लिया जाए। यह कोई छोटा-मोटा काम नहीं है, क्योंकि इसमें लाखों की संख्या में कॉपियां जांची जानी हैं। लेकिन आयोग की फुर्ती देखकर यही लग रहा है कि वे समय पर अपना टारगेट पूरा कर लेंगे। ओएमआर शीट की चेकिंग पूरी होते ही, बस एक हफ्ते के भीतर फाइनल रिजल्ट तैयार करने की रणनीति बनाई गई है।

सवालों पर दर्ज कराई गई आपत्ति

हालांकि, रिजल्ट तैयार करने की इस राह में कुछ रोड़े भी हैं, जिन्हें आयोग को पार करना है। दरअसल, 8 जुलाई को जब यूपी-टीईटी की प्रोविजनल (अनंतिम) आंसर की यानी उत्तरकुंजी जारी की गई, तो कई सवालों के जवाबों को लेकर बवाल मच गया। उम्मीदवार सिर्फ चुपचाप बैठकर नतीजे का इंतजार नहीं कर रहे हैं, बल्कि उन्होंने कई सवालों पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। सबसे ज्यादा पेंच फंसा है गणित के पेपर में। 3 जुलाई को पहली शिफ्ट में जो उच्च प्राथमिक स्तर का इम्तिहान हुआ था, उसमें गणित के अकेले आठ सवालों के जवाबों को लेकर उम्मीदवारों ने मोर्चा खोल दिया है।

एनसीईआरटी की किताबों के दिए गए पक्के सबूत

हैरानी की बात तो यह है कि अपनी आपत्तियों को सही साबित करने के लिए अभ्यर्थियों ने बाकायदा एनसीईआरटी की किताबों के पक्के सबूत भी आयोग को भेजे हैं। उनका कहना है कि जब देश की सबसे प्रामाणिक किताबों में जवाब कुछ और दिया गया है, तो आंसर की में गलती कैसे हो सकती है? सिर्फ गणित ही नहीं, बल्कि संस्कृत और हिंदी जैसे अहम विषयों में भी कई सवालों और उनके जवाबों पर उंगलियां उठी हैं।

अब सवाल उठता है कि इन आपत्तियों का क्या होगा? क्या इससे रिजल्ट में और देरी होगी? आयोग के जानकारों की मानें तो घबराने की कोई जरूरत नहीं है। ओएमआर शीट की चेकिंग के साथ-साथ इन आपत्तियों को सुलझाने का काम भी समानांतर तरीके से चल रहा है। आयोग ने विषय विशेषज्ञों की एक खास कमेटी बनाई है। यह कमेटी उम्मीदवारों द्वारा भेजे गए साक्ष्यों, खासकर एनसीईआरटी के सबूतों की बारीकी से जांच कर रही है। जैसे ही एक्सपर्ट्स इन आपत्तियों का निपटारा कर लेंगे, उसके तुरंत बाद फाइनल आंसर की और फिर आपका फाइनल रिजल्ट तैयार कर लिया जाएगा।

लाखों छात्रों ने कराया था रजिस्ट्रेशन

आइए अब जरा इस परीक्षा के विशाल पैमाने पर भी एक नजर डाल लेते हैं। यूपी-टीईटी का आयोजन हमेशा से ही बड़े स्तर पर होता रहा है। इस बार 2, 3 और 4 जुलाई को अलग-अलग शिफ्टों में परीक्षा कराई गई थी। उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6 से 8 तक) की परीक्षा 2 जुलाई की दोनों शिफ्टों और 3 जुलाई की पहली शिफ्ट में आयोजित हुई थी। इसमें रजिस्ट्रेशन कराने वाले 12,11,459 उम्मीदवारों में से 10,57,055 यानी करीब 87.25 फीसदी लोगों ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

वहीं, प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5 तक) के लिए 3 जुलाई की दूसरी शिफ्ट और 4 जुलाई की पहली शिफ्ट में परीक्षा संपन्न हुई थी। इसके लिए कुल 7,83,202 अभ्यर्थियों ने फॉर्म भरा था, जिनमें से 7,13,659 (लगभग 91.12%) उम्मीदवार परीक्षा देने पहुंचे। कुल मिलाकर देखा जाए तो इस बार प्राथमिक और उच्च प्राथमिक दोनों स्तरों को मिलाकर कुल 17,70,714 उम्मीदवार अपने नतीजों की बेसब्री से बाट जोह रहे हैं।

अब बस कुछ ही दिनों की बात और है। आयोग अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहा है कि किसी भी तरह की तकनीकी या प्रशासनिक अड़चन न आए। अगर आपत्तियां समय पर सुलझ गईं और ओएमआर चेकिंग 20 जुलाई के लक्ष्य तक पूरी हो गई, तो यकीनन जुलाई का आखिरी हफ्ता लाखों परिवारों में खुशियां लेकर आएगा। तब तक उम्मीदवारों को यही सलाह दी जाती है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और अपडेट्स के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए रखें।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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