UP TET 2026: एक से ज्यादा शादी की तो नहीं भर सकेंगे फॉर्म, जानें आवेदन के ये नियम
UP TET 2026: उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने यूपी टीईटी 2026 के लिए अहम गाइडलाइन जारी की है, जिसके तहत एक से ज्यादा शादी करने वाले उम्मीदवार परीक्षा फॉर्म नहीं भर सकेंगे।

UP TET 2026: अगर आप भी उत्तर प्रदेश में सरकारी टीचर बनने का ख्वाब देख रहे हैं और यूपी टीईटी (UP TET 2026) परीक्षा का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, तो आपके लिए एक बेहद अहम और जरूरी खबर है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) पूरे पांच साल के लंबे इंतजार के बाद शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए 27 मार्च 2026 से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। हाल ही में जारी हुए नोटिफिकेशन के मुताबिक, इस बार प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर होने जा रही इस बड़ी परीक्षा में 20 लाख से भी ज्यादा उम्मीदवारों और पहले से सेवा दे रहे शिक्षकों के शामिल होने की पूरी उम्मीद है। लेकिन आवेदन शुरू होने से ठीक पहले, आयोग ने कुछ ऐसे सख्त नियम और गाइडलाइन जारी की हैं, जिन्हें जानना हर उम्मीदवार के लिए बेहद जरूरी है खासकर उन लोगों के लिए जो शादीशुदा हैं।
UP TET 2026: एक से ज्यादा शादी पर पाबंदी का नियम
आयोग की तरफ से जारी की गई आधिकारिक गाइडलाइन में सबसे ज्यादा चर्चा उस नियम की हो रही है जो शादीशुदा उम्मीदवारों से जुड़ा है। नोटिफिकेशन में बिल्कुल साफ कर दिया गया है कि ऐसे पुरुष अभ्यर्थी जो विवाहित हैं और जिनकी एक से ज्यादा पत्नियां जीवित हैं, वे इस परीक्षा का फॉर्म भरने के लिए पात्र नहीं माने जाएंगे।
यह नियम सिर्फ पुरुषों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के लिए भी उतना ही सख्त है। ऐसी महिला उम्मीदवार, जिसने किसी ऐसे पुरुष से शादी की है जिसकी पहले से ही एक पत्नी जीवित है, उन्हें भी इस परीक्षा से बाहर रखा जाएगा। सीधे शब्दों में कहें तो बहुविवाह (Polygamy) करने वाले उम्मीदवारों को यूपी टीईटी की रेस से सीधे तौर पर बाहर कर दिया गया है। पुरुष और महिला, दोनों ही वर्गों के लिए यह नियम एक समान लागू होगा।
UP TET 2026: क्या इस नियम में मिल सकती है कोई छूट?
हर कड़े नियम की तरह इस नियम में भी एक छोटी सी गुंजाइश छोड़ी गई है। आयोग के मुताबिक, अगर किसी विशेष मामले में राज्य के राज्यपाल महोदय खुद इस प्रतिबंध से किसी उम्मीदवार को खास छूट या मुक्ति दे देते हैं, तो केवल उसी सूरत में ऐसे उम्मीदवार यूपी टीईटी की परीक्षा में शामिल होने के हकदार बन सकेंगे। इसके अलावा किसी भी स्तर पर इस नियम में कोई ढील नहीं दी जाएगी।
परीक्षा में बैठने का मतलब नौकरी की गारंटी नहीं
आयोग ने उम्मीदवारों को एक और बात को लेकर आगाह किया है। गाइडलाइन में साफ लिखा है कि अगर किसी उम्मीदवार को यूपी टीईटी में बैठने की इजाजत मिल जाती है और उसका एडमिट कार्ड जारी हो जाता है, तो इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि उसकी पात्रता पूरी तरह से प्रमाणित हो गई है। टीईटी पास करने से किसी भी उम्मीदवार को नियुक्ति का कोई सीधा कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता।
नौकरी के समय भर्ती एजेंसी या नियोक्ता प्राधिकारी द्वारा ही उम्मीदवार की सभी योग्यताओं और दस्तावेजों को अंतिम रूप से जांचा और प्रमाणित किया जाएगा। इसलिए यह हर उम्मीदवार की अपनी जिम्मेदारी है कि वह फॉर्म भरने से पहले आयोग द्वारा तय किए गए योग्यता मानदंडों को अच्छी तरह से पढ़ ले और खुद को संतुष्ट कर ले।
गलत जानकारी देने पर हो सकती है जेल
अगर कोई उम्मीदवार नियमों के दायरे में नहीं आता है और फिर भी चालाकी से फॉर्म भर देता है, तो इसके लिए वह खुद जिम्मेदार होगा। आयोग ने सख्त हिदायत दी है कि आवेदन में किसी भी तरह की भ्रामक, गलत या झूठी जानकारी देने पर उम्मीदवार का परीक्षा परिणाम तुरंत रद्द कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं, उसका टीईटी प्रमाण पत्र जब्त कर लिया जाएगा और ऐसे गंभीर मामलों में उम्मीदवार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई या मुकदमा भी चलाया जा सकता है।
ओएमआर शीट की दोबारा नहीं होगी चेकिंग
परीक्षा देने के बाद अक्सर कई उम्मीदवारों को अपनी कॉपी दोबारा चेक कराने की इच्छा होती है। इस मुद्दे पर आयोग के उपसचिव डॉ. संजय कुमार सिंह ने स्थिति बिल्कुल साफ कर दी है। उन्होंने बताया कि परीक्षा की ओएमआर शीट का मूल्यांकन अत्याधुनिक मशीनों (इलेक्ट्रॉनिक संसाधनों) के जरिए पूरी सावधानी से किया जाता है। इसकी स्कैनिंग में इतनी सटीकता होती है कि बार बार संवीक्षा की जरूरत ही नहीं पड़ती। इसलिए, किसी भी उम्मीदवार के ओएमआर उत्तर पत्रक की दोबारा जांच, पुनर्मूल्यांकन या स्क्रूटनी के लिए किए गए किसी भी आवेदन पर बिल्कुल विचार नहीं किया जाएगा। इस संबंध में आयोग किसी भी तरह का पत्राचार स्वीकार नहीं करेगा।
कब से कब तक भरे जाएंगे फॉर्म?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यूपी टीईटी के लिए ऑनलाइन आवेदन 27 मार्च 2026 से शुरू होकर 26 अप्रैल 2026 तक चलेंगे। वहीं, आयोग ने इस बार की परीक्षाएं 2, 3 और 4 जुलाई 2026 को आयोजित करने का फैसला किया है। इसलिए, अगर आप सभी योग्यताओं को पूरा करते हैं, तो आखिरी तारीख का इंतजार किए बिना समय रहते अपना फॉर्म सही सही जरूर भर लें।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
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हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
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काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
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