UP Police Constable: मेरिट में नहीं आया नाम? न छोड़ें उम्मीद, फिजिकल टेस्ट के लिए बोर्ड की शर्त कर देगी खुश

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यूपी पुलिस कांस्टेबल रिजल्ट की मेरिट में नाम न आने वाले युवा निराश न हों क्योंकि सीटें खाली रहने पर बोर्ड फिजिकल के लिए दूसरी लिस्ट जारी कर सकता है।

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फिजिकल टेस्ट

UP Police Constable: सरकारी नौकरी का सपना देखने वाले हर युवा के लिए रिजल्ट का दिन किसी बड़े त्योहार या फिर मातम से कम नहीं होता। यूपी पुलिस कांस्टेबल का हालिया रिजल्ट भी कुछ ऐसा ही रहा, जिसने कइयों के घरों में खुशियों के चिराग जला दिए तो ढेरों चेहरों पर गहरी मायूसी भी ला दी। इस बार कटऑफ इतनी आसमान छूती हुई गई है कि अच्छे-खासे धुरंधर बच्चे, जो रात-दिन किताबों में सिर खपा रहे थे... वे भी पहली लिस्ट में अपनी जगह बनाने से चूक गए। लेकिन यहां ध्यान देने की बहुत जरूरत है... अगर आपका नाम भी इस लिस्ट में नहीं है और आप उदास होकर एक कोने में बैठ गए हैं, तो आपके लिए एक बेहद सुकून देने वाली खबर है। भर्ती बोर्ड की एक खास शर्त उन तमाम युवाओं के लिए एक नई उम्मीद की किरण लेकर आई है, जो महज कुछ पॉइंट या एकाध नंबर से पीछे रह गए हैं। आइए जानते हैं कि बोर्ड यूपी पुलिस भर्ती बोर्ड की आखिर वह शर्त क्या है और कैसे आपकी किस्मत का बंद दरवाजा दोबारा खुल सकता है।

वैकेंसी के मुकाबले 2.33 को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए बुलाया

दरअसल, यूपी पुलिस कांस्टेबल के इस रिजल्ट में 32 हजार से ज्यादा पदों के लिए फिलहाल लगभग 76,184 बच्चों को ही शॉर्टलिस्ट किया गया है। अगर हम इसका सीधा सा गणित निकालें, तो बोर्ड ने कुल वैकेंसी के मुकाबले सिर्फ 2.33 गुना बच्चों को ही डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन (डीवी) और फिजिकल टेस्ट के लिए बुलावा भेजा है। मेरिट का हाल तो आप देख ही चुके हैं, जनरल कैटेगरी की कटऑफ 258 के पार है, और बाकी वर्गों की मेरिट भी कुछ कम हाई-फाई नहीं है। अब यहीं से असली खेल शुरू होता है। इतनी तगड़ी कटऑफ का सीधा सा मतलब यह है कि जिन बच्चों ने लिस्ट में बाजी मारी है, उनका पढ़ाई का स्तर बहुत आला दर्जे का है। पर यह बात किसी से छिपी नहीं है कि जो बच्चे दिन-रात कुर्सी पर बैठकर माथापच्ची करते हैं, उनके लिए 25 मिनट में 4.8 किलोमीटर की दौड़ लगाना कोई बच्चों का खेल नहीं होता। ग्राउंड पर पसीना बहाने में अक्सर बड़े-बड़े किताबी कीड़े गच्चा खा जाते हैं।

बोर्ड ने क्या रखी शर्त

इसी जमीनी हकीकत को ध्यान में रखते हुए भर्ती बोर्ड ने एक बहुत ही समझदारी भरा फैसला लिया है। बोर्ड ने साफ कर दिया है कि वह फिलहाल इन 76 हजार से ज्यादा बच्चों को फिजिकल के लिए बुला रहा है, लेकिन अगर ये बच्चे तय मानकों को पूरा नहीं कर पाते हैं, तो निराश होने की कोई जरूरत नहीं है। अगर दौड़ में ज्यादा बच्चे फेल हो जाते हैं और कुल वैकेंसी के बराबर सीटें नहीं भर पाती हैं, तो बोर्ड एक और लिस्ट जारी करेगा। भर्ती बोर्ड दोबारा से शारीरिक परीक्षा और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए नई लिस्ट निकालकर कटऑफ को नीचे करेगा और उन बच्चों को मौका देगा जो इस बार मामूली अंतर से बाहर हो गए हैं। यह कोई नई बात नहीं है, पिछली कई पुलिस भर्तियों में ऐसा देखने को मिल चुका है कि फिजिकल में बड़े पैमाने पर बच्चों के फेल होने के बाद बोर्ड को मेरिट गिरानी पड़ी थी।

इसलिए, अगर आप एक या दो नंबरों से इस मेरिट से बाहर हुए हैं तो अपनी दौड़ और फिटनेस की प्रैक्टिस को कतई मत छोड़िए। सुबह-शाम ग्राउंड जाना जारी रखिए। क्या पता, कब बोर्ड का नया फरमान आ जाए और आपको अचानक से बुलावा आ जाए। अगर आप पहले से तैयार नहीं रहेंगे तो अचानक मिले इस सुनहरे मौके को भी हाथ से गंवा बैठेंगे। सफलता असल में उन्हीं को मिलती है जो आखिरी दम तक मैदान में डटे रहते हैं।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
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- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव

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