बस अड्डे, रेलवे स्टेशन पर भीड़, यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा में उमड़े अभ्यर्थी; 32 हजार पदों पर है लड़ाई
यूपी पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा 2026 के पहले दिन अभ्यर्थियों की भीड़ देखने को मिली। परीक्षा के तहत 1183 केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा, लाइव मॉनिटरिंग और विशेष ट्रेनें चलाई जा रही हैं।

उत्तर प्रदेश में पुलिस की वर्दी पहनने का सपना देख रहे लाखों युवाओं के लिए सोमवार का दिन बेहद अहम रहा। आरक्षी नागरिक पुलिस एवं समकक्ष पदों के लिए आयोजित लिखित सिपाही भर्ती परीक्षा की शुरुआत के साथ ही प्रदेश भर में परीक्षा का माहौल दिखाई दिया। रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और परीक्षा केंद्रों के बाहर सुबह से ही अभ्यर्थियों की लंबी कतारें नजर आईं। गौरतलब है कि यह भर्ती परीक्षा 8, 9 और 10 जून को आयोजित की जा रही है। पूरे प्रदेश में 1183 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। तीन दिनों में कुल छह पालियों में परीक्षा संपन्न होगी। हर दिन दो पालियों में परीक्षा कराई जा रही है। गौरतलब है कि परीक्षा केंद्र से छूटते अभ्यर्थियों की घर जाने की चेष्टा में बसों और ट्रेनों में धक्का-मुक्की देखने को मिली।
बता दें पहली पाली सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक निर्धारित की गई है। एक पाली में करीब 4.81 लाख अभ्यर्थियों के शामिल होने का अनुमान लगाया गया है। कुल मिलाकर 28 लाख से अधिक युवा इस भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा बन रहे हैं। भर्ती अभियान के जरिए 32 हजार से अधिक पदों को भरा जाना है।
नकल माफियाओं पर सख्त नजर
इस बार परीक्षा को पूरी तरह पारदर्शी और नकलमुक्त बनाने के लिए प्रशासन ने असाधारण इंतजाम किए हैं। पेपर लीक, सॉल्वर गैंग और तकनीकी गड़बड़ियों को रोकने के लिए परीक्षा केंद्रों के भीतर और बाहर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं। सीसीटीवी कैमरों, वीडियोग्राफी, लाइव मॉनिटरिंग और बॉडी वॉर्न कैमरों की मदद से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रश्नपत्रों और ओएमआर शीट के परिवहन से लेकर जमा होने तक पूरी प्रक्रिया को गोपनीय रखा जाए।
केंद्रों में क्या-क्या रहा प्रतिबंधित
अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश से पहले सघन जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। मोबाइल फोन, ब्लूटूथ डिवाइस, स्मार्ट वॉच, डिजिटल पेन, पेन ड्राइव, कैलकुलेटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पूरी तरह रोक रही। इसके अलावा वॉलेट, पेंसिल बॉक्स, आभूषण, चाबी, टोपी और खाने-पीने की वस्तुएं भी परीक्षा कक्ष में ले जाने की अनुमति नहीं दी गई। सुरक्षा कर्मियों ने हर केंद्र पर प्रवेश व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती।
रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर उमड़ा परीक्षार्थियों का सैलाब
परीक्षा शुरू होने से पहले रविवार शाम से ही प्रदेश के कई रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर भारी भीड़ देखने को मिली। दूर-दराज जिलों से आने वाले अभ्यर्थी समय से पहले अपने परीक्षा शहरों में पहुंचने लगे थे। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए रेलवे सुरक्षा बल और जीआरपी की अतिरिक्त टीमें तैनात की गईं। कई स्थानों पर यातायात व्यवस्था को भी विशेष रूप से मॉनिटर किया गया ताकि परीक्षार्थियों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
अभ्यर्थियों के लिए चलाई गईं विशेष ट्रेनें
परीक्षार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेलवे प्रशासन ने परीक्षा विशेष ट्रेनों का संचालन भी शुरू किया। वाराणसी, बलिया, मऊ, देवरिया और गोरखपुर रूट पर विशेष ट्रेनों की व्यवस्था की गई ताकि बड़ी संख्या में आने-जाने वाले उम्मीदवारों को राहत मिल सके। रेलवे और स्थानीय प्रशासन लगातार स्टेशन परिसरों, प्लेटफॉर्म और बाहर की भीड़ पर नजर बनाए हुए हैं। साथ ही जाम की स्थिति, परिवहन व्यवस्था और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने वाले मार्गों की भी निगरानी की जा रही है।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
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