व्यावसायिक शिक्षा पर रहता है जोर, छात्रों ने नहीं दिखाई दिलचस्पी; यूपी बोर्ड के आंकड़ों ने चौंकाया
UP Board Result 2026 : व्यावसायिक शिक्षा को लेकर सरकार और शिक्षा विभाग जितनी कोशिश कर रहे हैं, उतनी ही दूरी छात्र बनाए हुए हैं।

UP Board Result 2026 : यूपी बोर्ड में इस बार एक अजीब तस्वीर सामने आई है। जिन व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को भविष्य की जरूरत माना जा रहा है, उनमें छात्रों ने लगभग कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। इंटरमीडिएट के 15 और हाईस्कूल के 4 ऐसे कोर्स रहे, जिनमें एक भी छात्र ने दाखिला नहीं लिया। लाखों छात्रों के बीच यह सन्नाटा कई बड़े सवाल खड़े करता है।
प्रयागराज से सामने आए बोर्ड परीक्षा 2026 के आंकड़े बताते हैं कि व्यावसायिक शिक्षा को लेकर सरकार और शिक्षा विभाग जितनी कोशिश कर रहे हैं, उतनी ही दूरी छात्र बनाए हुए हैं। इंटरमीडिएट में जहां कुल 25 लाख से ज्यादा छात्र पंजीकृत थे, वहीं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में संख्या बेहद कम रही। कई ऐसे कोर्स हैं जिनमें एक भी छात्र नहीं पहुंचा।
सामने आया चौंकाने वाला आंकड़ा
अगर कुछ कोर्सों की बात करें तो डेरी प्रौद्योगिकी में 33, मधुमक्खी पालन में 16, इम्ब्रायडरी में 15 और अंग्रेजी आशुलिपि एवं टंकण में 14 छात्र ही नजर आए। वहीं रेशमकीट पालन, फसल सुरक्षा सेवा और बीजोत्पादन जैसे कोर्सों में भी गिने-चुने दाखिले हुए। दूसरी तरफ सामान्य आधारिक विषय, परिधान रचना एवं सज्जा और हिन्दी आशुलिपि जैसे कुछ कोर्स ऐसे रहे, जहां संख्या थोड़ी बेहतर दिखी, लेकिन कुल आंकड़ों के मुकाबले यह भी बहुत कम है।
सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह है कि इंटर के 15 व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में एक भी छात्र नहीं मिला। इनमें मोबाइल रिपेयरिंग, आईटी सेवाएं, पर्यटन, हेल्थ केयर और घरेलू उपकरणों की मरम्मत जैसे ऐसे कोर्स शामिल हैं, जिन्हें सीधे रोजगार से जोड़ा जाता है। हाईस्कूल में भी इलेक्ट्रिशियन, सोलर सिस्टम रिपेयरिंग और आपदा प्रबंधन जैसे चार कोर्स पूरी तरह खाली रहे।
यह हालात साफ इशारा करते हैं कि या तो छात्रों को इन कोर्सों की अहमियत समझ नहीं आ रही, या फिर उन्हें लगता है कि पारंपरिक पढ़ाई ही ज्यादा सुरक्षित रास्ता है। कई मामलों में अभिभावक भी बच्चों को ऐसे कोर्स चुनने से रोकते हैं, क्योंकि वे नौकरी को केवल डिग्री से जोड़कर देखते हैं।
स्कूल स्तर पर भी कई कमियां सामने आती हैं। कई जगह प्रशिक्षित शिक्षक नहीं हैं, तो कहीं जरूरी उपकरण और लैब की सुविधा नहीं मिलती। ऐसे में छात्र इन कोर्सों को चुनने से बचते हैं।
क्या है यूपी बोर्ड की तैयारी
यूपी बोर्ड अब हर स्कूल में दो व्यावसायिक कोर्स अनिवार्य करने की तैयारी में है, ताकि बच्चों को पढ़ाई के साथ हुनर भी सिखाया जा सके। लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह कदम तभी सफल होगा, जब छात्रों और अभिभावकों दोनों का भरोसा जीता जाए और स्कूलों में सही संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव


