पैसे दो... नंबर बढ़ाकर पास करवा दूंगा; रिजल्ट के पहले फ्रॉड कॉल, यूपी बोर्ड के छात्र हो जाएं सावधान

Himanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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यूपी बोर्ड के नतीजे आने से पहले साइबर ठग एक्टिव हो गए हैं। नंबर बढ़ाने और पास कराने के नाम पर आने वाली फर्जी कॉल्स से बचें और 1930 पर शिकायत करें।

पैसे दो... नंबर बढ़ाकर पास करवा दूंगा; रिजल्ट के पहले फ्रॉड कॉल, यूपी बोर्ड के छात्र हो जाएं सावधान

यूपी बोर्ड के इम्तिहान खत्म हो चुके हैं और कॉपियों को जांचने का काम भी लगभग पूरा हो चला है। अब बच्चों के साथ-साथ उनके मां-बाप के चेहरों पर भी नतीजों को लेकर एक अजीब सी बेचैनी देखने को मिल रही है। हर कोई बस इसी इंतजार में है कि कब रिजल्ट आए और कब पता चले कि साल भर की मेहनत का क्या फल मिला। लेकिन इस इंतजार और घबराहट के बीच एक बहुत बड़ा खतरा भी मंडरा रहा है। आजकल साइबर ठगों ने ठगी का एक नया पैंतरा निकाल लिया है। वे उन मासूम बच्चों और उनके घरवालों को अपना शिकार बना रहे हैं, जिन्होंने इस बार यूपी बोर्ड की हाईस्कूल या इंटरमीडिएट की परीक्षा दी है। खास तौर पर हापुड़ जिले में इसे लेकर एक बड़ा अलर्ट जारी किया गया है। इन ठगों का तरीका बड़ा ही शातिर है। वे सीधे आपके मोबाइल पर कॉल करते हैं। फोन उठाने पर सामने वाला शख्स बड़े ही कॉन्फिडेंस के साथ बात करता है, जैसे वो सीधे बोर्ड के दफ्तर से ही बोल रहा हो। वो आपको बताएगा कि आपके बच्चे के फलां विषय में नंबर कम आ रहे हैं या वो फेल हो रहा है। फिर वो एक लालच देता है कि कुछ पैसों का इंतजाम कर लो, मैं सिस्टम में सेटिंग करके नंबर बढ़ाकर सीधे पास करवा दूंगा।

इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए यूपी बोर्ड के सचिव ने सभी जिलों के डीआईओएस (DIOS) को सख्त हिदायत दी है। इसी कड़ी में हापुड़ के डीआईओएस ने जिले के सभी स्कूलों के प्रिंसिपलों, बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए एक जरूरी एडवायजरी जारी कर दी है। उनका साफ कहना है कि यूपी बोर्ड की परीक्षाएं और जिले में मूल्यांकन का काम पूरी तरह से शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो चुका है। अब जालसाज और साइबर अपराधी लोगों को बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वे फोन कॉल, व्हाट्सएप मैसेज या फिर ईमेल के जरिए संपर्क साधकर पैसों की डिमांड कर सकते हैं।

साइबर ठग हो गए हैं एक्टिव

हापुड़ जिले की बात करें तो इस बार यहां करीब 29 हजार छात्र-छात्राओं ने बोर्ड के इम्तिहान में अपनी किस्मत आजमाई है। इन बच्चों ने जिले भर में बनाए गए 40 अलग-अलग परीक्षा केंद्रों पर अपने पेपर दिए थे। अब इतनी बड़ी तादाद में जब बच्चे रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं, तो साइबर अपराधियों के लिए भी यह एक बड़ा मौका बन जाता है। वे इसी फिराक में रहते हैं कि कोई डरा हुआ छात्र या परेशान माता-पिता उनके झांसे में आ जाए और बिना कुछ सोचे-समझे उनके बताए गए बैंक खाते या यूपीआई पर पैसे ट्रांसफर कर दे।

डीआईओएस ने साफ तौर पर दी हिदायत

डीआईओएस ने साफ तौर पर हिदायत दी है कि अगर आपके पास फेल-पास कराने या नंबर बढ़ाने के नाम पर पैसों की डिमांड करने वाली कोई भी कॉल आती है, तो बिलकुल भी न घबराएं और न ही उनके लालच में आएं। ऐसी किसी भी कॉल या मैसेज पर भरोसा न करें। ये सब पूरी तरह से फर्जी है। यूपी बोर्ड की व्यवस्था इतनी पारदर्शी है कि कोई भी फोन पर बात करके नंबरों में हेरफेर नहीं कर सकता।

अगर आपको ऐसा कोई फोन आता है, तो तुरंत उस नंबर की शिकायत दर्ज कराएं। इसके लिए सरकार ने नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 जारी किया हुआ है। आप बेझिझक 1930 पर कॉल करके इस फ्रॉड की जानकारी दे सकते हैं ताकि पुलिस तुरंत हरकत में आए और उस नंबर को ब्लॉक करने के साथ-साथ ठगों को पकड़ने की कानूनी कार्रवाई शुरू कर सके। इसके अलावा आप अपने जिले के डीआईओएस दफ्तर में भी इसकी लिखित शिकायत कर सकते हैं।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

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काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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