यूपी बोर्ड 10वीं-12वीं के नतीजों का इंतजार, पिछले पांच साल में कितने बच्चे हुए पास; क्या रहा ट्रेंड
UP Board Result 2026 : यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं के नतीजों का बेसब्री से इंतजार है, आइए जानते हैं पिछले पांच सालों में पासिंग परसेंटेज का ट्रेंड कैसा रहा और कितने छात्र सफल हुए।

UP Board Result 2026 : जैसे-जैसे अप्रैल का महीना अपनी रफ्तार पकड़ रहा है उत्तर प्रदेश के लाखों घरों में एक ही बात की सुगबुगाहट है कि आखिर बोर्ड परीक्षा के नतीजे कब आएंगे? बात चाहे हाईस्कूल (10वीं) के छोटे बच्चों की हो या इंटरमीडिएट (12वीं) के नौजवानों की, सबकी नींद उड़ी हुई है। इम्तिहान के बाद का जो ये खाली वक्त होता है ना, ये किसी भारी पहाड़ से कम नहीं लगता। एशिया का सबसे बड़ा शिक्षा बोर्ड कहे जाने वाले यूपी बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में इस बार करीब 55 लाख से ज्यादा छात्र-छात्राओं ने अपनी किस्मत आजमाई है। कॉपियों को जांचने का काम बड़ी ही मुस्तैदी से लगभग पूरा किया गया और खबर है कि बोर्ड इस बार रिजल्ट को बिना किसी देरी के जल्द से जल्द जारी करने की पूरी जुगत में लगा हुआ है। मगर इससे पहले ये जांच लें कि पिछले सालों में बोर्ड रिजल्ट का पासिंग प्रतिसत कैसा रहा।
कैसा रहा है पिछले पांच सालों का ट्रेंड?
जब बात नतीजों के आने की हो ही रही है, तो जरा पिछले पांच सालों के पन्नों को पलट कर देखना भी लाजमी है। इससे एक पक्का अंदाजा लग जाता है कि आखिर हवा किस तरफ बह रही है और कितने फीसदी बच्चे आम तौर पर सफल होते हैं। साल 2021 से लेकर 2025 तक के आंकड़ों पर अगर हम नजर दौड़ाएं, तो पास होने वाले बच्चों की तादाद (पासिंग परसेंटेज) में हमें कई दिलचस्प और हैरान करने वाले बदलाव देखने को मिलते हैं।
शायद ही कोई छात्र 2021 के उस दौर को जिंदगी में कभी भूला पाएगा। वो एक ऐसा वक्त था जब बिना किसी पेपर और सेंटर के ही बच्चों को अगली क्लास में प्रमोट कर दिया गया था। उस साल 10वीं में पास होने वालों का आंकड़ा 99.53 फीसदी तक पहुंच गया था। वहीं, 12वीं में भी 97.88 फीसदी बच्चों ने बाजी मारी थी। ये आंकड़े यूपी बोर्ड के इतिहास के सबसे ऊंचे आंकड़े थे, लेकिन सब जानते हैं कि उस वक्त हालात ही कुछ ऐसे बन पड़े थे।
पटरी पर लौटती जिंदगी (2022 और 2023)
इसके बाद जब कोरोना का असर कम हुआ और 2022-2023 में दोबारा कड़ाई के साथ इम्तिहान लिए गए, तो रिजल्ट एकदम हकीकत के धरातल पर आ गिरा। इन दोनों सालों में 10वीं का पासिंग परसेंटेज औसतन 88 से 89 फीसदी के बीच झूलता रहा। दूसरी तरफ, 12वीं के नतीजे 75 से 80 फीसदी के इर्द-गिर्द सिमट गए। इन आंकड़ों ने एक बात तो साफ कर दी कि यूपी बोर्ड में अब बिना पसीना बहाए और रातें काली किए पास होना मुमकिन नहीं है।
2024 और 2025 के ताजा आंकड़े
अगर हम बिल्कुल हालिया सालों की बात करें तो 2024 में 10वीं क्लास के करीब 89.55% बच्चों ने परीक्षा पास की थी। वहीं 12वीं का ओवरऑल रिजल्ट 82.60% रहा था। इसके बाद 2025 में भी छात्रों ने अपना दम-खम दिखाया। बोर्ड के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में हाईस्कूल (10वीं) के 90.11 फीसदी छात्रों ने सफलता का स्वाद चखा, जबकि इंटर (12वीं) का पासिंग प्रतिशत 81.15% दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से एक बात एकदम शीशे की तरह साफ हो जाती है कि 10वीं के मुकाबले 12वीं का इम्तिहान छात्रों को थोड़ी ज्यादा कड़ी टक्कर देता है और वहां नंबर बटोरना आसान नहीं है।
बेटियों का दबदबा आज भी बरकरार
पिछले पांच सालों के रिजल्ट का अगर आप गहराई से विश्लेषण करें, तो एक बात जो बिल्कुल पत्थर की लकीर साबित होती है, वो है लड़कियों का शानदार प्रदर्शन। चाहे साल कोई भी रहा हो, बेटियों ने हमेशा पासिंग परसेंटेज के मामले में लड़कों को बुरी तरह पछाड़ा है। 2024 और 2025 के आंकड़ों पर ही गौर कर लें तो 12वीं में जहां लड़कों का पास प्रतिशत 77 से 78% के आसपास अटका रहा, वहीं लड़कियों ने 88% से ज्यादा का जादुई आंकड़ा पार कर लिया। ये साफ बताता है कि पढ़ाई-लिखाई को लेकर हमारी बेटियां अब कितनी ज्यादा संजीदा और फोकस हो चुकी हैं।
इस बार बोर्ड ने क्या की है तैयारी?
इस बार यानी 2026 के नतीजों को लेकर यूपी बोर्ड काफी हाई-टेक रुख अपना रहा है। डिजिटाइजेशन को बढ़ावा देते हुए बोर्ड ने कई जिलों में कॉपी चेकिंग के साथ-साथ ऑनलाइन मार्क्स एंट्री का पायलट प्रोजेक्ट भी शुरू किया है। इसका सीधा सा मतलब ये है कि अब नंबर चढ़ाने में होने वाली गड़बड़ियों की गुंजाइश न के बराबर होगी और रिजल्ट भी एकदम तय वक्त पर जारी हो सकेगा।
रिजल्ट के दिन के लिए कुछ जरूरी बातें
नतीजे वाले दिन अक्सर बच्चे हड़बड़ाहट में अपना रोल नंबर या एडमिट कार्ड ही कहीं रख कर भूल जाते हैं। इसलिए सबसे समझदारी की बात यही है कि अपना एडमिट कार्ड, स्कूल कोड और रोल नंबर अभी से किसी महफूज जगह पर लिख कर रख लें। जैसे ही नतीजे घोषित हों, फौरन आधिकारिक वेबसाइट (upmsp.edu.in) पर जाकर अपना परिणाम देख लें।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
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हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
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काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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