यूपी बोर्ड में फेल छात्रों को 5-10 बोनस अंक से पास कराने की तैयारी, किन विद्यार्थियों को होगा फायदा
यूपी बोर्ड खेलों में शानदार प्रदर्शन करने वाले छात्रों को हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा में 5 से 20 बोनस अंक देने की तैयारी में है। शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।

अब खेल के मैदान में यूपी और देश का नाम रोशन करने वाले छात्र-छात्राओं को बोर्ड परीक्षा में भी उसका फायदा मिल सकता है। यूपी बोर्ड ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा में उत्कृष्ट खिलाड़ियों को बोनस अंक देने की तैयारी शुरू कर दी है। इस नई व्यवस्था के तहत राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने या पदक जीतने वाले छात्रों को 5 से लेकर 20 अंक तक अतिरिक्त दिए जाएंगे। यूपी बोर्ड ने इसके लिए नियमों में बदलाव का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। मंजूरी मिलते ही यह व्यवस्था लागू हो सकती है। माना जा रहा है कि इससे पढ़ाई के साथ खेलों में आगे बढ़ने वाले लाखों छात्रों को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।
किस स्तर पर कितने अंक मिलेंगे
प्रस्ताव के मुताबिक राज्य स्तर की प्रतियोगिता में पहला, दूसरा या तीसरा स्थान हासिल करने वाले छात्रों को पांच बोनस अंक दिए जाएंगे। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर सिर्फ भाग लेने पर सात अंक मिलेंगे। अगर छात्र राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतता है तो उसे 10 बोनस अंक दिए जाएंगे। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले छात्रों को 15 अंक और वहां पहला, दूसरा या तीसरा स्थान हासिल करने पर पूरे 20 बोनस अंक देने की तैयारी है।
किन छात्रों को मिलेगा फायदा
बोर्ड ने साफ किया है कि बोनस अंक सिर्फ उन्हीं छात्रों को मिलेंगे जिन्होंने हाईस्कूल या इंटरमीडिएट परीक्षा में बैठने से पहले संबंधित प्रतियोगिता का प्रमाण पत्र हासिल कर लिया हो। यह प्रमाण पत्र परीक्षा वर्ष की 31 जनवरी तक प्राप्त होना जरूरी होगा। इसके साथ ही यह सुविधा केवल एसजीएफआई यानी स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले छात्रों को ही मिलेगी। कक्षा 9 और 11 में प्रतियोगिता में भाग लेने वाले छात्रों को अगले साल क्रमशः 10वीं और 12वीं की परीक्षा में इसका लाभ मिलेगा।
फेल होने पर भी मिल सकती है राहत
इस योजना का सबसे बड़ा फायदा उन छात्रों को भी मिलेगा जो किसी विषय में फेल हो जाते हैं। प्रस्ताव के अनुसार बोनस अंक जरूरत पड़ने पर दो विषयों में ग्रेस मार्क्स की तरह जोड़े जा सकेंगे। हालांकि एक छात्र को एक ही प्रमाण पत्र पर एक बार बोनस अंक मिलेगा। अगर किसी छात्र के पास कई प्रमाण पत्र हैं तो उसी प्रमाण पत्र को माना जाएगा जिसमें सबसे ज्यादा अंक मिलने की संभावना होगी।
कम्पार्टमेंट परीक्षा वालों को नहीं मिलेगा लाभ
यूपी बोर्ड ने यह भी साफ कर दिया है कि कम्पार्टमेंट परीक्षा में बैठने वाले छात्र-छात्राओं को बोनस अंक का फायदा नहीं मिलेगा। यानी यह सुविधा केवल नियमित परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों के लिए ही लागू होगी। हाईस्कूल में दिए गए बोनस अंक अंकपत्र और प्रमाण पत्र में अलग से दिखाई देंगे। वहीं इंटरमीडिएट में यह अंक कुल प्राप्तांकों में जोड़ दिए जाएंगे।
खेल संस्कृति को बढ़ावा देने की कोशिश
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला छात्रों को खेलों के प्रति गंभीर बनाने में मदद करेगा। अक्सर छात्र और अभिभावक बोर्ड परीक्षा के दबाव के कारण खेल गतिविधियों से दूरी बना लेते हैं। लेकिन अब पढ़ाई के साथ खेल में अच्छा प्रदर्शन करने पर सीधे नंबरों का फायदा मिलेगा तो छात्रों का रुझान खेलों की ओर बढ़ सकता है। यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह के मुताबिक शासन से मंजूरी मिलने के बाद इस नई व्यवस्था को लागू कर दिया जाएगा।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव


