उत्तर प्रदेश की 69000 शिक्षक भर्ती में 8 तरह के विवाद निपटाएगा सुप्रीम कोर्ट
69000 शिक्षक भर्ती में सुप्रीम कोर्ट केवल आरक्षण विवाद ही नहीं कुल आठ तरह के मामलों का निस्तारण करेगा। शीर्ष अदालत ने आठ प्रकार की मांग को लेकर दायर याचिकाओं को श्रेणीवार संकलित करने के आदेश दिए हैं।

संजोग मिश्र । प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 69000 शिक्षक भर्ती में सुप्रीम कोर्ट केवल आरक्षण विवाद ही नहीं कुल आठ तरह के मामलों का निस्तारण करेगा। शीर्ष अदालत ने आठ प्रकार की मांग को लेकर दायर याचिकाओं को श्रेणीवार संकलित करने के आदेश दिए हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से सुविधा संकलन तैयार करने की जिम्मेदारी आठ अधिवक्ताओं को सौंपी गई है। ये याचिकाएं इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ खंडपीठ) के 13 अगस्त 2024 के अंतिम आदेश के खिलाफ दायर की गई हैं। रवि कुमार सक्सेना व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य सहित दर्जनों विशेष अनुमति याचिकाओं पर न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की खंडपीठ ने गुरुवार को सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने सुझाव दिया कि वैसे तो पूरा बैच एक ही आदेश से जुड़ा है, लेकिन अलग-अलग श्रेणियों के मुद्दे अलग दृष्टिकोण से तर्क की मांग करते हैं। कोर्ट ने इस सुझाव को स्वीकार कर लिया।
इन आठ कैटेगरी में बंटे याचिकाकर्ता
1. सेवारत अनारक्षित वर्ग के शिक्षक।
2. विविध श्रेणी जिनकी कोर्ट को कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
3. बीएड/डीएलएड/बीटीसी अभ्यर्थी।
4. दोहरा आरक्षण के खिलाफ संघर्षरत अचयनित अनारक्षित अभ्यर्थी।
5. उत्तरकुंजी में एक अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थी।
6. भूतपूर्व सैनिक अभ्यर्थी।
7. जिला आवंटन से प्रभावित अभ्यर्थी।
8. ईडब्ल्यूएस आरक्षण न मिलने से प्रभावित अनारक्षित वर्ग के अचयनित अभ्यर्थी।
क्यों हुआ विवाद
विवाद दो अहम वजहें थीं। आरक्षित वर्ग (SC/ST/OBC) के वे मेधावी उम्मीदवार जिन्होंने सामान्य कटऑफ से अधिक अंक पाकर अनारक्षित श्रेणी में जगह बनाई, आरोप था कि उन्हें अनारक्षित सीटों पर सही स्थान नहीं मिला।
दूसरी तरफ दलील दी गई कि जिन आरक्षित अभ्यर्थियों ने TET या ATRE परीक्षा में 5% अंक छूट का लाभ लिया है, उन्हें जनरल कैटेगरी में माइग्रेट नहीं किया जाना चाहिए। इसी दौरान 5 जनवरी 2022 को 6800 अतिरिक्त अभ्यर्थियों की एक सूची जारी की गई थी, जिस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी।
- 13 मार्च 2023 को सिंगल बेंच ने कहा कि 60 फीसदी से 65 फीसदी के बीच अंक पाने वाले आरक्षित उम्मीदवारों को जनरल माइग्रेशन का लाभ नहीं मिलेगा।
- 13 अगस्त 2024 को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच का फैसला रद्द कर दिया। डिवीजन बेंच ने कहा- 69 हजार पदों के लिए नई मेरिट लिस्ट तैयार की जाए। जो रिजर्व कैटेगरी के उम्मीदवार जनरल मेरिट में आते हैं, उन्हें जनरल कैटेगरी में ही गिना जाए। इसके बाद क्षैतिज आरक्षण लागू किया जाए। क्षैतिज आरक्षण स्पेशल कैटेगरी जैसे- महिला, दिव्यांग, पूर्व सैनिक, ट्रांसजेंडर को हर जाति के भीतर मौका देने की व्यवस्था है।


