UGC NET June 2026: आंसर की जल्द, JRF-PhD के लिए इन विषयों के क्या रहे पिछले कट-ऑफ

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नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए जल्द ही UGC NET जून 2026 की आंसर की जारी करने वाली है।

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देश भर के लाखों नौजवानों के लिए यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (यूजीसी ने) सिर्फ एक इम्तिहान नहीं, बल्कि प्रोफेसर बनने और रिसर्च की दुनिया में कदम रखने का एक बड़ा सपना है। जून 2026 के इम्तिहान खत्म होने के बाद अब सभी की निगाहें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए के अगले कदम पर टिकी हैं। उम्मीदवार बड़ी बेताबी से आंसर की और नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। खबर है कि एनटीए बहुत जल्द अपने आधिकारिक पोर्टल ugcnet.nta.nic.in पर आंसर की जारी करने जा रहा है। अगर आपने भी यह परीक्षा दी है, तो आपके मन में भी कटऑफ को लेकर कई सवाल चल रहे होंगे। तो चलिए, आपके इस इंतजार और उलझन को थोड़ा कम करते हैं और बताते हैं कि आने वाले दिनों में क्या कुछ होने वाला है।

कई सेंटर्स और शिफ्टों में हुआ था बड़ा इम्तिहान

आपको बता दें कि इस बार एनटीए ने 22, 23, 24, 25, 29, 30 जून और 5 जुलाई 2026 को देश के अलग-अलग कोनों में इस बड़े इम्तिहान का आयोजन किया था। कई शिफ्टों में हुए इस एग्जाम में लाखों छात्रों ने अपनी किस्मत और मेहनत को आजमाया है। अब हर किसी को आंसर की का बेसब्री से इंतजार है, ताकि वो अपने सही और गलत जवाबों का मिलान कर सकें और अपने नंबरों का एक मोटा-मोटा हिसाब लगा सकें।

हालांकि, असल तस्वीर तो नतीजों के ऐलान के बाद ही साफ होगी, जब एजेंसी की तरफ से फाइनल कटऑफ लिस्ट जारी की जाएगी। यह कटऑफ बहुत अहम होती है, क्योंकि यही तय करती है कि आपको जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ) मिलेगी, आप असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के योग्य होंगे, या फिर आपका नाम सीधे पीएचडी एडमिशन वाली कैटेगरी में आएगा।

पिछले कटऑफ को समझना क्यों है जरूरी?

रिजल्ट आने से पहले, उम्मीदवारों के लिए यह जानना बहुत फायदेमंद होता है कि पिछले एग्जाम्स में कटऑफ का क्या ट्रेंड रहा है। पुरानी कटऑफ को देखकर आप यह अंदाजा लगा सकते हैं कि इस बार आपको कितने नंबरों की दरकार होगी। इससे आगे के एकेडमिक सफर की प्लानिंग करने में काफी मदद मिलती है। यहां हम खास तौर पर कॉमर्स, इंग्लिश और साइकोलॉजी (मनोविज्ञान) विषयों के पिछले साल (दिसंबर साइकिल) के आंकड़े शेयर कर रहे हैं, जो आपके लिए एक गाइड का काम करेंगे।

कॉमर्स विषय का कटऑफ और आंकड़े

कॉमर्स का पेपर हमेशा से ही छात्रों के बीच काफी पॉपुलर और चुनौतीपूर्ण माना जाता है। जून 2026 में यह इम्तिहान 24 जून को दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे की शिफ्ट में लिया गया था। आइए देखते हैं कि पिछली बार दिसंबर साइकिल में कॉमर्स के लिए कटऑफ का क्या हाल था:

जेआरएफ: जेआरएफ हासिल करने के लिए कटऑफ 218 नंबर गया था। इस कड़ी टक्कर वाले विषय में कुल 115 होनहार उम्मीदवारों ने इसे क्वालिफाई किया था।

असिस्टेंट प्रोफेसर: जो लोग सिर्फ असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए योग्य हुए, उनका कटऑफ 186 नंबर रहा था। इस कैटेगरी में कुल 1782 उम्मीदवारों ने बाजी मारी थी।

पीएचडी एडमिशन: पीएचडी में दाखिले के लिए कटऑफ थोड़ा कम यानी 158 नंबर था, जिस पर 3791 छात्र योग्य करार दिए गए थे।

इंग्लिश लिटरेचर का कटऑफ

साहित्य से जुड़े छात्रों के लिए इंग्लिश का पेपर हमेशा से एक अलग तरह की चुनौती लेकर आता है। इस बार टेस्टिंग एजेंसी ने 25 जून की सुबह वाली शिफ्ट में इंग्लिश का इम्तिहान लिया था। पिछले एग्जाम साइकिल में इंग्लिश के क्वालिफाइंग नंबर कुछ इस तरह थे:

जेआरएफ: इस विषय में जेआरएफ का कटऑफ 186 नंबर था, और पूरे देश से सिर्फ 144 उम्मीदवारों ने इस मुश्किल मुकाम को छुआ था।

असिस्टेंट प्रोफेसर: असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की रेस में कटऑफ 164 नंबर पर आ कर रुका था। इसके लिए 1680 उम्मीदवार एलिजिबल पाए गए थे।

पीएचडी एडमिशन: बात अगर सिर्फ पीएचडी एडमिशन की करें, तो 146 नंबर की कटऑफ के साथ 3268 छात्रों ने अपनी जगह पक्की की थी।

साइकोलॉजी का कटऑफ स्कोर

मनोविज्ञान या साइकोलॉजी की बात करें तो इसमें भी कॉम्पिटिशन लगातार बढ़ रहा है। 25 जून को शाम की शिफ्ट में यह पेपर आयोजित किया गया था। दिसंबर 2025 के कटऑफ को देखें, तो यह काफी हाई रहा था, जो बताता है कि इस विषय में कितनी कांटे की टक्कर होती है:

जेआरएफ: साइकोलॉजी में जेआरएफ का कटऑफ 234 नंबर गया था, जो काफी ज्यादा है। सिर्फ 45 चुनिंदा उम्मीदवार ही इस जादुई आंकड़े को पार कर पाए थे।

असिस्टेंट प्रोफेसर: असिस्टेंट प्रोफेसर की योग्यता के लिए कटऑफ 206 नंबर था, जहां 811 उम्मीदवारों को कामयाबी मिली।

पीएचडी एडमिशन: पीएचडी दाखिले के लिए कटऑफ 182 रहा था और इसमें 1592 आवेदक योग्य पाए गए थे।

आगे क्या होगा?

जैसे ही नतीजों का ऐलान होगा, एनटीए अपनी वेबसाइट पर हर विषय और हर कैटेगरी की अलग-अलग कटऑफ पीडीएफ जारी करेगा। इस लिस्ट में जेआरएफ, असिस्टेंट प्रोफेसर और पीएचडी के लिए अलग-अलग कटऑफ के साथ-साथ यह भी बताया जाएगा कि कितने उम्मीदवारों ने उस थ्रेशहोल्ड यानी न्यूनतम अंक को पार किया है। फिलहाल, सभी छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और लेटेस्ट अपडेट्स के लिए सिर्फ आधिकारिक वेबसाइट ugcnet.nta.nic.in पर ही लगातार नजर बनाए रखें।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

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हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

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काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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