UGC-NET 2026: नामों की गलत स्पेलिंग से दोहराए गए सवालों तक, जानें पेपर में क्या-क्या गड़बड़ियां मिलीं
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए ने यूजीसी नेट परीक्षा के तीन विषयों अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र के लिए दोबारा परीक्षा कराने की घोषणा की। एनटीए ने इन विषयों के पेपर्स में गलतियों की शिकायत मिलने के बाद यह फैसला लिया है।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए ने यूजीसी नेट परीक्षा के तीन विषयों अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र के लिए दोबारा परीक्षा कराने की घोषणा की। एनटीए ने इन विषयों के पेपर्स में गलतियों की शिकायत मिलने के बाद यह फैसला लिया है। ऐसे में एक बार फिर एनटीए पर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्योंकि NTA का यह फैसला इस साल एजेंसी की ओर से रद्द की गई दूसरी बड़ी परीक्षा है। इससे पहले 3 मई को आयोजित NEET-UG 2026 परीक्षा को पेपर लीक के बाद रद्द कर दिया गया था। इस मामले को लेकर देशभर में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया था।
बताते चलें कि कमेटी की जांच रिपोर्ट में इन तीनों प्रश्नपत्रों में तथ्यात्मक, टाइपिंग और अनुवाद संबंधी कई खामियां सामने आईं। बताया जा रहा है कि कई फेमस विद्वानों के नाम गलत लिखे गए थे, किताबों के शीर्षक भी गड़बड़ या अधूरे थे। इसके अलावा सवालों की भाषा में भी दिक्कतें मिलीं, जैसे व्याकरण की गलतियां, लिंग और वचन से जुड़ी त्रुटियां, विराम चिह्नों की चूक और स्थापित अवधारणाओं के लिए गैर मानक शब्दों का इस्तेमाल। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि काफी सारे सवाल पिछली परीक्षाओं से हूबहू दोहरा दिए गए थे। इन तमाम खामियों को देखते हुए कमेटी ने सिफारिश की कि निष्पक्ष और त्रुटिरहित परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए तीनों पेपर दोबारा कराए जाएं। चलिए जानते हैं कि किस विषय में किन गलतियों की वजह से दोबारा पेपर कराने पड़ रहे है?
किन गलतियों के कारण UGC-NET के 3 पेपर दोबारा कराने पड़े?
समाजशास्त्र में विद्वानों के नाम गलत
समाजशास्त्र के पेपर की बात करें, तो इसमें कई प्रमुख विद्वानों के नाम गलत लिखे जाने की बात सामने आई। इसमें मार्था नुसबाम, भारतीय समाजशास्त्र के जनक जीएस घुरये और फेमस समाजशास्त्री व लेखक जॉर्ज रिट्जर के नाम की स्पेलिंग भी गलत पाई गई। बता दें कि Ritzer को Putzer, Ghurye को Ghunye और Nussbaum को Nusbaut लिखा गया था। इसके अलावा प्रश्नों की भाषा और हिंदी अनुवाद में भी गलतियां बताई गईं। कुछ प्रश्नों की शब्दावली ऐसी थी, जिससे उम्मीदवारों को उनका सही मतलब समझने में परेशानी हो सकती थी।
अंग्रेजी के पेपर में दोहराए गए पुराने सवाल
अंग्रेजी के प्रश्नपत्र को लेकर छात्रों और कोचिंग शिक्षकों ने आरोप लगाया कि इसमें पिछली UGC-NET परीक्षाओं के कई सवाल दोबारा पूछे गए। इनमें खास तौर पर दिसंबर 2024 और 2025 की परीक्षाओं से जुड़े सवालों के दोहराए जाने की बात कही गई। बताया गया कि कंठपुरा के प्रकाशन वर्ष, द लाइफ डिवाइन के लेखक, द टाइम मशीन और ब्रेव न्यू वर्ल्ड की साहित्यिक विधा से जुड़े सवाल पहले पूछे जा चुके थे।
इसके अलावा Jacques Derrida और Roland Barthes जैसे आलोचकों से जुड़े ‘Match the Following’ प्रश्न भी दोहराए गए। William Shakespeare के नाटकों की साहित्यिक कॉन्सेप्ट्स से जुड़े प्रश्न भी पुराने पेपर से मिलते-जुलते बताए गए। कई सवालों में विकल्पों का क्रम भी पहले जैसा होने का आरोप लगाया गया।
कॉमर्स में भी पुराने प्रश्न दोहराने की शिकायत
वहीं, कॉमर्स के पेपर में भी पुराने प्रश्न दोहराए जाने की शिकायत सामने आई। इनमें आर्म्स लेंथ प्राइसिंग (Arm's Length Pricing) और TDS की धारा 194C और 194F से जुड़े सवाल शामिल बताए गए।
NTA की समिति ने मानी कई खामियां
बताते चलें कि इसके बाद एनटीए ने अपनी गलतियां मानी है। साथ ही इन खामियों को देखते हुए समिति ने निष्पक्ष और त्रुटिरहित परीक्षा के लिए तीनों विषयों के पेपर दोबारा कराने की सिफारिश की। इसके बाद NTA ने समाजशास्त्र, अंग्रेजी और कॉमर्स के पेपर फिर से आयोजित करने का फैसला किया।
कब होंगे एग्जाम
NTA ने अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र के पेपर की नई तारीखें और परीक्षा की शिफ्ट जारी कर दी हैं। परीक्षा केंद्र, एग्जाम सिटी और एडमिट कार्ड से जुड़ी जानकारी NTA बाद में जारी करेगा। उम्मीदवारों को इन तारीखों पर दोबारा परीक्षा में शामिल होना होगा।
अंग्रेजी: 9 सितंबर 2026, सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक
कॉमर्स: 9 सितंबर 2026, दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक
समाजशास्त्र: 10 सितंबर 2026, सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक
छात्रों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है UGC-NET?
UGC-NET के जरिए उम्मीदवारों की असिस्टेंट प्रोफेसर, जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) और PhD में दाखिले के लिए पात्रता तय की जाती है। ऐसे में प्रश्नपत्र में इस तरह की गड़बड़ियां उम्मीदवारों के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। वहीं, दोबारा एग्जाम से छात्रों की तैयारी, समय और आगे की अकादमिक योजनाओं पर भी असर पड़ सकता है। साथ ही, इस पूरे मामले ने राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में प्रश्नपत्र तैयार करने और उनकी अंतिम जांच की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं।


