छोटे कॉलेज को नहीं बनाया बहाना, आईआईटी-एनआईटी वालों से दोस्ती कर सीखी कोडिंग; हासिल किया 64 लाख का पैकेज

लाइव हिन्दुस्तान
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टियर-3 सरकारी कॉलेज से पढ़े छात्र ने कोडिंग और सही नेटवर्क से इंफोसिस और उसके बाद एमेजॉन में 64 लाख का पैकेज हासिल किया।

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सैलरी

कॉलेज का नाम बड़ा हो या छोटा अगर मेहनत सच्ची हो तो कामयाबी का रास्ता खुद-ब-खुद बन जाता है। यही साबित कर दिखाया है तेलंगाना के जेएनटीयू जगित्याल से बीटेक करने वाले एक स्टूडेंट ने जिसकी कहानी अब सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोर रही है। विकास अलवीस नाम के एक शख्स ने एक्स पर इस लड़के की मेहनत और जज्बे की दास्तान शेयर की और देखते ही देखते यह पोस्ट वायरल हो गई। कहानी ऐसी है जो हर उस स्टूडेंट के लिए मिसाल बन सकती है, जो छोटे शहर या छोटे कॉलेज से होने की वजह से खुद को कमतर समझ बैठता है।

जेएनटीयू जगित्याल एक सरकारी टियर-3 इंजीनियरिंग कॉलेज है जहां का औसत प्लेसमेंट पैकेज महज करीब 4 लाख रुपये सालाना है। यहां से ज्यादातर स्टूडेंट्स टीसीएस, कॉग्निजेंट, कैपजेमिनी और एक्सेंचर जैसी कंपनियों में प्लेस होते हैं, यानी सर्विस बेस्ड कंपनियां ही यहां का मुख्य ठिकाना मानी जाती हैं। कॉलेज में कोडिंग को लेकर कोई खास माहौल भी नहीं था। कॉम्पिटिटिव प्रोग्रामिंग, कोडिंग कॉन्टेस्ट या टेक्निकल इंटरव्यू की तैयारी के लिए भी कोई ठोस सिस्टम मौजूद नहीं था। मतलब साफ है, अगर कोई स्टूडेंट कुछ बड़ा करना चाहता, तो उसे खुद ही रास्ता खोजना था।

अपने दम पर शुरू की नौकरी

और यही किया इस लड़के ने। कॉलेज के भरोसे बैठने की बजाय उसने अपने दम पर तैयारी शुरू की। उसने आईआईटी और एनआईटी जैसे टॉप संस्थानों में पढ़ने वाले दोस्तों का एक नेटवर्क बना लिया। इन्हीं दोस्तों के जरिए वो प्रोग्रामिंग डिस्कशन, कोडिंग ट्रेंड्स और कॉम्पिटिटिव कोडिंग की दुनिया से जुड़ा रहा। कॉलेज के सालों में उसने सिर्फ कैंपस प्लेसमेंट के भरोसे बैठने की बजाय लगातार कोडिंग पर मेहनत की, तमाम कॉन्टेस्ट में हिस्सा लिया और अपने टेक्निकल स्किल्स को लगातार निखारता रहा।

ऐसे की करियर की शुरुआत

इस मेहनत का नतीजा भी बेहतरीन निकला। उसे पहली नौकरी इंफोसिस में स्पेशलिस्ट प्रोग्रामर के तौर पर मिली, जहां उसका पैकेज करीब 11 लाख रुपये सालाना था। यह उसके कॉलेज के औसत पैकेज से लगभग तीन गुना ज्यादा था। लेकिन यहीं रुकना उसे मंजूर नहीं था। नौकरी करते हुए भी वो बेहतर मौकों की तलाश में लगा रहा, अपनी तैयारी जारी रखी और खुद को लगातार अपग्रेड करता रहा। नतीजा यह हुआ कि करियर शुरू करने के करीब तीन साल बाद ही उसे अमेजन में एसडीई-2 (SDE 2) के पद पर नौकरी मिल गई, जहां उसका सालाना पैकेज करीब 64 लाख रुपये तक पहुंच गया।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव

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