न IIT, न कैंपस प्लेसमेंट... छोटे शहर की लड़की ने हासिल किया 38 लाख का पैकेज, कहानी वायरल
टियर 3 शहर की लड़की ने बिना कैंपस प्लेसमेंट के 38 लाख रुपये सालाना का पैकेज हासिल करने का दावा किया है। लड़की की कहानी सोशल मीडिया पर वायरल है।

कहते हैं मेहनत कभी बेकार नहीं जाती, और सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक कहानी ने इस बात को एक बार फिर सच साबित कर दिया है। दावा किया जा रहा है कि टियर-3 शहर से ताल्लुक रखने वाली एक युवती ने बिना किसी कैंपस प्लेसमेंट सपोर्ट के सालाना 38 लाख रुपये का पैकेज हासिल करके सबको हैरान कर दिया है। न तो वो किसी आईआईटी से पढ़ी थी, न ही किसी नामी-गिरामी कॉलेज से फिर भी उसने अपनी मेहनत और लगन के दम पर वो मुकाम हासिल किया जिसका सपना हर फ्रेशर देखता है। यह कहानी अब सोशल मीडिया पर लोगों के दिलों को छू रही है और हजारों लोग इसे शेयर कर रहे हैं।
कैसे शुरू हुआ सफर
एक्स यूजर @AnandaniNisha ने यह कहानी शेयर करते हुए बताया कि उनकी दोस्त ने अपने करियर की शुरुआत बेहद संघर्षपूर्ण तरीके से की। न कोई बड़ा कॉलेज, न कोई कैंपस प्लेसमेंट का सहारा, बावजूद इसके उसने हार नहीं मानी। उसने सबसे पहले हैदराबाद में एक इंटर्नशिप की, जहां उसने खुद को साबित किया और नई चीजें सीखीं। इसके बाद वो बेंगलुरु शिफ्ट हो गई, जहां उसने एक और इंटर्नशिप जॉइन की। यहीं से उसकी किस्मत ने करवट ली। अपने प्रदर्शन और लगातार मेहनत के दम पर उसे प्री-प्लेसमेंट ऑफर (पीपीओ) मिला, जो आगे चलकर 38 लाख रुपये सालाना के शानदार पैकेज में तब्दील हो गया। पोस्ट शेयर करने वाली यूजर ने अपनी दोस्त की तारीफ करते हुए लिखा कि वो लगातार मेहनत करती रही, सीखती रही और आखिरकार उसकी वो इंटर्नशिप एक पीपीओ में बदल गई।
लोगों की सोच पर उठाए सवाल
पोस्ट में एक दिलचस्प पहलू भी सामने आया। यूजर ने बताया कि आज भले ही अखबारों में उसकी तस्वीर छप रही हो और हर कोई उसकी तारीफ कर रहा हो, लेकिन लोग अब भी इसे सिर्फ किस्मत का खेल मानते हैं, जबकि हकीकत में यह सालों की मेहनत का नतीजा है। यह बात कई लोगों को झकझोर गई, क्योंकि अक्सर देखा जाता है कि सफलता के पीछे छिपी मेहनत को नजरअंदाज कर दिया जाता है और सिर्फ किस्मत को श्रेय दे दिया जाता है।
कॉलेज पर लगाया आरोप
इस पूरी कहानी का सबसे चर्चित हिस्सा वो रहा, जिसमें यूजर ने युवती के कॉलेज पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि जिस कॉलेज का इस लड़की की सफलता में कोई हाथ नहीं था, वही कॉलेज अब अपनी ब्रांडिंग के लिए उसकी तस्वीर बैनर पर लगाकर खुद की तारीफ बटोर रहा है। यह बात सुनकर सोशल मीडिया पर लोग भड़क गए और कई यूजर्स ने कॉलेजों की इस आदत की जमकर आलोचना की। इसके बावजूद, यह युवती आज भी बेहद जमीन से जुड़ी हुई है। इतनी तारीफ और वायरल होने के बाद भी उसके अंदर कोई घमंड नहीं आया, जो उसे और भी खास बनाता है।
सोशल मीडिया पर मचा तहलका
यह पोस्ट सामने आते ही सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गई। एक यूजर ने मजाकिया अंदाज में लिखा कि कॉलेज का श्रेय लेना ऐसा है जैसे कोई मौसम अच्छा होने का श्रेय खुद ले ले। वहीं दूसरे यूजर ने अपना अनुभव शेयर करते हुए बताया कि उनके एक दोस्त के साथ भी ऐसा ही हुआ था, जब उसे एक टॉप एमएनसी में नौकरी मिली तो उनके कॉलेज के एचओडी ने प्रमोशन के लिए उसकी फोटो मांगी। एक और यूजर ने लिखा कि लगातार मेहनत, दृढ़ इच्छाशक्ति और हार न मानने वाला रवैया आखिरकार रंग लाता है।
बिना कैंपस प्लेसमेंट के कैसे मिलती है अच्छी नौकरी
गौरतलब है कि कैंपस प्लेसमेंट के बिना भी अच्छी नौकरी पाने के कई तरीके हैं। ऑफ-कैंपस इंटर्नशिप के जरिए अनुभव हासिल करना, मजबूत प्रोजेक्ट पोर्टफोलियो बनाना और कोडिंग जैसी डिमांड वाली स्किल्स सीखना इसमें सबसे अहम माना जाता है। इसके अलावा एआई टूल्स का इस्तेमाल करना, रोल-स्पेसिफिक प्रोजेक्ट बनाकर सीधे हायरिंग मैनेजर्स तक पहुंचाना और सिर्फ जॉब अप्लाई करने के बजाय रिक्रूटर्स के सामने अपनी विजिबिलिटी बढ़ाना भी कारगर साबित होता है।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव


