TET : विशेष शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य है या नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से पूछा सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से यह बताने को कहा कि क्या विशेष शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) जरूरी योग्यता है? शीर्ष अदालत ने इस बारे में बिहार सरकार को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से यह बताने को कहा कि क्या विशेष शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टेट) जरूरी योग्यता है? शीर्ष अदालत ने इस बारे में बिहार सरकार को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ बिहार सहित कई राज्यों में विशेष शिक्षकों की भर्ती से जुड़ी याचिकाओं पर विचार कर रही है।
बिहार सरकार के नियम
सुनवाई के दौरान मामले में नियुक्त न्याय मित्र ने पीठ से कहा कि विशेष शिक्षकों की नियुक्ति के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करना भी एक जरूरी योग्यता है। इस पर जस्टिस दत्ता ने कहा कि बिहार सरकार द्वारा जारी भर्ती विज्ञापन/नियमों में ऐसी कोई शर्त नहीं बताई गई है। उन्होंने बिहार से पूछा कि आपके नियमों में टेट की जरूरत कहां है? जस्टिस दत्ता ने न्याय मित्र के तर्क पर सवाल उठाते हुए कहा कि नियमों में टेट की अनिवार्यता स्कूल शिक्षकों के लिए है, न कि विशेष स्कूल शिक्षक के लिए। उन्होंने कहा कि नियम-III लागू नहीं होगा क्योंकि यह स्कूल शिक्षकों पर लागू होता है, जिसमें विशेष स्कूल के शिक्षक शामिल नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि विशेष शिक्षकों के मामले में सिर्फ भारतीय पुनर्वास परिषद (आरसीआई) द्वारा लागू व मान्यता दी गई योग्यता ही लागू होगी।
आरसीआई की स्थिति
याचिकाकर्ता रजनीश कुमार पांडेय की ओर से पेश अधिवक्ता ने पीठ से कहा कि आरसीआई ने अपने हलफनामे में कहा कि विशेष शिक्षकों के लिए टेट पास करना जरूरी नहीं है और यदि टेट को जरूरी बनाना है, तो यह सामान्य टेट नहीं हो सकता, इसे खास तौर पर विशेष बच्चों की जरूरतों के हिसाब से तैयार करना होगा।
सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि बिहार में विशेष शिक्षकों के लिए मंजूर किए गए 7,279 पदों में से 816 पद अनुबंध पर काम करने वाले शिक्षकों के लिए आरक्षित थे। पीठ को बताया गया कि जिन 788 उम्मीदवारों के दस्तावेजों की जांच की गई, उनमें से 139 उम्मीदवारों के पास आरसीआई और टेट दोनों योग्यताएं थीं। बाकी शेष 649 उम्मीदवारों के पास टेट योग्यता नहीं थी, इसलिए उनके नामों की नियुक्ति के लिए सिफारिश नहीं की गई। मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी। उस दिन दिल्ली, झारखंड, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश में विशेष शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़े मामलों पर सुनवाई होगी।


