TET : टीईटी पर SC के फैसले से 20 लाख शिक्षकों की नौकरी खतरे में, बैचेनी बढ़ी, अब क्या है प्लान और विकल्प

Pankaj Vijay लाइव हिन्दुस्तान
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शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्यता मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा शुक्रवार को दिए गए निर्णय से देश के करीब 25 लाख शिक्षकों की नौकरी खतरे में है। शीर्ष अदालत में पुनर्विचार याचिकाएं खारिज होने के बाद लाखों टीचरों में बैचेनी बढ़ गई है।

TET : टीईटी पर SC के फैसले से 20 लाख शिक्षकों की नौकरी खतरे में, बैचेनी बढ़ी, अब क्या है प्लान और विकल्प

शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्यता मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा शुक्रवार को दिए गए निर्णय से देश के करीब 25 लाख शिक्षकों की नौकरी खतरे में है। शीर्ष अदालत में पुनर्विचार याचिकाएं खारिज होने के बाद लाखों टीचरों में बैचेनी बढ़ गई है। नॉन टीईटी क्वालिफाइड टीचरों के बीच मायूसी का माहौल है। कोर्ट के फैसले के बाद शिक्षक संगठनों ने कड़ी नाराजगी जताई है। इस निर्णय से असंतुष्ट शिक्षकों ने मामले में सड़क से संसद तक अब आरपार की लड़ाई लड़ने की बात कही है। टीईटी मामले में उत्तर प्रदेश के 1.86 लाख से अधिक और देश भर में 20 लाख से अधिक शिक्षक प्रभावित होंगे। एमपी में 1.5 लाख शिक्षक इससे प्रभावित होंगे। झारखंड में ऐसे करीब 40 हजार शिक्षक हैं, जिन्होंने टेट पास नहीं की है।

सुप्रीम कोर्ट ने टीईटी पास करने की डेडलाइन एक साल और बढ़ाई

शीर्ष अदालत ने टीईटी को अनिवार्य बताते हुए सेवा में बने रहने के लिए यह परीक्षा पास करने की समय सीमा 31 अगस्त, 2028 तक बढ़ा दी। पहले यह 31 अगस्त 2027 थी।

देश के लाखों शिक्षकों की नौकरी पर तलवार

टीचरों को नौकरी में बने रहने या प्रमोशन पाने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य करने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से देश भर के लाखों प्राइमरी शिक्षकों की नौकरी पर तलवार लटक गई है। यूपी, झारखंड, एमपी व राजस्थान समेत देश के विभिन्न राज्यों में ऐसे लाखों शिक्षक हैं जो बगैर टीईटी पास किए वर्षों से स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। अब इन टीचरों को 3 साल ( 31 अगस्त 2028 तक , फैसले की तिथि सितंबर 2025 के बाद 3 साल की मोहलत) में टीईटी पास करना ही होगा वरना या तो इन्हें इस्तीफा देना होगा या फिर इन्हें जबरन रिटायर कर दिया जाएगा। इस कड़े फैसले से सिर्फ उन्हें छूट मिलेगी जिनकी नौकरी 5 साल की बची है। लेकिन इन्हें भी अगर प्रमोशन चाहिए तो टीईटी पास करना ही पड़ेगा। ऐसे में सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किए जाने के फैसले के खिलाफ तमिलनाडु, एमपी व यूपी समेत कई राज्यों ने पुनर्विचार याचिका दायर की थी।

अब क्या है मांग

- अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के महासचिव दिलीप चौहान ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह अध्यादेश लाकर शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट दिलाए।

- महासंघ के संयोजक व ऑल इंडिया बीटीसी शिक्षक संघ के अध्यक्ष अनिल यादव का कहना है कि शिक्षक एकजुट होकर मजबूती के साथ आंदोलन शुरू करेंगे।

- टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा हम इस मामले में हार नहीं मानेंगे और अधिवक्ताओं से राय लेकर इसमें क्यूरेटिव पिटीशन डालेंगे। उन्होंने कहा कि सड़क पर भी आंदोलन दोबारा शुरू करेंगे।

- विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी ने कहा कि शिक्षकों ने हमेशा कानून, संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास रखते हुए अपनी लड़ाई लड़ी है। किंतु लंबे समय से लंबित व न्यायोचित मुद्दों पर शिक्षकों को निराशा मिलना काफी पीड़ादायक है। विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी ने कहा कि शिक्षकों ने हमेशा कानून, संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास रखते हुए अपनी लड़ाई लड़ी है। किंतु लंबे समय से लंबित व न्यायोचित मुद्दों पर शिक्षकों को निराशा मिलना काफी पीड़ादायक है।

राज्यों को आदेश-साल में दो बार हो टेट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शिक्षकों को टेट पास करने के लिए पूरा मौका मिलना चाहिए। इसलिए राज्य सरकारें नियमित रूप से साल में दो बार टेट का आयोजन करें। ताकि शिक्षक से आसानी से पूरा कर सके।

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लेखक के बारे में

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पंकज विजय| वरिष्ठ पत्रकार

शॉर्ट बायो पंकज विजय एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 15 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में livehindustan.com में असिस्टेंट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। वे करियर, स्कूल व हायर एजुकेशन, जॉब्स से जुड़े विषयों पर खबर लेखन और विश्लेषण में विशेषज्ञता रखते हैं। 9 वर्षों से यहां इसी भूमिका में हैं। सरकारी भर्तियों, बोर्ड व एंट्रेंस एग्जाम, प्रतियोगी परीक्षाओं, उनके परिणाम, बदलते दौर में करियर की नई राहों, कोर्स, एडमिशन एवं नए जमाने के रोजगार के लिए जरूरी स्किल्स से जुड़ी अपडेट तेजी से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं।


15 से अधिक सालों का अनुभव

पंकज विजय ने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की। अमर उजाला समाचार पत्र में रिसर्च, संपादकीय और करियर एजुकेशन जॉब्स डेस्क पर काम किया। यहां उन्हें फीचर लेखन व रिपोर्टिंग का भी मौका मिला। इसके बाद उन्होंने आज तक डिजिटल में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। आज तक वेबसाइट पर राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और एजुकेशन व रोजगार जगत से जुड़ी खबरें लिखीं। इसके बाद एनडीटीवी ऑनलाइन में एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर इस विषय में अपनी समझ को और व्यापक बनाया। एनडीटीवी की पारी के बाद वे लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े और बीते 9 वर्षों से करियर एजुकेशन जॉब्स सेक्शन पर काम कर रहे हैं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि

भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी), दिल्ली से हिन्दी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा, गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में एमए व दिल्ली यूनिवर्सिटी से इतिहास में बीए ऑनर्स किया है। एनसीसी सी सर्टिफिकेट होल्डर हैं जिसके चलते उन्हें रक्षा क्षेत्र जैसे पुलिस व सेनाओं की भर्तियों की बेहतर समझ है।


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तमाम तरह के करियर, स्कूल एजुकेशन, हायर एजुकेशन, भर्तियों, प्रतियोगी परीक्षाओं, एंट्रेंस एग्जाम, नौकरी के लिए जरूरी स्किल्स एवं बेरोजगार युवाओं के मुद्दों को लेकर पंकज के पास गहरी समझ है। उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के कई टॉपरों के इंटरव्यू किए हैं। उनकी लिखी सक्सेस स्टोरीज युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को प्रेरित करती रही हैं। पंकज का मानना है कि विश्वसनीयता, पारदर्शिता और तथ्यपरकता ही पत्रकारिता की असली ताकत है। उनका लक्ष्य स्कूली छात्रों व बेहतर करियर एवं सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को आसान भाषा में सटीक, तेज और भरोसेमंद जानकारी देना है।


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