TET अनिवार्यता! महाराष्ट्र के 5 में से 4 जिला परिषद शिक्षक टीईटी पास नहीं, नौकरी पर संकट
TET Exam: महाराष्ट्र के जिला परिषद स्कूलों में पढ़ाने वाले 78% शिक्षकों ने अनिवार्य TET परीक्षा पास नहीं की है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े आदेश के बाद सरकार अब उन्हें अगस्त 2028 तक यह परीक्षा पास करने का मौका देगी।

TET Mandatory: महाराष्ट्र के सरकारी और जिला परिषद (ZP) स्कूलों से एक ऐसी चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है, जिसने राज्य की स्कूली शिक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा का अधिकार कानून (RTE Act, 2009) के तहत स्कूलों में पढ़ाने के लिए 'शिक्षक पात्रता परीक्षा' (TET) पास करना अनिवार्य है। लेकिन महाराष्ट्र सरकार के जनजातीय विकास विभाग द्वारा की गई एक हालिया समीक्षा में यह खुलासा हुआ है कि राज्य के जिला परिषद स्कूलों में कार्यरत लगभग 78 प्रतिशत यानी करीब 5 में से 4 शिक्षक टीईटी पास नहीं हैं।
सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद अब इन बिना TET योग्यता वाले कार्यरत शिक्षकों के सामने अपनी नौकरी बचाने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। हालांकि, कोर्ट ने सहानुभूति दिखाते हुए इन शिक्षकों को अपनी योग्यता साबित करने के लिए अगस्त 2028 तक का समय दिया है।
आंकड़ों की जुबानी: सिर्फ 22% शिक्षकों के पास ही योग्यता
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र की 34 जिला परिषदों में शिक्षकों के कुल 1,87,389 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 1,75,155 पदों पर वर्तमान में शिक्षक तैनात हैं। लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इनमें से केवल 38,786 शिक्षकों मात्र 22.14 प्रतिशत ने ही टीईटी परीक्षा पास की है। बाकी के बचे हुए सभी शिक्षक बिना टीईटी पास किए ही सालों से बच्चों को पढ़ा रहे हैं। अगर जिलों की बात करें, तो 'पालघर' जिला इस रेस में सबसे आगे है, जहां सबसे ज्यादा यानी 35% से अधिक शिक्षक टीईटी क्वालिफाइड हैं। इसके विपरीत धुले, गढ़चिरौली और चंद्रपुर जिलों की हालत सबसे खराब है, जहां महज 9% से भी कम शिक्षकों के पास यह TET अनिवार्य सर्टिफिकेट है।
पुराने शिक्षकों में बढ़ा डर: "जब भर्ती हुए, तब परीक्षा ही नहीं थी"
सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज करते हुए साफ कह दिया है कि "बच्चों के भविष्य की कीमत पर शिक्षकों की सेवा जारी नहीं रखी जा सकती।" कोर्ट का यह नियम उन शिक्षकों पर भी लागू हो रहा है, जिनकी नियुक्ति 2011 में टीईटी नियम लागू होने से पहले हुई थी।
साल 2010 से पढ़ा रहे एक शिक्षक ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, "जब हमारी भर्ती हुई थी, तब यह परीक्षा अस्तित्व में ही नहीं थी। अब सालों बाद हम पर यह परीक्षा थोपना और नौकरी से निकालने की चेतावनी देना हमारे साथ नाइंसाफी है।
"सरकार ने उठाया कदम: साल में दो बार होगी परीक्षा
इस संकट को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने अब शिक्षकों के बीच जागरूकता अभियान तेज कर दिया है। सरकार ने शिक्षकों को अधिक मौके देने के लिए टीईटी परीक्षा को साल में दो बार आयोजित करने का फैसला किया है। वहीं, शिक्षक संगठनों का कहना है कि सरकार को केवल परीक्षा नहीं करानी चाहिए, बल्कि पुराने शिक्षकों की उम्र को देखते हुए स्टडी मटेरियल, विशेष कोचिंग और कट-ऑफ मार्क्स में थोड़ी राहत भी देनी चाहिए, क्योंकि सालों से पढ़ा रहे शिक्षकों के लिए दोबारा छात्र बनकर इतनी कठिन परीक्षा पास करना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है।
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