NEET वालों की मौज, दाखिले से पहले इस राज्य में बढ़ीं 100 नई MBBS की सीटें
तमिलनाडु में डॉक्टर बनने का सपना देख रहे छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी है। सरकार ने नमक्कल और तिरुप्पुर के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की 100 नई सीटें बढ़ा दी हैं।

नीट परीक्षा 2026 के दाखिले से पहले एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। तमिलनाडु के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस (MBBS) की सीटों में बड़ा इजाफा हुआ है, जिससे डॉक्टर बनने की रेस में शामिल कई छात्रों के चेहरे खिल उठे हैं। तमिलनाडु में मेडिकल की पढ़ाई का ढांचा वैसे भी काफी मजबूत माना जाता है, लेकिन अब इसमें और भी ज्यादा गुंजाइश बन गई है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने हाल ही में एक बेहद अहम फैसला लेते हुए राज्य के दो प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 50-50 नई एमबीबीएस सीटें बढ़ाने को अपनी हरी झंडी दे दी है। ये दोनों खुशकिस्मत कॉलेज नमक्कल और तिरुप्पुर में मौजूद हैं।
इस नई और अहम मंजूरी के बाद राज्य के भीतर कुल सरकारी एमबीबीएस सीटों का आंकड़ा 9,950 से छलांग लगाकर सीधा 10,050 हो गया है। चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान निदेशालय के आला अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि नमक्कल और तिरुप्पुर के इन सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पहले से ही 100-100 एमबीबीएस सीटें मौजूद थीं। अब इस ताजा इजाफे के बाद, इन दोनों ही जगहों पर छात्रों की कुल इंटेक क्षमता 150-150 सीटों की हो जाएगी। इसके साथ ही, राज्य सरकार ने दो और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटें बढ़ाने की अर्जी नेशनल मेडिकल कमीशन को भेजी हुई है। अगर वहां से भी जल्द ही सकारात्मक जवाब आ जाता है, तो छात्रों के लिए अवसरों के दरवाजे और भी चौड़े हो जाएंगे।
राज्य में मेडिकल सीटों का पूरा गणित
अगर हम पूरे तमिलनाडु के मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और सीटों के बंटवारे पर एक नजर डालें, तो तस्वीर काफी साफ और बड़ी नजर आती है। मौजूदा समय में, राज्य भर में कुल 36 सरकारी मेडिकल कॉलेज काम कर रहे हैं, जिनमें कुल 5,050 एमबीबीएस सीटें मौजूद हैं। इन 5,050 सीटों में कोयंबटूर स्थित राज्य द्वारा संचालित ईएसआई (ESI) मेडिकल कॉलेज की 150 सीटें भी पूरी तरह से शामिल हैं।
सरकारी कॉलेजों के अलावा, प्राइवेट संस्थानों में भी सरकारी कोटे की अच्छी खासी मौजूदगी है। राज्य के विभिन्न सेल्फ-फाइनेंसिंग मेडिकल कॉलेजों में 3,900 सीटें सरकारी कोटे के अंतर्गत आरक्षित हैं, जिससे मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों को काफी मदद मिलती है। वहीं, राज्य की निजी (प्राइवेट) यूनिवर्सिटीज में भी 850 सीटें उपलब्ध हैं। इन सभी सीटों को भरने की पूरी जिम्मेदारी चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान निदेशालय के अधीन काम करने वाली स्टेट सिलेक्शन कमेटी के कंधों पर होती है।
नीट दाखिले से पहले ही आई खुशखबरी
इस नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए दाखिले की सरगर्मी पहले से ही तेज हो चुकी है। सिलेक्शन कमेटी ने बिना कोई देरी किए एमबीबीएस और बीडीएस (BDS) कोर्सेज में एडमिशन के लिए 29 जून से ही ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। यह अपने आप में दिलचस्प है कि नीट-यूजी (NEET-UG) के नतीजे आने से पहले ही एडमिशन फॉर्म भरने का सिलसिला शुरू कर दिया गया था, ताकि आगे की काउंसलिंग में बेवजह का समय खराब न हो।
छात्रों को राहत देते हुए यह भी तय किया गया है कि ऑनलाइन आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख नीट-यूजी 2026 के नतीजे घोषित होने के कम से कम एक हफ्ते बाद तक खुली रहेगी। छात्रों का उत्साह इसी बात से देखा जा सकता है कि शनिवार तक ही तकरीबन 43,000 उम्मीदवार सरकारी और मैनेजमेंट कोटे की सीटों के लिए अपनी दावेदारी पेश कर चुके हैं। जो भी छात्र इन कोर्सेज के लिए आवेदन करना चाहते हैं, चाहे वह सरकारी मेडिकल या डेंटल कॉलेज हों, सेल्फ-फाइनेंसिंग कॉलेजों का सरकारी कोटा हो, या फिर मैनेजमेंट और एनआरआई (NRI) कोटा वे सभी आधिकारिक वेबसाइट www.tnmedicalselection.org पर जाकर पूरी जानकारी हासिल कर सकते हैं।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
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हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
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हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
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हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
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