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व्हीलचेयर पर बैठ सूरज तिवारी ने तीन उंगलियों से दिया UPSC का एग्जान, बन गए IAS

व्हीलचेयर पर बैठ सूरज तिवारी ने तीन उंगलियों से दिया UPSC का एग्जान, बन गए IAS

संक्षेप:

suraj tiwari upsc success story: हादसे में सब कुछ खोने के बाद भी सूरज तिवारी ने हिम्मत नहीं हारी। व्हीलचेयर पर बैठकर UPSC पास कर उन्होंने साबित किया कि जज्बा ही असली ताकत है।

Jan 03, 2026 04:12 pm ISTHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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suraj tiwari upsc success story: जिंदगी जब सबसे कठिन इम्तिहान लेती है, तब कुछ लोग हालात के आगे घुटने टेक देते हैं और कुछ लोग हालात को ही बदल डालते हैं। सूरज तिवारी उन्हीं चुनिंदा लोगों में से हैं, जिनकी कहानी यह साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों तो किसी भी कमी को कमजोरी नहीं बनने दिया जा सकता। एक दर्दनाक हादसे में हाथ-पैर गंवाने के बावजूद सूरज ने न सिर्फ खुद को संभाला, बल्कि व्हीलचेयर पर बैठकर, सिर्फ तीन उंगलियों के सहारे, देश की सबसे कठिन परीक्षा UPSC को पास कर इतिहास रच दिया।

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साधारण परिवार से असाधारण सफर

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले की कुरावली तहसील स्थित मोहल्ला घरनाजपुर के रहने वाले सूरज तिवारी की शुरुआती पढ़ाई नगर के महर्षि परशुराम स्कूल से हुई। उन्होंने वर्ष 2011 में एसबीआरएल इंटर कॉलेज मैनपुरी से हाईस्कूल और 2014 में संपूर्णानंद इंटर कॉलेज अरम सराय, बेवर से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की। सूरज के पिता राजेश तिवारी दर्जी का काम करते हैं। सीमित संसाधनों वाले परिवार से आने वाले सूरज के सपने हमेशा बड़े रहे, लेकिन जिंदगी ने उनके सामने एक ऐसा मोड़ ला दिया, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।

एक हादसा जिसने सब कुछ बदल दिया

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 24 जनवरी 2017 को सूरज ट्रेन से सफर कर रहे थे, तभी दादरी के पास एक भीषण हादसा हो गया। इस दुर्घटना में उन्होंने दोनों पैर, दायां हाथ और बाएं हाथ की दो उंगलियां खो दीं। यह वह पल था, जहां आमतौर पर इंसान टूट जाता है, लेकिन सूरज ने इसे अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत बनाया। हादसे के बाद वह करीब चार महीने अस्पताल में रहे और तीन महीने तक पूरी तरह बेड रेस्ट पर रहे। शारीरिक दर्द के साथ मानसिक संघर्ष भी कम नहीं था, लेकिन उनके हौसले ने हार मानने से इनकार कर दिया।

संघर्ष से शिक्षा की नई शुरुआत

इस भयानक हादसे के बाद भी सूरज का जज्बा नहीं टूटा। वर्ष 2018 में उन्होंने दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) से नए सिरे से बीए में दाखिला लिया। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और 2021 में बीए की परीक्षा पास की। इसके बाद उन्होंने एमए में प्रवेश लिया। पढ़ाई के दौरान उन्होंने घर पर रहकर पूरी तरह सेल्फ-स्टडी पर भरोसा किया। न कोचिंग, न बड़े संसाधन बल्कि बस आत्मविश्वास और अनुशासन ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बने।

बिना कोचिंग पहले प्रयास में UPSC

साल 2022 में सूरज तिवारी ने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में 971वीं रैंक हासिल की। खास बात यह रही कि यह उनका पहला ही प्रयास था और उन्होंने किसी भी तरह की कोचिंग नहीं ली थी। व्हीलचेयर पर बैठकर, तीन उंगलियों की मदद से लिखते हुए, उन्होंने यह साबित कर दिया कि शारीरिक सीमाएं सपनों की उड़ान को नहीं रोक सकतीं।

इंटरव्यू में भी दिखाई आत्मविश्वास की चमक

UPSC इंटरव्यू के दौरान भी सूरज का आत्मविश्वास देखने लायक था। एक अधिकारी ने उनसे पूछा कि वह एक स्पेशल कैटेगरी से आते हैं, तो क्या भविष्य में अपनी कैटेगरी के लोगों के लिए कोई योजना बनाना चाहेंगे। इस पर सूरज ने बेहद सधे और आत्मसम्मान से भरे शब्दों में जवाब दिया, “मैं किसी स्पेशल कैटेगरी से नहीं आता। मैं आप ही की तरह हर काम करने में सक्षम हूं।” उनका यह जवाब सुनकर इंटरव्यू पैनल में मौजूद अधिकारी भी प्रभावित हुए और उनकी खुलकर सराहना की।

हर किसी के लिए प्रेरणा

सूरज तिवारी की सफलता सिर्फ एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस जिद, उस भरोसे और उस हौसले की मिसाल है, जो इंसान को असंभव से संभव की ओर ले जाता है। उनके पास हाथ नहीं थे, लेकिन हौसला था। पैर नहीं थे, लेकिन सपनों को उड़ान देने का जज्बा था। आज सूरज की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की रोशनी है, जो किसी न किसी संघर्ष से जूझ रहे हैं।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
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- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव

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