ट्रेन हादसे ने छीना सब कुछ, गंवाए हाथ-पैर; 3 उंगलियों के सहारे सूरज तिवारी ने कैसे किया UPSC क्रैक

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suraj tiwari upsc success story : सूरज तिवारी ने 2017 के भीषण ट्रेन हादसे के बाद भी हार नहीं मानी और 2023 में UPSC परीक्षा पास कर IIS अधिकारी बने। जानिए सूरज तिवारी के संघर्ष, आत्मविश्वास और सफलता की प्रेरणादायक कहानी।

ट्रेन हादसे ने छीना सब कुछ, गंवाए हाथ-पैर; 3 उंगलियों के सहारे सूरज तिवारी ने कैसे किया UPSC क्रैक

suraj tiwari upsc success story : कभी कभी जिंदगी इंसान को ऐसी परीक्षा में डाल देती है जहां हर रास्ता बंद नजर आता है। लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो अंधेरे में भी उम्मीद की रोशनी ढूंढ लेते हैं। सूरज तिवारी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। एक भयानक ट्रेन हादसे में अपने दोनों पैर, एक हाथ और उंगलियां खोने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। व्हीलचेयर पर बैठकर उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक UPSC को पहले ही प्रयास में पास कर दिखाया।

हादसे ने बदल दी जिंदगी

साल 2017 में सूरज तिवारी के जीवन में ऐसा तूफान आया, जिसने सब कुछ बदल दिया। नोएडा में एक निजी कंपनी में काम करने वाले सूरज अपने घर मैनपुरी जा रहे थे, तभी एक भयानक ट्रेन हादसे का शिकार हो गए। इस दुर्घटना में उन्होंने अपने दोनों पैर घुटनों के नीचे से खो दिए, दाहिना हाथ चला गया और बाएं हाथ की दो उंगलियां भी नहीं रहीं। यह हादसा किसी भी इंसान को तोड़ सकता था, लेकिन सूरज ने इसे अपनी जिंदगी का अंत नहीं बनने दिया। उनके भीतर कहीं न कहीं एक जिद थी कि वह इस मुश्किल को हराकर दिखाएंगे।

अस्पताल के बिस्तर से लिया बड़ा फैसला

जब सूरज का इलाज चल रहा था, तब वह दिल्ली के एम्स अस्पताल में थे। उसी दौरान उनके मन में एक विचार आया जिसने उनकी पूरी जिंदगी की दिशा बदल दी। उन्होंने सोचा कि यह हादसा उनकी कहानी का अंत नहीं है, बल्कि एक नई शुरुआत हो सकती है। इसी सोच के साथ उन्होंने UPSC की तैयारी करने का फैसला लिया। उन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए जेएनयू में रूसी भाषा में एमए में दाखिला लिया।

तीन उंगलियों के साहारे शुरू की तैयारी

शारीरिक स्थिति के कारण सूरज किसी कोचिंग संस्थान में जाकर पढ़ाई नहीं कर सकते थे। लेकिन उन्होंने इसे कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने घर पर रहकर खुद ही पढ़ाई शुरू की। केवल तीन उंगलियों के सहारे नोट्स बनाना, पढ़ना और लगातार मेहनत करना आसान नहीं था। लेकिन सूरज ने हर मुश्किल को चुनौती की तरह लिया। उन्होंने खुद पर भरोसा रखा और बिना किसी कोचिंग के UPSC की तैयारी पूरी की।

पहले ही प्रयास में हासिल की सफलता

सूरज की मेहनत और लगन का नतीजा तब सामने आया जब उन्होंने 2023 में UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली। उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में 917वीं रैंक हासिल की। यह उपलब्धि इसलिए और भी खास बन जाती है क्योंकि उन्होंने यह सफलता इतनी कठिन परिस्थितियों में हासिल की। आज वह भारतीय सूचना सेवा में अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।

परिवार ने झेला मुश्किलों का दौर

सूरज की जिंदगी का यह संघर्ष केवल उनका अकेले का नहीं था, बल्कि पूरे परिवार ने इसे जिया। उनके इलाज का पूरा खर्च उनके पिता राजेश तिवारी ने उठाया जो पेशे से एक दर्जी हैं। इसी दौरान उनके परिवार पर एक और बड़ा दुख आया, जब उनके भाई की 2017 में मृत्यु हो गई। उनकी मां आशा देवी ने उस समय को परिवार के जीवन का सबसे अंधेरा दौर बताया। इतनी परेशानियों के बावजूद परिवार ने हिम्मत नहीं हारी और सूरज के साथ खड़ा रहा।

आज बन चुके हैं हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा

आज सूरज तिवारी एक सरकारी अधिकारी हैं और उनकी कहानी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर इंसान के अंदर कुछ कर गुजरने का जुनून हो, तो कोई भी मुश्किल उसे रोक नहीं सकती।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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