बच्चे के जन्म के बाद महिला IPS फिट तो ट्रेनिंग से क्यों रोक रही सरकार, क्या है उर्वशी सेंगर मामला, UPSC में क्या थी रैंक

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से 1993 की उस पॉलिसी को लेकर जवाब मांगा है कि जिसके तहत गर्भवती आईपीएस ट्रेनी अफसरों को ट्रेनिंग लेने से रोका जाता है। इसमें डिलिवरी के बाद महिला आईपीएस ट्रेनी अफसर को एक साल तक ट्रेनिंग करने की अनुमति नहीं दी जाती।

बच्चे के जन्म के बाद महिला IPS फिट तो ट्रेनिंग से क्यों रोक रही सरकार, क्या है उर्वशी सेंगर मामला, UPSC में क्या थी रैंक

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से 1993 की उस पॉलिसी को लेकर जवाब मांगा है कि जिसके तहत गर्भवती आईपीएस ट्रेनी अफसरों ( भारतीय पुलिस सेवा IPS प्रोबेशनर) को ट्रेनिंग लेने से रोका जाता है। सरकार की इस नीति में कहा गया था कि बच्चे के जन्म के बाद महिला आईपीएस ट्रेनी अफसर को एक साल तक ट्रेनिंग करने की अनुमति नहीं दी जाती। शीर्ष अदालत ने बुधवार को कहा कि महिलाओं के फायदे के लिए बनाया गया नियम उन्हें मौके देने से इनकार करने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, अगर वे मेडिकली फिट हैं। आईपीएस ऑफिसर उर्वशी सेंगर की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र से गुरुवार तक जवाब मांगा और पूछा कि क्या उन्हें इस साल जून में शुरू हुए फेज-II ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल होने की इजाजत दी जा सकती है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि अधिकारी फिट है तो उन्हें ट्रेनिंग से क्यों रोका जा रहा है? पीठ ने कहा कि इस नीति को महिला के हित में पढ़ा जाना चाहिए, न कि उसके खिलाफ, जैसा कि इस मामले में किया गया। नीति इसलिए बनाया गया था ताकि महिला आईपीएस अधिकारी को प्रोबेशन के दौरान शारीरिक ट्रेनिंग करने के लिए मजबूर न किया जाए। पीठ ने कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि जो अधिकारी मेडिकल रूप से फिट हैं और ट्रेनिंग शुरू करना चाहती हैं, उसे एक साल पूरा होने से पहले ट्रेनिंग करने से रोक दिया जाए।

उर्वशी सेंगर ने दी हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती, UPSC में थी 474वीं रैंक

महिला आईपीएस अधिकारी ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें सरदार वल्लभभाई पटेल पुलिस अकादमी के उस फैसले को सही माना गया था, जिसमें उसे फेज-II ट्रेनिंग में शामिल करने से इनकार कर दिया गया था। आपको बता दें कि उर्वशी सेंगर ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2022 में 474वीं रैंक हासिल की थी। उन्हें मेन्स में 769 और इ्ंटरव्यू में 182 अंक मिले थे। कुल 951 अंक थे। ओबीसी वर्ग अभ्यर्थी उर्वशी को आईपीएस सर्विसेज और एमपी कैडर अलॉट हुआ था।

ट्रेनिंग लेने का अधिकार छीनने के लिए यह नियम नहीं बना

होम मिनिस्ट्री के 1993 के ऑफिस मेमोरेंडम (OM) की वैधता की जांच करते हुए बेंच ने कहा, "यह कानून के तहत महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाया गया एक फायदेमंद नियम है, न कि ट्रेनिंग लेने का अधिकार छीनने के लिए, अगर वे इसके लिए फिट हैं।" कोर्ट ने केंद्र से आगे पूछा, "जब इस OM का मकसद एक फिट महिला को ट्रेनिंग करने में मदद करना है, तो अगर वह फिट है तो आप उसे क्यों रोक रहे हैं?"

एक ही नियम सभी पर लागू करना सही नहीं

बेंच ने यह भी कहा कि एक ही नियम सभी पर लागू करना सही नहीं हो सकता, क्योंकि कुछ महिलाएं बच्चे के जन्म के नौ महीने के अंदर ट्रेनिंग फिर से शुरू करने के लिए फिट हो सकती हैं, जबकि दूसरों को ज्यादा समय लग सकता है। कोर्ट ने संकेत दिया कि ऐसे मामलों का आकलन अलग-अलग किया जाना चाहिए, न कि किसी सख्त पॉलिसी के जरिए।

कहीं ऐसे दावों की बाढ़ न आ जाए

केंद्र ने पॉलिसी में किसी भी तरह की ढील का विरोध करते हुए कहा कि एक मामले में राहत देने से ऐसे ही और दावों की बाढ़ आ सकती है। हालांकि, सेंगर के वकील ने कोर्ट को बताया कि पहले भी ऐसे दो मामलों में छूट दी गई थी, जिसमें महिला अधिकारियों को 1993 की पॉलिसी के बावजूद ट्रेनिंग जारी रखने या फिर से शुरू करने की इजाजत दी गई थी।

क्या है सरकार की यह पॉलिसी

पॉलिसी के तहत महिला आईपीएस अधिकारी को बच्चे के जन्म के बाद एक साल तक ट्रेनिंग से दूर रहना होता है, जिसके बाद ट्रेनिंग फिर से शुरू होती है। इस समय को एक्स्ट्राऑर्डिनरी लीव (खास छुट्टी) माना जाता है और इससे सीनियरिटी पर कोई असर नहीं पड़ता।

सुप्रीम कोर्ट इस बात की जांच कर रहा है कि क्या मेडिकल साइंस में तरक्की और समानता की संवैधानिक गारंटी को देखते हुए इस तरह की पूरी तरह से रोक जारी रह सकती है, या फिर फैसले व्यक्तिगत मेडिकल जांच और फिटनेस के आधार पर लिए जाने चाहिए।

उर्वशी सेंगर का मामला

मध्य प्रदेश कैडर में नियुक्त 2023 बैच की सीधी भर्ती वाली IPS अधिकारी उर्वशी सेंगर ने नवंबर 2023 में सरदार वल्लभभाई पटेल नेशनल पुलिस अकादमी में फ़ेज़-1 की ट्रेनिंग शुरू की।

अप्रैल 2025 में फेज-2 की ट्रेनिंग के दौरान वह गर्भवती हो गईं और अधिकारियों को इसकी जानकारी दी। इस फेज में मुख्य रूप से क्लासरूम सेशन, एकेडमिक मॉड्यूल और इंस्टीट्यूशनल अटैचमेंट शामिल होते हैं। उन्होंने 20 सितंबर 2025 को बच्चे को जन्म दिया। बच्चे के जन्म के लगभग नौ महीने बाद, 20 जून 2026 को शुरू होने वाली अगली फेज-2 ट्रेनिंग में शामिल होने के लिए उन्होंने अनुमति मांगी और कहा कि वह मेडिकली फिट हैं। हालांकि, अकादमी ने 1993 के ऑफिस मेमोरेंडम का हवाला देते हुए उनका अनुरोध ठुकरा दिया और उन्हें बताया कि वह केवल अगले बैच के साथ ही शामिल हो सकती हैं।

इसके बाद सेंगर सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) गईं, जिसने 27 मई को एक अंतरिम आदेश में उन्हें मेडिकल फिटनेस और अन्य औपचारिकताओं के आधार पर ट्रेनिंग में शामिल होने की अनुमति दे दी। हालांकि पुलिस अकादमी ने शुरू में 16 जून को उन्हें शामिल होने की अनुमति देने वाला एक पत्र जारी किया था, लेकिन दो दिनों के भीतर ही उस आदेश को वापस ले लिया। बाद में केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट में CAT के आदेश को चुनौती दी, जिसने 22 जून को ट्रिब्यूनल के निर्देश पर रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि इस पॉलिसी का मकसद IPS प्रोबेशनर और नवजात शिशु, दोनों के कल्याण की रक्षा करना है।

सुप्रीम कोर्ट के सामने सेंगर ने तर्क दिया है कि 1993 की पॉलिसी ट्रेनिंग के शारीरिक रूप से कठिन और एकेडमिक चरणों के बीच कोई अंतर नहीं करती है। साथ ही यह आधुनिक ट्रेनिंग के तरीकों, रीजनेबल एकोमोडेशन और लैंगिक समानता के संवैधानिक सिद्धांतों को भी ध्यान में नहीं रखती है।

Pankaj Vijay

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पंकज विजय| वरिष्ठ पत्रकार

शॉर्ट बायो पंकज विजय एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 15 से अधिक वर्षों का अनुभव है। वर्तमान में livehindustan.com में असिस्टेंट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। वे करियर, स्कूल व हायर एजुकेशन, जॉब्स से जुड़े विषयों पर खबर लेखन और विश्लेषण में विशेषज्ञता रखते हैं। 9 वर्षों से यहां इसी भूमिका में हैं। सरकारी भर्तियों, बोर्ड व एंट्रेंस एग्जाम, प्रतियोगी परीक्षाओं, उनके परिणाम, बदलते दौर में करियर की नई राहों, कोर्स, एडमिशन एवं नए जमाने के रोजगार के लिए जरूरी स्किल्स से जुड़ी अपडेट तेजी से पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं।


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