मामला हाई कोर्ट में है, वहीं जाइए; JPSC परीक्षा विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने नहीं सुनी गुहार, बैरन लौटाया

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सुप्रीम कोर्ट ने जेपीएससी परीक्षा रद्द विवाद में दखल से इनकार किया है। कोर्ट ने उम्मीदवारों को झारखंड हाई कोर्ट जाने की सलाह दी है।

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सुप्रीम कोर्ट

जेपीएससी परीक्षा रद्द होने का विवाद सुप्रीम कोर्ट की चौखट तक पहुंचा मगर वहां से भी उम्मीदवारों को झारखंड हाई कोर्ट का ही रास्ता दिखा दिया गया। शनिवार को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की अगुवाई वाली बेंच ने साफ कह दिया कि जब मामला पहले से हाई कोर्ट में लंबित है और वहां रद्दीकरण पर रोक भी लग चुकी है, तो सुप्रीम कोर्ट के दखल देने की फिलहाल कोई गुंजाइश नहीं बनती। यह पूरा विवाद झारखंड लोक सेवा आयोग यानी जेपीएससी की परीक्षा से जुड़ा है, जिसे राज्य सरकार ने रद्द करने का फैसला लिया था। इस फैसले के खिलाफ उन उम्मीदवारों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था जो पहले ही प्रारंभिक परीक्षा पास कर चुके थे। इन याचिकाकर्ताओं की मांग सिर्फ रद्दीकरण के खिलाफ ही नहीं थी, बल्कि वे यह भी चाहते थे कि उन्हें झारखंड न्यायिक सेवा की मुख्य परीक्षा में बैठने की इजाजत दी जाए क्योंकि उन्होंने प्रारंभिक चरण पहले ही सफलतापूर्वक पार कर लिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने गौर किया कि यह मामला पहले से झारखंड हाई कोर्ट के सामने है और वहां पहले ही परीक्षा रद्द करने के आदेश पर रोक लगाई जा चुकी है। बेंच ने इस बात पर जोर दिया कि जब हाई कोर्ट ने रद्दीकरण पर स्टे लगा रखा है, तो फिलहाल ऐसा कोई प्रभावी रद्दीकरण आदेश मौजूद ही नहीं है, जिसमें कोर्ट को दखल देने की जरूरत पड़े। यही तर्क देते हुए बेंच ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया और उम्मीदवारों से कहा कि वे अपनी सारी शिकायतें झारखंड हाई कोर्ट के सामने ही रखें।

सुप्रीम कोर्ट ने साफ लफ्जों में कहा कि हाई कोर्ट पहले से ही इस मामले को देख रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने जोड़ा कि इस स्तर पर वह इस विवाद में हस्तक्षेप नहीं करना चाहती। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि रद्दीकरण से जुड़ी कार्यवाही पहले से हाई कोर्ट में चल रही है, इसलिए वहीं से उम्मीदवारों को राहत मिलने की उम्मीद की जानी चाहिए।

प्री पास करने वाले सुप्रीम कोर्ट पहुंचे

गौरतलब है कि याचिकाकर्ता उम्मीदवारों ने जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा पास करने के बाद ही सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उनकी याचिका में राज्य सरकार के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें परीक्षा रद्द करने की बात कही गई थी। इसके साथ ही उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में अपनी उम्मीदवारी को सुरक्षित रखे जाने की भी मांग रखी थी। उम्मीदवारों की सबसे अहम मांग यही थी कि जिन्होंने प्रारंभिक परीक्षा पास कर ली है, उन्हें झारखंड न्यायिक सेवा मुख्य परीक्षा में बैठने से रोका न जाए। उनका तर्क था कि प्रारंभिक चरण पास करने के बावजूद परीक्षा को लेकर उठे विवाद की वजह से उन्हें अगले चरण से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इन मुद्दों को भी हाई कोर्ट के सामने ही उठाने की सलाह दी।

झारखंड हाई कोर्ट की भूमिका इस पूरे मामले में इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि उसने पहले ही परीक्षा रद्द करने के फैसले पर रोक लगा रखी है। चूंकि मामला पहले से हाई कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने इस स्तर पर उम्मीदवारों की शिकायतों की स्वतंत्र रूप से पड़ताल करना उचित नहीं समझा। बेंच ने यह भी इशारा किया कि जेपीएससी परीक्षा रद्द किए जाने से पीड़ित सभी उम्मीदवार हाई कोर्ट का रुख कर सकते हैं और वहां से उचित राहत मांग सकते हैं।

गौर करने वाली बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से जेपीएससी परीक्षा को लेकर चल रहा मूल विवाद सुलझा नहीं है, न ही यह तय हुआ है कि प्रारंभिक परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों को आखिरकार मुख्य परीक्षा में बैठने दिया जाएगा या नहीं। ये सारे सवाल अब भी झारखंड हाई कोर्ट के सामने ही लंबित रहेंगे। ऐसे में उम्मीदवारों के लिए फिलहाल कानूनी राहत का सीधा रास्ता हाई कोर्ट ही है, जहां परीक्षा रद्द करने से जुड़ी कार्यवाही पहले से चल रही है।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

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