
NEET PG 2025 मामला सुप्रीम कोर्ट में अटका, सुनवाई टली; एडमिशन पर भी सस्पेंस
सुप्रीम कोर्ट ने नीट पीजी 2025 परीक्षा को लेकर पारदर्शिता मामले की सुनवाई टाल दी है। इस फैसले से मेडिकल स्टूडेंट्स की काउंसलिंग और एडमिशन की राह में अनिश्चितता और लंबी हो गई है।
देशभर के हजारों मेडिकल अभ्यर्थियों की धड़कनें इन दिनों तेज हो गई हैं, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने नीट पीजी 2025 की पारदर्शिता पर दाखिल अहम याचिका की सुनवाई दो हफ्ते के लिए टाल दी है। कोर्ट में आज इस मामले की सुनवाई होनी थी, लेकिन अब मेडिकल छात्रों को और इंतजार करना पड़ेगा।

यह याचिका असल में नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) के उस फैसले के खिलाफ है, जिसमें बोर्ड ने परीक्षा के सवालों और जवाबों की पूरी जानकारी न देकर सिर्फ क्वेश्चन आईडी जारी किए थे। चूंकि सवाल और ऑप्शन्स हर उम्मीदवार के लिए शफल थे, ऐसे में अभ्यर्थियों का कहना है कि वे अपने जवाबों को सही तरीके से मिलान ही नहीं कर पा रहे।
क्या है याचिकाकर्ताओं की मांग
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि, “हम कॉपियों की दोबारा जांच नहीं चाहते, बल्कि सिर्फ पारदर्शिता चाहते हैं। हर उम्मीदवार को यह पता चलना चाहिए कि कौन से सवाल आए थे, क्या जवाब दिए गए, सही उत्तर क्या थे और कितने नंबर मिले।”
गौरतलब है कि इस मामले की सुनवाई पहले अक्टूबर में तय थी, लेकिन अभ्यर्थियों की बढ़ती चिंता को देखते हुए इसे 4 सितंबर और फिर 12 सितंबर को सूचीबद्ध किया गया। लेकिन अब दोबारा टलने से छात्रों के सामने काउंसलिंग और एडमिशन टाइमलाइन को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
टल सकती हैं मेडिकल काउंसलिंग
ऐसे में अगर यह विवाद समय रहते सुलझा नहीं, तो न सिर्फ मेडिकल काउंसलिंग टल सकती है बल्कि देशभर के पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एडमिशन की पूरी प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है। फिलहाल, कोर्ट का अगला कदम ही तय करेगा कि मेडिकल स्टूडेंट्स को राहत कब और कैसे मिलेगी। लेकिन एक बात साफ है कि जब तक इस याचिका पर फैसला नहीं आता, तब तक मेडिकल करियर की राह में बैठे हजारों उम्मीदवारों की बेचैनी कम होने वाली नहीं।





