Success Story: प्रेगनेंसी में पति ने घर से निकाला, बच्चे को गोद में लेकर की UPSC की तैयारी, AIR 23 लाकर बनीं अफसर
UPSC Success Story: राजस्थान की डॉ. सुनीता जाट ने 6 महीने की प्रेगनेंसी में पति द्वारा छोड़े जाने, पिता के निधन और डिप्रेशन से लड़कर यूपीएससी परीक्षा में 23वीं रैंक हासिल की है।

UPSC Success Story of Sunita Jat: कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों तो किस्मत की हर लकीर को बदला जा सकता है। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के एक छोटे से गांव सुवाणा की रहने वाली डॉ. सुनीता जाट की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। यह कहानी सिर्फ UPSC पास करने की नहीं है, बल्कि सामाजिक रूढ़ियों, धोखे, डिप्रेशन और एक अकेली मां के आत्मसम्मान की जीत की है। सुनीता ने उन तमाम मुश्किलों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया जो किसी भी इंसान को तोड़ सकती हैं और यूपीएससी (UPSC CMS) परीक्षा में ऑल इंडिया 23वीं रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया।
पिता ने समाज के खिलाफ जाकर पढ़ाया, पर बीच सफर में छोड़ गए
सुनीता एक ऐसे ग्रामीण परिवेश से आती हैं जहां लड़कियों की पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान न देकर बचपन या बहुत कम उम्र में ही उनकी शादी कर दी जाती है। लेकिन सुनीता के पिता ने समाज और रिश्तेदारों के तानों को नजरअंदाज करते हुए अपनी बेटी का पूरा साथ दिया। उन्होंने बेटी के सपनों को पंख देने के लिए उसे कोटा भेजा, जहां कड़ी मेहनत के दम पर सुनीता ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा पास की और आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया। लेकिन मेडिकल (BAMS) की पढ़ाई के दौरान ही एक सुबह उनके पिता का अचानक निधन हो गया। इस सदमे ने सुनीता को अंदर से झकझोर दिया और वे गहरे डिप्रेशन में चली गईं, लेकिन पिता के सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने खुद को संभाला।
"घर नहीं, देश संभालूंगी" की बात पर पति ने घर से निकाला
पढ़ाई पूरी होने के बाद सुनीता की शादी हो गई। उन्होंने पहले ही ससुराल में साफ कर दिया था कि वे आगे पढ़ना और देश की सेवा करना चाहती हैं। लेकिन शादी के बाद उन पर घर बैठने और सिर्फ बच्चा पैदा करने का दबाव बनाया जाने लगा। जब सुनीता 6 महीने की प्रेगनेंट थीं, तब उनके सामने शर्त रखी गई कि या तो करियर चुनो या फिर शादी। सुनीता ने झुकने के बजाय अपने आत्मसम्मान को चुना और कहा, "मुझे सिर्फ घर नहीं, बल्कि देश संभालना है।" इसके बाद उनके पति और ससुराल वालों ने उन्हें गर्भावस्था में ही घर से निकाल दिया और रिश्ता तोड़ लिया।
बच्चे को गोद में लेकर की पढ़ाई, कोर्ट के चक्करों के बीच रचा इतिहास
एक सिंगल मदर के रूप में सुनीता का सफर किसी कड़े इम्तिहान से कम नहीं था। एक तरफ छोटे बच्चे की जिम्मेदारी, समाज के ताने और दूसरी तरफ तलाक के लिए कोर्ट-कचहरी के चक्कर। इन सबके बीच सुनीता दो बार गंभीर डिप्रेशन का शिकार हुईं। लेकिन उनकी मां ने उनका हौसला बढ़ाया। जब सुनीता पढ़ती थीं, तो उनकी मां बच्चे को संभालती थीं। कई बार तो सुनीता ने बच्चे को गोद में सुलाकर रात-रात भर पढ़ाई की।
उनकी यह तपस्या तब रंग लाई जब यूपीएससी का फाइनल रिजल्ट आया। सुनीता ने जब पीडीएफ में अपना नाम ऑल इंडिया रैंक 23 पर देखा, तो उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। आज सुनीता एक मेडिकल ऑफिसर (AMO) बन चुकी हैं। देश भर के छात्रों और विशेषकर कठिन हालातों से जूझ रही महिलाओं को संदेश देते हुए सुनीता कहती हैं, “अगर आपको जीवन में कुछ बड़ा हासिल करना है, तो अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकलना ही होगा। चुनौतियों से डरें नहीं, उनका सामना करना सीखें।”
लेखक के बारे में
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